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Hisar News: आईएमसी में 55 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, स्थानीय को नहीं कोई आरक्षण
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हिसार। आईएमसी परियोजना की पर्यावरणीय अनुमति को लेकर आयोजित जनसुनवाई में मौजूद आमजन। अमर उजाला
हिसार। महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के पास 2988 एकड़ में एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी) परियोजना मूर्त रूप लेती है तो प्रथम चरण में 55 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। हालांकि आईएमसी में स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय युवाओं को लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है जिसकी जैसी योग्यता होगी, उस अनुरूप काम मिल जाएगा। पर्यावरणीय अनुमति के लिए सोमवार को जनसुनवाई के दौरान रोजगार संबंधी सवालों पर उपायुक्त ने यह बात कही। पर्यावरण सलाहकार ने लोगों को परियोजना के बारे में बताकर उनकी जिज्ञासाएं शांत की।
आसपास के गांवों से आए लोगों ने पूछा कि आईएमसी बन रहा है तो स्थानीय लोगों को कितना रोजगार मिलेगा। इस पर उपायुक्त महेंद्रपाल ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर का निर्माण दो चरणों किया जाना प्रस्तावित है। पहले चरण में 378.69 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना था। मगर बाद में इसका एरिया बढ़ाकर 649.52 हेक्टेयर कर दिया गया। साथ ही औद्योगिक श्रेणी को बी से ए में संशोधित कर दिया गया। चूंकि परियोजना का क्षेत्र 500 हेक्टेयर से ज्यादा है और इसमें श्रेणी बी के उद्योग शामिल हैं तो इस परियोजना को धरातल पर मूर्त रूप देने से पहले पर्यावरणीय अनुमति लेनी पड़ेगी।
ये सवाल पूछे गए
- तलवंडी राणा से कृष्ण कुमार ने पूछा कि हरित पट्टी कितने एरिया में विकसित होगी। क्या इसी एरिया में से हरित पट्टी विकसित की जाएगी या इसके लिए और जमीन ली जाएगी। सलाहकार एजेंसी ने बताया कि 649.52 हेक्टेयर में से 98.12 हेक्टेयर पर हरित पट्टी बनाई जाएगी।
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- सतबीर सिंह ने पूछा कि इस जमीन पर सभी सरकारी प्रोजेक्ट बनेंगे या प्राइवेट। उपायुक्त महेंद्रपाल ने बताया कि अभी तक क्लस्टर में सभी सरकारी प्रोजेक्ट ही हैं। सतबीर ने पूछा कि इस फार्म में खेती होती थी तो आसपास के लोगों को रोजगार मिलता था।
- रोजगार के लिए कोई आरक्षण के सवाल पर उपायुक्त ने कहा कि रोजगार शैक्षिक योग्यता और क्लस्टर की जरूरतों के अनुसार ही मिलेगा। चाहे वह स्थानीय हो या बाहर का रहने वाला। अन्य जो भी गतिविधियां होंगी, उसमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला वन अधिकारी ने पूछा कि कितने पेड़ काटे जाएंगे। इस पर एजेंसी ने बताया कि 248 पेड़ काटे जाएंगे और इनकी एवज में 2480 पेड़ लगाए जाएंगे।
तलवंडी राणा के लोगों ने मांगा स्थायी रोड
तलवंडी राणा के सरपंच दयाल सिंह ने गांव के लिए स्थायी रोड का मामला उठाया तो उपायुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट के साथ पुराना वाला रोड अभी चालू है। इसके अलावा एक और फोरलेन रोड बनाया जा रहा है जिसके लिए 70 प्रतिशत जमीन खरीदी जा चुकी है। उपायुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट के विस्तार के समय साथ वाला रोड प्रभावित होगा। विस्तार 2028 में होगा। तब तक इस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। ग्रामीणों ने रोडवेज बस गांव के अंदर से चलाने की मांग की। उपायुक्त ने कहा कि वह इस बारे में रोडवेज जीएम से बातचीत करेंगे।
अगले साल मई में टेंडर लगाने की योजना
प्रथम चरण के लिए 6 माह में अनुमति ले ली जाएगी। अगले साल मई में टेंडर लगाया जाएगा। 36 माह में एजेंसी को काम पूरा करना होगा। इसके तहत सड़क निर्माण, जल निकासी, बिजली आपूर्ति, जल सुविधा, स्ट्रीट लाइटिंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अग्निशमन प्रणाली, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्र व प्रशासनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
ये उद्योग होंगे स्थापित
आईएमसी में विमानन से संबद्ध और सहायक उद्योगों जैसे एयरोस्पेस, रक्षा अभियांत्रिकी एवं निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण, परिधान और परिवहन एवं आपूर्ति प्रबंधन से जुडे़ उद्योग स्थापित होंगे।
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प्रथम चरण का विवरण
प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 649.48 हेक्टेयर
हरित क्षेत्र 98.122 हेक्टेयर
परियोजना की लागत 1416.19 करोड़ रुपये
श्रम शक्ति 93,645
पानी की कुल मांग 31024 किलोलीटर प्रतिदिन
ताजे पानी की मांग 14376 किलोलीटर प्रतिदिन
पुनर्चक्रित पानी 16259 मिलियन लीटर
बिजली की आवश्यकता 170 मेगावॉट
पुनर्चक्रित जल का इस्तेमाल किया जाएगा
एजेंसी ने बताया कि आईएमसी के संचालन के दौरान कुल पानी की जरूरत में से प्रतिदिन 16259 किलो लीटर पुनर्चक्रित जल का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे ताजा जल पर निर्भरता कम होगी। क्लस्टर में लगने वाले एसटीपी से प्राप्त होने वाले उपचारित जल का इस्तेमाल हरित पट्टी, बागवानी व औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाएगा। आईएमसी के निर्माण के लिए राणा माइनर को शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, बिजली की आपूर्ति के लिए सौर उर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे करीब 118.44 माइक्रोमीटर प्रति वर्ष उर्जा का उत्पादन किया जाएगा। यह क्लस्टर की कुल बिजली मांग का लगभग 12 प्रतिशत जरूरत को पूरा करेगा।
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पर्यावरण प्रबंधन कक्ष किया जाएगा स्थापित
क्लस्टर में पर्यावरण प्रबंधन योजना को बेहतर ढंग से लागू करने व क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण प्रबंधन कक्ष स्थापित किया जाएगा। इस दौरान उपायुक्त व एजेंसी प्रतिनिधियों कहा कि प्रदूषण के स्तर का पता करने के लिए स्क्रीन भी लगाई जाए, जिस पर एक्यूआई दर्शाया जाए। इसके अलावा एक कॉरपोरेट पर्यावरण उत्तरदायित्व फंड भी बनाया जाएगा। इस फंड के लिए करीब 7 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसका इस्तेमाल स्थानीय गांवाें में शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाएगा। उपायुक्त महेंद्रपाल ने कहा कि इस प्रकोष्ठ में गांव के लोगों को भी शामिल किया जाए।
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आसपास के गांवों से आए लोगों ने पूछा कि आईएमसी बन रहा है तो स्थानीय लोगों को कितना रोजगार मिलेगा। इस पर उपायुक्त महेंद्रपाल ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर का निर्माण दो चरणों किया जाना प्रस्तावित है। पहले चरण में 378.69 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना था। मगर बाद में इसका एरिया बढ़ाकर 649.52 हेक्टेयर कर दिया गया। साथ ही औद्योगिक श्रेणी को बी से ए में संशोधित कर दिया गया। चूंकि परियोजना का क्षेत्र 500 हेक्टेयर से ज्यादा है और इसमें श्रेणी बी के उद्योग शामिल हैं तो इस परियोजना को धरातल पर मूर्त रूप देने से पहले पर्यावरणीय अनुमति लेनी पड़ेगी।
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ये सवाल पूछे गए
- तलवंडी राणा से कृष्ण कुमार ने पूछा कि हरित पट्टी कितने एरिया में विकसित होगी। क्या इसी एरिया में से हरित पट्टी विकसित की जाएगी या इसके लिए और जमीन ली जाएगी। सलाहकार एजेंसी ने बताया कि 649.52 हेक्टेयर में से 98.12 हेक्टेयर पर हरित पट्टी बनाई जाएगी।
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- सतबीर सिंह ने पूछा कि इस जमीन पर सभी सरकारी प्रोजेक्ट बनेंगे या प्राइवेट। उपायुक्त महेंद्रपाल ने बताया कि अभी तक क्लस्टर में सभी सरकारी प्रोजेक्ट ही हैं। सतबीर ने पूछा कि इस फार्म में खेती होती थी तो आसपास के लोगों को रोजगार मिलता था।
