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Hisar News: घुट-घुट कर मां मर रही, कभी ना पूछा हाल...
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क्रांतिमान पार्क हिसार में आयोजित काव्य गोष्ठी में शामिल रचनाकार।
हिसार। क्रांतिमान पार्क में सोमवार को प्रेरणा परिवार की मासिक काव्य गोष्ठी हुई। इसमें कई कवियों ने काव्य रचना पाठ किया। जयभगवान लाडवाल ने सुनाया कि घुट-घुट कर मां मर रही, कभी ना पूछा हाल, वे माता का जागरण करवाते हर साल।
मुख्य अतिथि मास्टर कृष्ण इंदौरा ने सुनाया कि किसी को गीता चाहिए, किसी को कुरान चाहिए, किसी को भजन चाहिए, किसी को अजान चाहिए। ये सब भरे पेट के चोंचले हैं साहब, मजदूर को सिर्फ रोटी-कपड़ा-मकान चाहिए। राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि तुम बढ़ो, न थको, न रुको किसी से आपने गुणों को अपनाओ, अणुव्रत का ये सच अपनाओ, चलो बच्चो आगे बढ़ जाओ। भीम सिंह हुड्डा ने सुनाया कि आदमी से अहम आजकल पैसा हो गया, पैसे के कारण भाई भी भाई का दुश्मन हो गया।
कलाकार वीरेंद्र कौशल ने फरमाया कि तीन रंगों का कपड़ा नहीं महज अपना तिरंगा, तीन मूल्यों की अमूल्य खान है अपना तिरंगा। ऋषि सक्सेना ने कहा कि हर इश्क का है यही अंजाम, होता है देखो अरमानों पर सवाल, मेरी हर सांस में तेरा ही नाम, तेरी चाहत का यही कमाल है।
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शिक्षाविद अशोक कुमार बंधु ने कहा कि प्रेम में प्रेम हो, जरूरी तो नहीं, नफरत में नफरत हो जरूरी तो नहीं। नदियां आखिर सागर में मिलतीं हैं मगर लहरें अपनी हों जरूरी तो नहीं। प्रिंसिपल अशोक गर्ग की अध्यक्षता में जयभगवान लाडवाल ने संचालन किया। इस अवसर पर मास्टर हवा सिंह शर्मा, जवाहर लाल, सरफराज आदि मौजूद थे।
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मुख्य अतिथि मास्टर कृष्ण इंदौरा ने सुनाया कि किसी को गीता चाहिए, किसी को कुरान चाहिए, किसी को भजन चाहिए, किसी को अजान चाहिए। ये सब भरे पेट के चोंचले हैं साहब, मजदूर को सिर्फ रोटी-कपड़ा-मकान चाहिए। राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि तुम बढ़ो, न थको, न रुको किसी से आपने गुणों को अपनाओ, अणुव्रत का ये सच अपनाओ, चलो बच्चो आगे बढ़ जाओ। भीम सिंह हुड्डा ने सुनाया कि आदमी से अहम आजकल पैसा हो गया, पैसे के कारण भाई भी भाई का दुश्मन हो गया।
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कलाकार वीरेंद्र कौशल ने फरमाया कि तीन रंगों का कपड़ा नहीं महज अपना तिरंगा, तीन मूल्यों की अमूल्य खान है अपना तिरंगा। ऋषि सक्सेना ने कहा कि हर इश्क का है यही अंजाम, होता है देखो अरमानों पर सवाल, मेरी हर सांस में तेरा ही नाम, तेरी चाहत का यही कमाल है।
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शिक्षाविद अशोक कुमार बंधु ने कहा कि प्रेम में प्रेम हो, जरूरी तो नहीं, नफरत में नफरत हो जरूरी तो नहीं। नदियां आखिर सागर में मिलतीं हैं मगर लहरें अपनी हों जरूरी तो नहीं। प्रिंसिपल अशोक गर्ग की अध्यक्षता में जयभगवान लाडवाल ने संचालन किया। इस अवसर पर मास्टर हवा सिंह शर्मा, जवाहर लाल, सरफराज आदि मौजूद थे।