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Hisar News: आखिर घर आई लाडो
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लघु सचिवालय के बाहर हर्षिता से मिलने के इंतजार में बैठे अभिभाावक व दोनों भाई।
हिसार। आखिर 355 दिन बाद लाडो घर लौट आई...। बिटिया के इंतजार में पथराई आंखों में उस वक्त खुशी के आंसू छलक पड़े जब माता-पिता ने बेटी को देखा। वे इंस्टाग्राम को धन्यवाद देते नहीं थक रहे थे। दे भी क्यों नहीं, जिस बेटी को पूरा सिस्टम नहीं ढूंढ़ सका, वो इंस्टाग्राम पर डाले गए वीडियो ने कर दिया। सुनील सोनी के परिवार के लिए होली-दिवाली सहित सब त्योहार मानो आज एक साथ आ गए थे। हर त्योहार पर उन्होंने बिटिया को याद किया और यही प्रार्थना की कि इस बार नहीं तो अगली बेटी जरूर उनके साथ हो।
इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई वीडियो को देखकर दिल्ली में रहने वाले एक युवक ने किशोरी हर्षिता के पिता को फोन कर बताया कि आपकी बेटी यहां रह रही है। इसकी जानकारी मिलते ही पूरा परिवार खुशी से उछल पड़ा। सुनील सोनी ने तत्काल इसकी जानकारी हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को दी और वीरवार रात दिल्ली में बताए गए ठिकाने पर पहुंच गए। बेटी को सामने देखकर सुनील सोनी को एकबारगी तो यकीन ही नहीं हुआ कि जिसे ढूंढ़ने के लिए साल भर से भटक रहे थे, वो एकाएक सामने आ जाएगी। वहां से पुलिस के साथ बेटी को लेकर हिसार पहुंचे।
आजाद नगर निवासी सुनील सोनी ने बताया कि बेटी हर्षिता 29 सितंबर को घर छोड़कर चली गई थी। सीसीटीवी कैमरों में वह आजाद नगर मेन रोड तक जाते हुए दिखाई दी। इसके बाद वह ऑटो में सवार होकर चली गई। तब से उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसकी तलाश के लिए 355 दिन तक संघर्ष किया। पत्नी और दो छोटे बेटों के साथ गर्मी-सर्दी, भूख -प्यास की परवाह किए बिना खुले आसमां के नीचे धरने पर बैठे। हिसार से चंडीगढ़ तक पैदल यात्रा निकाली। सिस्टम ने सुनवाई नहीं की तो मजबूर होकर आत्मदाह का प्रयास भी किया। इसके बावजूद यह विश्वास था कि एक दिन बिटिया जरूर मिल जाएगी। उन्होंने इस संघर्ष में साथ देने वाले संगठनों, समाज के लोगों का आभार जताया।
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वीरवार को आया था फोन
सुनील सोनी ने बताया कि 18 सितंबर को उनके पास एक युवक का फोन आया। उसने कहा कि मैंने आपकी बेटी को देखा है। उससे पूछा कि यह आपको कैसे पता कि मेरी बेटी लापता है। इस पर उसने कहा कि इंस्टाग्राम पर वीडियो देखा है, जिसमें तस्वीर के साथ बेटी के लापता होने का जिक्र और ढूंढ़ने की मदद की अपील की जा रही है। उसने बताया कि आपकी बेटी दिल्ली में मेरे पड़ोस में रह रही है। सुनील सोनी ने कहा, हमारे पास पहले भी कई बार फेक कॉल आ चुके हैं। कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे। क्या वाकई में वीडियो में जो तस्वीर है, वह लड़की आपके पड़ोस में रह रही है। फोन करने वाले ने कहा कि मेरा फोन नंबर ऑन रहेगा। आप यहां आ जाइए मैं आपको लेकर चलूंगा।
मैं भूला न सकूंगी यह दिन
हर्षिता की मां ने कहा कि आज का दिन हमेशा याद रहेगा, मैं इसे भूला न सकूंगी। लोगों ने हमें क्या-क्या कहा, वो भी याद रहेगा। मुझे सौतली मां बताकर तरह-तरह के आरोप लगाए। बेटी के लिए हम कितने दिन भूखे सड़कों पर रहे पर उम्मीद थी कि बेटी जरूर मिलेगी। हमने हौसला नहीं खोया। भगवान ने आज बेटी से मिला दिया। जिन लोगों ने हमारा साथ दिया उनका आभार जताने के लिए शब्द नहीं है।
घरों में सफाई का काम करती थी
हर्षिता को दिल्ली में 9 महीने तक लोगों के घरों में साफ-सफाई का काम करना पड़ा। रहने व खाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। वह अपने साथ कोई मोबाइल नंबर नहीं लेकर गई जिस कारण उसे ढूंढ पाने में पुलिस को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पुलिस ने एंटी ट्रैफिकिंग विंग से लेकर बॉर्डर पर तैनात फोर्स तक सभी जगह संपर्क कर उसे खोजने का प्रयास किया।
अमर उजाला ने चलाई थी मुहिम
सुनील सोनी के संघर्ष और पीड़ा को देखते हुए अमर उजाला ने लाडो को लाना है मुहिम चलाई थी। इसका नतीजा यह रहा कि पुलिस-प्रशासन को संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार से मिलने के लिए धरनास्थल पर आना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने 15 दिन का समय मांग कर धरना स्थगित कराया। साथ ही जांच को गति दी। पुलिस 15 दिन में हर्षिता को नहीं ढूंढ़ पाई तो परिवार फिर से धरने पर बैठ गया। अमर उजाला ने लगातार कवरेज देकर इस परिवार के संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाया। नतीजतन कई संगठनों का साथ मिला। वे इनके संघर्ष के हमराही बनकर सड़कों पर उतरे।
कब क्या हुआ
29 सितंबर 2024 : सुबह करीब 6 बजे हर्षिता घर छोड़कर निकली। ऑटो में बैठ कर जाते दिखाई दी।
30 सितंबर : हर्षिता के पिता सुनील सोनी ने आजाद नगर थाने में शिकायत दी।
10 नवंबर: परिजनों ने लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया। आजाद नगर थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद परिवार लौटा।
10 दिसंबर: परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर दूसरी बाहर धरना शुरू किया।
15 दिसंबर: हर्षिता के पिता सुनील सोनी ने आमरण अनशन शुरू किया।
23 दिसंबर: एसडीएम व अन्य अधिकारियों ने 15 दिन का समय मांग कर धरना समाप्त कराया।
09 जनवरी 2025: सुनील सोनी ने एचएयू में सीएम के कार्यक्रम के दौरान आत्मदाह का प्रयास किया।
09 जनवरी: सीएम ने सुनील सोनी से बातचीत की। एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई।
19 जनवरी: परिवार ने तीसरी बार लघु सचिवालय पर धरना शुरू किया।
04 फरवरी: पीड़ित परिवार ने सीएम से मिलने जाने के लिए पैदल यात्रा निकालने का एलान किया।
10 फरवरी को सुनील सोनी ने अपनी पत्नी व दोनों बेटों के साथ सीएम से मिलने चंडीगढ़ जाने के लिए पदयात्रा शुरु की।
17 फरवरी: परिवार चंडीगढ़ में सीएम से मिलकर वापस लौटा ।
10 मार्च : हर्षिता का मामला स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।
06 जून: पीड़ित परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर चौथी बार धरना शुरू किया।
14 जुलाई: पीड़ित परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर पांचवीं बार धरना दिया।
18 सितंबर: सुनील सोनी के पास फोन आया कि आपकी बेटी दिल्ली में रह रही है।
19 सितंबर: लापता बिटिया को सुबह 3 बजे हिसार लाया गया।
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इंस्टाग्राम पर अपलोड की गई वीडियो को देखकर दिल्ली में रहने वाले एक युवक ने किशोरी हर्षिता के पिता को फोन कर बताया कि आपकी बेटी यहां रह रही है। इसकी जानकारी मिलते ही पूरा परिवार खुशी से उछल पड़ा। सुनील सोनी ने तत्काल इसकी जानकारी हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को दी और वीरवार रात दिल्ली में बताए गए ठिकाने पर पहुंच गए। बेटी को सामने देखकर सुनील सोनी को एकबारगी तो यकीन ही नहीं हुआ कि जिसे ढूंढ़ने के लिए साल भर से भटक रहे थे, वो एकाएक सामने आ जाएगी। वहां से पुलिस के साथ बेटी को लेकर हिसार पहुंचे।
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आजाद नगर निवासी सुनील सोनी ने बताया कि बेटी हर्षिता 29 सितंबर को घर छोड़कर चली गई थी। सीसीटीवी कैमरों में वह आजाद नगर मेन रोड तक जाते हुए दिखाई दी। इसके बाद वह ऑटो में सवार होकर चली गई। तब से उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसकी तलाश के लिए 355 दिन तक संघर्ष किया। पत्नी और दो छोटे बेटों के साथ गर्मी-सर्दी, भूख -प्यास की परवाह किए बिना खुले आसमां के नीचे धरने पर बैठे। हिसार से चंडीगढ़ तक पैदल यात्रा निकाली। सिस्टम ने सुनवाई नहीं की तो मजबूर होकर आत्मदाह का प्रयास भी किया। इसके बावजूद यह विश्वास था कि एक दिन बिटिया जरूर मिल जाएगी। उन्होंने इस संघर्ष में साथ देने वाले संगठनों, समाज के लोगों का आभार जताया।
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वीरवार को आया था फोन
सुनील सोनी ने बताया कि 18 सितंबर को उनके पास एक युवक का फोन आया। उसने कहा कि मैंने आपकी बेटी को देखा है। उससे पूछा कि यह आपको कैसे पता कि मेरी बेटी लापता है। इस पर उसने कहा कि इंस्टाग्राम पर वीडियो देखा है, जिसमें तस्वीर के साथ बेटी के लापता होने का जिक्र और ढूंढ़ने की मदद की अपील की जा रही है। उसने बताया कि आपकी बेटी दिल्ली में मेरे पड़ोस में रह रही है। सुनील सोनी ने कहा, हमारे पास पहले भी कई बार फेक कॉल आ चुके हैं। कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे। क्या वाकई में वीडियो में जो तस्वीर है, वह लड़की आपके पड़ोस में रह रही है। फोन करने वाले ने कहा कि मेरा फोन नंबर ऑन रहेगा। आप यहां आ जाइए मैं आपको लेकर चलूंगा।
मैं भूला न सकूंगी यह दिन
हर्षिता की मां ने कहा कि आज का दिन हमेशा याद रहेगा, मैं इसे भूला न सकूंगी। लोगों ने हमें क्या-क्या कहा, वो भी याद रहेगा। मुझे सौतली मां बताकर तरह-तरह के आरोप लगाए। बेटी के लिए हम कितने दिन भूखे सड़कों पर रहे पर उम्मीद थी कि बेटी जरूर मिलेगी। हमने हौसला नहीं खोया। भगवान ने आज बेटी से मिला दिया। जिन लोगों ने हमारा साथ दिया उनका आभार जताने के लिए शब्द नहीं है।
घरों में सफाई का काम करती थी
हर्षिता को दिल्ली में 9 महीने तक लोगों के घरों में साफ-सफाई का काम करना पड़ा। रहने व खाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। वह अपने साथ कोई मोबाइल नंबर नहीं लेकर गई जिस कारण उसे ढूंढ पाने में पुलिस को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पुलिस ने एंटी ट्रैफिकिंग विंग से लेकर बॉर्डर पर तैनात फोर्स तक सभी जगह संपर्क कर उसे खोजने का प्रयास किया।
अमर उजाला ने चलाई थी मुहिम
सुनील सोनी के संघर्ष और पीड़ा को देखते हुए अमर उजाला ने लाडो को लाना है मुहिम चलाई थी। इसका नतीजा यह रहा कि पुलिस-प्रशासन को संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार से मिलने के लिए धरनास्थल पर आना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने 15 दिन का समय मांग कर धरना स्थगित कराया। साथ ही जांच को गति दी। पुलिस 15 दिन में हर्षिता को नहीं ढूंढ़ पाई तो परिवार फिर से धरने पर बैठ गया। अमर उजाला ने लगातार कवरेज देकर इस परिवार के संघर्ष को जन-जन तक पहुंचाया। नतीजतन कई संगठनों का साथ मिला। वे इनके संघर्ष के हमराही बनकर सड़कों पर उतरे।
कब क्या हुआ
29 सितंबर 2024 : सुबह करीब 6 बजे हर्षिता घर छोड़कर निकली। ऑटो में बैठ कर जाते दिखाई दी।
30 सितंबर : हर्षिता के पिता सुनील सोनी ने आजाद नगर थाने में शिकायत दी।
10 नवंबर: परिजनों ने लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया। आजाद नगर थाना प्रभारी के आश्वासन के बाद परिवार लौटा।
10 दिसंबर: परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर दूसरी बाहर धरना शुरू किया।
15 दिसंबर: हर्षिता के पिता सुनील सोनी ने आमरण अनशन शुरू किया।
23 दिसंबर: एसडीएम व अन्य अधिकारियों ने 15 दिन का समय मांग कर धरना समाप्त कराया।
09 जनवरी 2025: सुनील सोनी ने एचएयू में सीएम के कार्यक्रम के दौरान आत्मदाह का प्रयास किया।
09 जनवरी: सीएम ने सुनील सोनी से बातचीत की। एएसपी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई।
19 जनवरी: परिवार ने तीसरी बार लघु सचिवालय पर धरना शुरू किया।
04 फरवरी: पीड़ित परिवार ने सीएम से मिलने जाने के लिए पैदल यात्रा निकालने का एलान किया।
10 फरवरी को सुनील सोनी ने अपनी पत्नी व दोनों बेटों के साथ सीएम से मिलने चंडीगढ़ जाने के लिए पदयात्रा शुरु की।
17 फरवरी: परिवार चंडीगढ़ में सीएम से मिलकर वापस लौटा ।
10 मार्च : हर्षिता का मामला स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपा गया।
06 जून: पीड़ित परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर चौथी बार धरना शुरू किया।
14 जुलाई: पीड़ित परिवार ने लघु सचिवालय के बाहर पांचवीं बार धरना दिया।
18 सितंबर: सुनील सोनी के पास फोन आया कि आपकी बेटी दिल्ली में रह रही है।
19 सितंबर: लापता बिटिया को सुबह 3 बजे हिसार लाया गया।