फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   GJU's hisar teacher research on sanitizer regarding coronavirus

कोरोना संबंधी शोध... शरीर को रसायनयुक्त सैनिटाइजर और सामान को पराबैंगनी किरणें करेंगी सैनिटाइज

Fri, 28 Aug 2020 01:16 PM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, हिसार
अमर उजाला, हिसार Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Fri, 28 Aug 2020 01:16 PM IST
विज्ञापन
GJU's hisar teacher research on sanitizer regarding coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में शोध जारी है। इस बीच गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (गुजवि) में असिस्टेंट प्रोफेसर इंजीनियर सरदुल सिंह ने इंसानों के अलावा, उनके सामान को अलग से सैनिटाइज करने वाला सिस्टम तैयार किया है। इंसान रसायनयुक्त टनल से सैनिटाइज होगा और उसका सामान जैसे मोबाइल, पर्स, घड़ी, डायरी, बैग आदि को पराबैंगनी किरणों से युक्त एक चैंबर अलग से सैनिटाइज करेगा। ये पराबैंगनी किरणें टाइप सी की होती हैं, जो इतनी घातक होती हैं कि डीएनए तक को खत्म कर सकती हैं।
विज्ञापन


ऐसे में सामान के ऊपर किसी भी तरह के जीवाणुओं, किटाणुओं का खात्मा हो जाएगा और कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका कम रह जाएगी। ये विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के पहले पेटेंट हैं। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार व कुलसचिव प्रो. हरभजन बंसल ने इंजीनियर सरदुल सिंह को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा है कि दोनों ही पेटेंट समाज व राष्ट्र के लिए अति उपयोगी हैं। यह विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। ये पेटेंट हमारे विश्वविद्यालय की विश्वस्तरीय शोध व्यवस्था को स्थापित करते हैं।
विज्ञापन


पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम का भी हुआ पेटेंट
मेट्रोपॉलिटन सिटी में आमतौर पर पार्किंग की दिक्कतें आती हैं, लेकिन इंजीनियर सरदुल सिंह ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जिससे यह समस्या खत्म हो जाएगी। इसके तहत चालक एक एप्लीकेशन को डाउनलोड करेगा। माना कि वह किसी मॉल में जाना चाहता है तो बाहर से ही एप को लॉगइन करने से उसे पता चल जाएगा कि मॉल की मल्टीस्टोरी पार्किंग में जगह है या नहीं, अगर है तो कहां पर है। उसे आसपास के संस्थानों में भी खाली पार्किंग का पता लग जाएगा। एप पर लॉगिन करने से जीपीएस के माध्यम से गाड़ी की लोकेशन पता चल जाएगी। यही नहीं, पार्किंग करने पर अगर कोई गाड़ी के साथ छेड़छाड़ करेगा तो उसका अलर्ट भी आपके फोन पर आ जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत में पेटेंट करवाने में लगते हैं 6-7 वर्ष
इंजीनियर सरदुल सिंह ने बताया कि भारत में पेटेंट करवाने में 6-7 वर्ष लग जाते हैं, जबकि यूएस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अधिकतम एक वर्ष में पेटेंट मिल जाता है। उन्होंने कोरोना के संबंध में बनाए गए सिस्टम को लेकर कहा कि कोरोना से संबंधित पहला शोधपत्र मार्च 2019 में आया था। उनके एक दोस्त ने कहा था कि दक्षिण अफ्रीकी देशों में कोई नई बीमारी आती है तो वे महामारी के रूप में जल्द ही फैल जाती है। फिर मार्च 2019 से ही सैनिटाइजर सिस्टम बनाने को लेकर काम शुरू कर दिया था। इस प्रोजेक्ट में विवि के बायो नैनो विभाग के एमएससी के पूर्व छात्र और मुरथल से पीएचडी कर रहे शोधार्थी अतुल कुमार भी शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed