फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Hisar News ›   Gold rained down from Ankush's punches; Savita stood like a wall and shattered China's hopes.

Hisar News: अंकुश के मुक्कों से बरसा सोना, सविता ने दीवार बन तोड़ी चीन की उम्मीद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:13 AM IST
विज्ञापन
Gold rained down from Ankush's punches; Savita stood like a wall and shattered China's hopes.
अंकुश पंघाल
हिसार। गांव भेरिया के मुक्केबाज अंकुश पंघाल और भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर जोधका निवासी सविता पूनिया ने अपने प्रदर्शन की बदौलत एशियाई खेलों में गांव और देश का नाम रोशन कर दिया। फाइनल में दमदार पंचों के प्रहार से अंकुश ने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को करारी शिकस्त दी। अंकुश के गोल्ड मेडल जीतते ही परिजन खुशी से उछल पड़े। पिता सुरेश पंघाल ने कहा कि बेटे ने कमाल कर दिया। उसने क्वार्टर फाइनल जीतते ही कहा था कि चिंता नहीं करना, आगे भी खुशखबरी दूंगा। उसके आत्मविश्वास से ही पता चल गया था कि बेटा इस बार गोल्ड लेकर आएगा।
विज्ञापन

एशियाई खेलों में अंकुश ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। हर चरण में उसका आत्मविश्वास पहले से ज्यादा मजबूत हुआ। राष्ट्रमंडल खेलों में भी अंकुश ने गोल्ड मेडल जीता था। पिता ने बताया कि पहले चरण में 0-5 से पिछड़ने के बावजूद अंकुश ने वापसी की। यह उसके जीत के प्रति जुनून और जुझारूपन को दर्शाता है। कोच प्रदीप सावंत ने कहा कि अंकुश ने लेफ्ट हुक और राइट अपर कट का अधिक प्रयोग किया। बेहतरीन फुटवर्क और पंच की गति तेज रही। इस कारण प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को आक्रामक खेलने का अवसर ही नहीं मिला। मां मुकेश देवी ने कहा कि अंकुश को पूड़ा और मालपुआ बेहद पसंद है। पांच अक्तूबर को घर आने पर उसे ये दोनों व्यंजन बनाकर खिलाऊंगी।
विज्ञापन

---
सविता के पिता बोले- बेटी ने बाग-बाग कर दिया
हिसार। जोधकां गांव की बेटी और भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया ने एशियन गेम्स के फाइनल में ऐसा कारनामा कर दिखाया जिसे भारतीय महिला हॉकी के इतिहास में याद रखा जाएगा। सविता के शानदार प्रदर्शन ने परिजनों और गांववासियों को गौरवान्वित कर दिया। पिता महेंद्र सिंह ने कहा कि बेटी ने जीत की सौगात देकर बाग-बाग कर दिया है। कोच आजाद सिंह ने बताया कि सविता ने फाइनल में पेनल्टी स्ट्रोक का एक हाथ से बचाव कर चीन की बराबरी की उम्मीद तोड़ दी। फाइनल में चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारत के लिए जीत की चुनौती आसान नहीं थी। भारतीय टीम ने 10वें मिनट में गोल कर बढ़त ली और इसे बरकरार रखा। सविता ने पेनल्टी स्ट्रोक के दौरान शॉट की दिशा को भांपते हुए बाईं ओर छलांग लगाई और एक हाथ से गेंद रोक दी। साधारण परिवार से निकलकर भारतीय महिला हॉकी की सबसे भरोसेमंद गोलकीपरों में शामिल हुईं सविता को ‘द वॉल ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है। सविता ने हिसार में प्रशिक्षण लिया और करीब नौ साल तक यहीं पर एस्ट्रोटर्फ मैदान पर अभ्यास किया। पद्मश्री व अर्जुन पुरस्कार विजेता सविता पूनिया ने इससे पहले 2014 के एशियन गेम्स में कांस्य और 2018 में रजत पदक जीता। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

---
दीपिका के पिता बोले- बेटी ने गोल्ड जीतकर खुशियों की सौगात दी
हॉकी में दीपिका सहरावत टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 21 गोल करने वाली महिला खिलाड़ी बनीं। वह रोहतक जिले के गांव भैंसरुखुर्द की मूलवासी हैं। दीपिका के पिता जगदीश ने बताया कि बेटी ने गोल्ड जीतकर खुशियों की सौगात दी है। सभी परिजनों ने मुकाबला देखा। जीत के बाद से ही बधाई देने वालों का तांता लगा है। उन्होंने कहा कि बेटी को जिस उद्देश्य से हॉकी की स्टिक थमाई थी वो पूरा कर रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed