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Hisar News: सातरोड आरओबी पर कल से गर्डर लॉन्चिंग, 21 से 27 तक ब्लॉक मिला पर ट्रेनें चलेंगी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:04 AM IST
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Girder launching on Saatrod ROB from tomorrow, block was received from 21 to 27 but trains will run
सात रोड ओवर ब्रिज के पास रखे गार्डर। 
हिसार। साउथ बाईपास पर सातरोड के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर गर्डर रखने के लिए आखिर 11 महीने बाद रेलवे से अनुमति मिल गई। अब सोमवार से गर्डर लॉन्चिंग की जाएगी। इस कार्य के लिए रेलवे को 21 से 27 दिन का ब्लॉक मिला है। सात दिन में आरओबी के पिलर पर 6 गर्डर रखे जाएंगे। ब्लॉक के दौरान इस ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन जारी रहेगा, लेकिन वाहन चालकों को साउथ बाईपास को छोड़कर अन्य रूट अपनाना होगा।
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रेलवे की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार एक सप्ताह में गर्डर लॉन्चिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा। 21 जुलाई से रेलवे लाइन संख्या एलसी 88 (किमी 135/4-5) के रास्ते को स्थाई रूप से बंद कर दिया जाएगा। रेलवे इंजीनियर्स की निगरानी में लोक निर्माण विभाग के अधिकारी गर्डर लॉन्चिंग कराएंगे। इससे पहले 17 जुलाई को रेलवे की टीम ने गर्डर रखने के लिए निरीक्षण किया था। रेलवे की ओर से बिजली आपूर्ति बंद रखने का पावर ब्लॉक भी प्रदान किया गया है। पीडब्ल्यूडी की ओर से 21 जुलाई से मौके पर काम शुरू किया जाएगा। इसमें गर्डर लॉन्चिंग के लिए दिल्ली से हैवी लोड वाली स्पेशल क्रेन मंगवाई जाएंगी। पीडब्ल्यूडी की ओर से रोजाना एक गर्डर रखा जाएगा। सात दिन में इस काम को पूरा कर लिया जाएगा।
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पांच बार बढ़ चुकी है डेडलाइन

इस आरओबी का शिलान्यास तत्कालीन उपमुख्यमंत्री एवं पीडब्ल्यूडी मंत्री दुष्यंत चौटाला ने दिसंबर 2021 में किया था। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा फरवरी 2024 निर्धारित की गई थी। बाद में इसे बढ़ाकर जून 2024 कर दिया। इसके बाद इसे अक्तूबर 2024 तथा इसके बाद 31 मार्च 2025 तक बढ़ाया गया। चौथी बार में इसकी डेडलाइन 30 जून 2025 की गई थी। पांचवीं बार डेडलाइन बढ़ाकर 31 अगस्त 2025 की गई थी।
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अगस्त में रेलवे से मांगी थी मंजूरी







पीडब्ल्यूडी ने पिछले साल अगस्त में गर्डर की लॉन्चिंग ड्राइंग मंजूरी के लिए रेलवे को भेजी दी थी। इन 11 महीनों में रेलवे की तरफ से कई बार आपत्तियां लगाई गईं। एक बार गर्डर की गुणवत्ता पर भी आपत्ति लगा दी गई थी।

प्रोजेक्ट लेट होने के ये रहे कारण



आरओबी के पिलर के बीच हाईटेंशन लाइन आ गई थी, जिसके लिए आरओबी के डिजाइन में बदलाव करना पड़ा और इसे फिर से रेलवे से मंजूर करवाना पड़ा था। इस कार्य में काफी समय बर्बाद हुआ। इसके अलावा आरओबी के साथ बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की लाइन भी इसके बीच में आ गई थी, उसे भी शिफ्ट करने में थोड़ा समय लग गया। गर्डर लांचिंग की अनुमति मिलने में भी काफी समय लगा।


सातरोड आरओबी पर एक नजर

31.10 करोड़ रुपये की आएगी लागत

658 मीटर है लंबाई

11 मीटर है चौड़ाई

3-3 मीटर चौड़ी सर्विस रोड आरओबी के दोनों ओर बनेंगी

10 हजार वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं साउथ बाईपास से

रेलवे की ओर से गर्डर लॉन्चिंग कीअनुमति मिल चुकी है। 21 जुलाई से एलसी 88 को स्थायी तौर पर बंद किया जा रहा है। सातरोड आरओबी के निर्माण कार्य पूरा होने तक वाहन चालक वैकल्पिक रूट का प्रयोग करें। 31 अगस्त की डेडलाइन तक काम पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

- सचिन भाटी, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी
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