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पूरे देश में एक समान होगा माइक्रोबायोलॉजी बीएससी, एमएससी का पाठ्यक्रम, बैंच मार्क तय होंगे : प्रो. कुहाड़

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Nov 2024 02:39 AM IST
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Microbiology B.Sc., M.Sc. syllabus will be uniform in the entire country, bench marks will be fixed: Prof. Kuhad
हिसार। देश भर में माइक्रोबायोलॉजी बीएससी, एमएससी का पाठयक्रम बदला जाएगा। पूरे देश में पाठयक्रम को एक समान किया जाएगा। पाठ्यक्रम को लेकर बैंचमार्क तय किए जाएंगे जिससे भारतीय विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई विदेश में करने दिक्कत नहीं आएगी। इंटरनेशनल लेवल के पाठ्यक्रम के अनुसार ही भारतीय पाठ्यक्रम भी होंगे। देश के चुनिंदा माइक्रोबायोलाॅजी की टीम इस पाठ्यक्रम को तैयार करेगी। इसमें औद्योगिक क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा।
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एसोसिएशन ऑफ माइक्रोबायोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया की तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांफ्रेंस के दूसरे दिन माइक्रोबायोलॉजी आउटकम बेस्ड कोर्स कुरिकुलम डेवलेपमेंट बैठक कुलपति कार्यालय के कमेटी हॉल में हुई। बैठक की अध्यक्षता इंडियन इंस्टीयूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) कोलकाता के निदेशक एवं एएमआई के अध्यक्ष प्रो. एसके खरे, केन्द्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा महेंद्रगढ़ के पूर्व कुलपति एवं एएमएससी के अध्यक्ष प्रो. आरसी कुहाड़ ने की। एएमआई की महासचिव प्रो. नमिता सिंह ने बताया कि एएमसी फेलो और विषय विशेषज्ञों ने मिलकर एक बहुविषयक पाठ्यक्रम विकसित किया है। इसमें विशेष रूप से माइक्रोबायोलॉजी के पाठ्यक्रम का विकास किया गया है। इसका पाठ्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाना था ताकि शिक्षण के परिणाम और दक्षताओं को मापा और सुधारा जा सके। मीटिंग में प्रिंस शर्मा, प्रो. नवीन गुप्ता, डाॅ. जोसेफ भाग्यराज, डाॅ. उर्वशी कुहाड़, डाॅ. विजय चौधरी, डाॅ. अमिता गुप्ता, डाॅ. प्रवीन रिशी, प्रो. प्रदीप वर्मा, डाॅ. सिनोश सक्रियाचन, डाॅ. सरवन सिंह, डाॅ. लिवलीन शुक्ला, डाॅ. सुनील सहित भी शामिल हुए।
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प्रो. आरसी कुहाड़ ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाएंगे। देश भर में हर साल करीब 20 हजार विद्यार्थी बीएससी माइक्रोबायोलाॅजी की डिग्री हासिल करते हैं तथा करीब 10 हजार विद्यार्थी एमएससी माइक्रोबायोलाॅजी डिग्री लेते हैं। पिछले कुछ साल से पाठयक्रमों में बदलाव नहीं किए गए हैं। साइंस में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं। ऐसे में समय के साथ चलते हुए उद्योगों की जरूरतों को समझते हुए नए पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे। जिसमें औद्योगिक जगत के एक्सपर्ट भी शामिल किए जाएंगे। फिलहाल एक रोडमैप तैयार कर लिया गया है। अब इस पर गहनता से विस्तारपूर्वक मंथन होगा। इसके बाद इस पाठ्यक्रम को अंतिम प्रारुप प्रदान किया जाएगा।
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अब क्या होगा..
पाठ्यक्रम तैयार करने के बाद इसे विश्वविद्यालय अनुसंधान आयोग यानी यूजीसी को भेजा जाएगा। यूजीसी की ओर से मॉडल प्रारुप को देश भर में उपलब्ध कराया जाएगा। सभी संस्थानाें को बीएससी, एमएससी के लिए इसे अपनाना होगा। संस्थानों को पाठ्यक्रम में 20 से 30 प्रतिशत बदलाव की छूट दी जाएगी। जिसमें स्थानीय विषय या जरूरत के हिसाब से बदलाव किया जा सकेगा। इसके बाद देश भर में माइक्रोबायोलॉजी के संस्थानों को भी एकरुपता देते हुए सभी के दाखिलों के लिए भी एक परीक्षा कराने पर फैसला लिया जाएगा।

फायदा क्या होगा.
फिलहाल एक प्रदेश की यूनिवर्सिटी की बीएससी या एमएससी इन माइक्रोबायोलॉजी कर रहे विद्यार्थी को एक साल पढ़ने के बाद दूसरे साल किसी दूसरे प्रदेश में दाखिला लेना होगा तो उसे कोई दिक्कत नहीं आएगी। एक बैंचमार्क स्थापित होने से इंटरनेशनल लेवल पर फायदा मिलेगा। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम बनने से रोजगार के अधिक अवसर मिलेगा। रिसर्च के लिए एक समान स्तर तैयार होगा। वन नेशन वन प्रोग्राम के तहत एकरूपता आएगी।
माइक्रोबायोलॉजी के देश के टॉप 5 संस्थान
आईएएसी बंगलूरू
सेंट्रल यूनिवर्सिटी हैदराबाद
दिल्ली यूनिवर्सिटी साउथ कैंपस
कोलकाता यूनिवर्सिटी
जोधपुर यूनिवर्सिटी
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