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Hisar News: जीजेयू प्रशासन का यू-टर्न, कुछ नहीं छिपाने की वचनबद्धता का आदेश वापस
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हिसार। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (जीजेयू) में शिक्षकों और प्रशासन के बीच पत्रों की भाषा व कार्यप्रणाली को लेकर उपजा विवाद शिक्षक संघ के विरोध के बाद शांत होता नजर आ रहा है।
प्रशासन ने शिक्षकों और विभिन्न संस्थागत जिम्मेदारियां संभाल रहे सदस्यों से कुछ ही घंटों में दस्तावेज जमा कराने के साथ यह लिखित वचनबद्धता मांगी थी कि उन्होंने कोई दस्तावेज नहीं छिपाया है। शिक्षक संघ के विरोध के बाद कुलसचिव कार्यालय ने 1 अक्तूबर को नया आदेश जारी कर व्यक्तिगत वचनबद्धता की शर्त वापस ले ली है।
मामला राज्यपाल-सह-कुलाधिपति कार्यालय से 17 सितंबर को प्राप्त पत्र से जुड़ा है। इसमें पूर्व कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के कार्यकाल के विस्तार की अवधि में लिए गए निर्णयों और की गई कार्रवाई से संबंधित विवरण मांगा गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 और 28 सितंबर को पत्र जारी कर शिक्षकों व अधिकारियों से फाइलें, टिप्पणी पत्र और वित्तीय दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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साहित्योत्सव को लेकर शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति
शिक्षक संघ के महासचिव सुमित कुमार ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक एवं बौद्धिक महोत्सव साहित्योत्सव-अक्षरम् 2026 तत्कालीन कुलपति के विस्तारित कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही आयोजित हो चुका था। आयोजन से संबंधित बिल, स्वीकृतियां, टिप्पणी पत्र और अन्य आधिकारिक अभिलेख प्रशासनिक व वित्तीय शाखाओं में सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में व्यक्तिगत शिक्षकों को कुछ ही घंटों में पूरी फाइल प्रस्तुत करने के निर्देश देना व्यावहारिक नहीं है। इस तरह के दबाव और स्पष्टीकरण से शिक्षक भविष्य में अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेने से बच सकते हैं।
अब शाखा अधिकारी जमा करेंगे दस्तावेज
शिक्षक संघ के विरोध के बाद 1 अक्तूबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि अब किसी शिक्षक या अधिकारी से व्यक्तिगत वचनबद्धता लेने की आवश्यकता नहीं होगी। आवश्यक दस्तावेज स्थापना शाखा में जमा कराने की जिम्मेदारी संबंधित नियंत्रक अधिकारियों और शाखा अधिकारियों की होगी। आदेश की प्रति विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रशासनिक शाखाओं और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
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प्रशासन ने शिक्षकों और विभिन्न संस्थागत जिम्मेदारियां संभाल रहे सदस्यों से कुछ ही घंटों में दस्तावेज जमा कराने के साथ यह लिखित वचनबद्धता मांगी थी कि उन्होंने कोई दस्तावेज नहीं छिपाया है। शिक्षक संघ के विरोध के बाद कुलसचिव कार्यालय ने 1 अक्तूबर को नया आदेश जारी कर व्यक्तिगत वचनबद्धता की शर्त वापस ले ली है।
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मामला राज्यपाल-सह-कुलाधिपति कार्यालय से 17 सितंबर को प्राप्त पत्र से जुड़ा है। इसमें पूर्व कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई के कार्यकाल के विस्तार की अवधि में लिए गए निर्णयों और की गई कार्रवाई से संबंधित विवरण मांगा गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 और 28 सितंबर को पत्र जारी कर शिक्षकों व अधिकारियों से फाइलें, टिप्पणी पत्र और वित्तीय दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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साहित्योत्सव को लेकर शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति
शिक्षक संघ के महासचिव सुमित कुमार ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक एवं बौद्धिक महोत्सव साहित्योत्सव-अक्षरम् 2026 तत्कालीन कुलपति के विस्तारित कार्यकाल की शुरुआत से पहले ही आयोजित हो चुका था। आयोजन से संबंधित बिल, स्वीकृतियां, टिप्पणी पत्र और अन्य आधिकारिक अभिलेख प्रशासनिक व वित्तीय शाखाओं में सुरक्षित रहते हैं। ऐसे में व्यक्तिगत शिक्षकों को कुछ ही घंटों में पूरी फाइल प्रस्तुत करने के निर्देश देना व्यावहारिक नहीं है। इस तरह के दबाव और स्पष्टीकरण से शिक्षक भविष्य में अतिरिक्त जिम्मेदारियां लेने से बच सकते हैं।
अब शाखा अधिकारी जमा करेंगे दस्तावेज
शिक्षक संघ के विरोध के बाद 1 अक्तूबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि अब किसी शिक्षक या अधिकारी से व्यक्तिगत वचनबद्धता लेने की आवश्यकता नहीं होगी। आवश्यक दस्तावेज स्थापना शाखा में जमा कराने की जिम्मेदारी संबंधित नियंत्रक अधिकारियों और शाखा अधिकारियों की होगी। आदेश की प्रति विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रशासनिक शाखाओं और अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।