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खेजड़ी की बेटी नाटक के जरिये दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Sat, 05 Sep 2015 12:32 AM IST
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गुरु जंभेश्वर महाराज के नाम पर बने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पहली बार खेजड़ी को लेकर दिए गए बलिदान की गाथा नाटक के माध्यम से दिखाई गई।
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पहली बार विवि के छात्रों को बताया कि आखिरकार गुरु जंभेश्वर महाराज कौन थे और पूरा विश्व उन्हें किन आदर्शों के लिए जानता है। विवि के धार्मिक अध्ययन संस्थान के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में ऐतिहासिक नाटक खेजड़ी की बेटी का मंचन किया गया और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मोर नृत्य प्रस्तुत किया गया।
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विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आरएस शर्मा बतौर मुख्यातिथि उपस्थित रहे। कुलसचिव प्रो. एमएस तुरान विशिष्ट अतिथि रूप में उपस्थित रहे।
अध्यक्षता धार्मिक अध्ययन केंद्र के चेयरमैन डॉ. किशना राम ने की। डॉ. किशना राम ने खेजड़ी आंदोलन के बारे में बताया कि यह विश्व में अपनी तरह की अनोखी घटना है। जब 363 महिला-पुरुषों ने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान किया था।
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जीजेयू के शिक्षकों और छात्रों ने लिया पेड़ बचाने का संकल्प
अभी तक किताबों में पढ़े जाने वाला खेजड़ी आंदोलन शुक्रवार को जीवन रूप में जीजेयू के ऑडिटोरियम में दिखाया गया। खेजड़ी की बेटी नामक यह नाटक अशोक राही द्वारा लिखा गया है।
पेड़ न काटने को लेकर सदियों पहले किया गया यह आंदोलन एक बार लोगों के दिलों में पर्यावरण को बचाने की अलख जगा गया।
इस नाटक के माध्यम से जीजेयू के शिक्षकों, छात्राओं और कर्मचारियों को वृक्ष बचाने की सीख दी गई। गुरु जंभेश्वर महाराज के जन्मोत्सव मौके पर पहली बार जीजेयू में इस नाटक का मंचन किया गया है। जीजेयू के छात्रों ने मोर नृत्य ऑडिटोरियम में प्रस्तुत किया। मोर नृत्य को देखकर दर्शक झूम उठे।