- रोजगार के लिए कोई आरक्षण के सवाल पर उपायुक्त ने कहा कि रोजगार शैक्षिक योग्यता और क्लस्टर की जरूरतों के अनुसार ही मिलेगा। चाहे वह स्थानीय हो या बाहर का रहने वाला। अन्य जो भी गतिविधियां होंगी, उसमें स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला वन अधिकारी ने पूछा कि कितने पेड़ काटे जाएंगे। इस पर एजेंसी ने बताया कि 248 पेड़ काटे जाएंगे और इनकी एवज में 2480 पेड़ लगाए जाएंगे।
तलवंडी राणा के लोगों ने मांगा स्थायी रोड
तलवंडी राणा के सरपंच दयाल सिंह ने गांव के लिए स्थायी रोड का मामला उठाया तो उपायुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट के साथ पुराना वाला रोड अभी चालू है। इसके अलावा एक और फोरलेन रोड बनाया जा रहा है जिसके लिए 70 प्रतिशत जमीन खरीदी जा चुकी है। उपायुक्त ने कहा कि एयरपोर्ट के विस्तार के समय साथ वाला रोड प्रभावित होगा। विस्तार 2028 में होगा। तब तक इस रोड का इस्तेमाल कर सकेंगे। ग्रामीणों ने रोडवेज बस गांव के अंदर से चलाने की मांग की। उपायुक्त ने कहा कि वह इस बारे में रोडवेज जीएम से बातचीत करेंगे।
अगले साल मई में टेंडर लगाने की योजना
प्रथम चरण के लिए 6 माह में अनुमति ले ली जाएगी। अगले साल मई में टेंडर लगाया जाएगा। 36 माह में एजेंसी को काम पूरा करना होगा। इसके तहत सड़क निर्माण, जल निकासी, बिजली आपूर्ति, जल सुविधा, स्ट्रीट लाइटिंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, अग्निशमन प्रणाली, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्र व प्रशासनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
ये उद्योग होंगे स्थापित
आईएमसी में विमानन से संबद्ध और सहायक उद्योगों जैसे एयरोस्पेस, रक्षा अभियांत्रिकी एवं निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण, परिधान और परिवहन एवं आपूर्ति प्रबंधन से जुडे़ उद्योग स्थापित होंगे।
प्रथम चरण का विवरण
प्लॉट का कुल क्षेत्रफल 649.48 हेक्टेयर
हरित क्षेत्र 98.122 हेक्टेयर
परियोजना की लागत 1416.19 करोड़ रुपये
श्रम शक्ति 93,645
पानी की कुल मांग 31024 किलोलीटर प्रतिदिन
ताजे पानी की मांग 14376 किलोलीटर प्रतिदिन
पुनर्चक्रित पानी 16259 मिलियन लीटर
बिजली की आवश्यकता 170 मेगावॉट
पुनर्चक्रित जल का इस्तेमाल किया जाएगा
एजेंसी ने बताया कि आईएमसी के संचालन के दौरान कुल पानी की जरूरत में से प्रतिदिन 16259 किलो लीटर पुनर्चक्रित जल का इस्तेमाल किया जाएगा जिससे ताजा जल पर निर्भरता कम होगी। क्लस्टर में लगने वाले एसटीपी से प्राप्त होने वाले उपचारित जल का इस्तेमाल हरित पट्टी, बागवानी व औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए किया जाएगा। आईएमसी के निर्माण के लिए राणा माइनर को शिफ्ट किया जाएगा। वहीं, बिजली की आपूर्ति के लिए सौर उर्जा का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे करीब 118.44 माइक्रोमीटर प्रति वर्ष उर्जा का उत्पादन किया जाएगा। यह क्लस्टर की कुल बिजली मांग का लगभग 12 प्रतिशत जरूरत को पूरा करेगा।
पर्यावरण प्रबंधन कक्ष किया जाएगा स्थापित
क्लस्टर में पर्यावरण प्रबंधन योजना को बेहतर ढंग से लागू करने व क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण प्रबंधन कक्ष स्थापित किया जाएगा। इस दौरान उपायुक्त व एजेंसी प्रतिनिधियों कहा कि प्रदूषण के स्तर का पता करने के लिए स्क्रीन भी लगाई जाए, जिस पर एक्यूआई दर्शाया जाए। इसके अलावा एक कॉरपोरेट पर्यावरण उत्तरदायित्व फंड भी बनाया जाएगा। इस फंड के लिए करीब 7 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसका इस्तेमाल स्थानीय गांवाें में शिक्षा, स्वच्छता, पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किया जाएगा। उपायुक्त महेंद्रपाल ने कहा कि इस प्रकोष्ठ में गांव के लोगों को भी शामिल किया जाए।