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टमाटर की तुड़ाई, लोडिंग, ट्रांसपोर्ट पर खर्च तीन रुपये और भाव मिल रहा दो रुपये किलो
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सुरेंद्र दलाल
हिसार। लॉकडाउन में सब्जी उत्पादक किसान ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उचित भाव नहीं मिलने से उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। इस बार टमाटर पैदा करने वाले किसानों को काफी घाटा हुआ है। किसानों के अनुसार टमाटर की तुड़ाई, लोडिंग, किराया भाड़ा लगाकर तीन रुपये प्रति किलो खर्च आता है, जबकि मंडी में जाकर टमाटर का भाव दो रुपये किलो तक ही मिला। ऐसे हालात बने तो किसानों ने टमाटर को मंडी ले जाना ही बंद कर दिया।
हरी मिर्च के भाव भी दस रुपये किलो तक ही मिले। तोरी, घिया, टिंडा, तरबूज, खरबूजा उगाने वाले किसानों को भी सामान्य की बजाय आधे भाव मिल रहे हैं, जिस कारण उन्हें इस बार खेती से फायदा होना तो दूर उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। किसानों को टमाटर की तुड़ाई, लोडिंग, ट्रांसपोर्टेशन पर औसतन तीन रुपये किलोग्राम तक का खर्च आ रहा है। किसानों को मंडी में टमाटर के भाव भी तीन से चार रुपये किलोग्राम ही मिल रहे हैं। पिछले सप्ताह किसानों का टमाटर दो रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भी बिका है।
क्या कहते हैं किसान
नहीं चुका पाऊंगा कर्ज
दो एकड़ में टमाटर लगाया था। खाद-बीज, बिजाई, खेत तैयार कराना, पानी का एक एकड़ पर 50 हजार रुपये खर्च आया। जमीन का किराया 30 हजार रुपये है। करीब 80 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च करने के बाद 50 हजार के टमाटर ही बेच पाया। अब आखिरी 15 दिन की खेती बची है। मुझे नहीं लगता कि मेरी लागत पूरी हो पाएगी। बैंकों का 10 लाख रुपये कर्ज है। इस बार कर्ज में से कुछ चुकाना चाहता था। अगर फसल को पूरा भाव मिलता तो दो लाख रुपये तक मुनाफा होने की आस थी।
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-ताराचंद, बहबलपुर, हिसार।
82 हजार रुपये खर्च, सब्जी बेची 42 हजार की
आधा एकड़ में करेला-भिंडी और आधा एकड़ में हरी मिर्च लगाई थी। किसी भी फसल का उचित भाव नहीं मिला। लॉकडाउन के कारण गाड़ियों का किराया भी ज्यादा है। अब थोड़ी सब्जी को बेचने के लिए मंडी जाएं तो खर्चा ज्यादा होगा। गांव के बस अड्डे पर दुकानदारों को सब्जी बेचकर आता हूं। मिर्च को 10 रुपये किलोग्राम के भाव पर भी लेने को तैयार नहीं। हिसार मंडी में भी पता किया वहां भी यही भाव मिल रहा है। 82 हजार रुपये का खर्च हो चुका। अब तक 45 हजार रुपये की सब्जी बेच पाया हूं।
- ईश्वर सिंह, बहबलपुर, हिसार
ट्रांसपोर्टेशन का खर्च ज्यादा
नवंबर में टमाटर की पौध लगाई थी। आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए 65 हजार रुपये के बांस खेत में लगवाए। 33 हजार रुपये तार, तीन क्विंटल सुतली, लेबर मिलाकर 1.5 लाख रुपये का खर्चा हुआ। टमाटर को नारनौंद मंडी में लेकर जाते थे। यहां भाव नहीं मिले तो जींद, हांसी भी गए। वहां भी ऐसा ही हाल रहा। जितने के टमाटर बिकते उससे ज्यादा खर्चा ट्रांसर्पोटेशन और मजदूरी का आ जाता था। कुल मिलाकर 42 हजार रुपये के ही टमाटर बिके।
- शमशेर लोहान, नारनौंद, हिसार
50 रुपये में बिक रहा 25 किलो टमाटर
टमाटर की 25 किलोग्राम की क्रेट महज 50 रुपये में बिक रही थी। तुड़ाई, किराया का खर्च ही 45 से 50 रुपये ही खर्च आ रहा था। दो एकड़ में टमाटर लगाए थे। करीब 12 हजार के टमाटर ही सीजन में बेच सके। करीब एक लाख रुपये खर्च आया था। मंडी में नहीं बिके तो हमने टमाटर गोशाला भेजे। पिछले साल भी नुकसान हुआ था।
जय सिंह, किसान, रायपुर
आवक अधिक होने से रेट कम
रायपुर, शिकारपुर, बहबलपुर से सब्जी अधिक आती है। इन गांवों में टमाटर की आवक होती है। पूरे जिले का 90 प्रतिशत टमाटर रायपुर-शिकारपुर से आता है। मंडी में रोजाना 500 क्विंटल लोकल टमाटर आता है। इस समय आवक अधिक होने के कारण रेट कम हैं।
-मुकेश थोक विक्रेता, सब्जी मंडी, हिसार
भावांतर भरपाई योजना के लिए पंजीकरण अनिवार्य
भावांतर भरपाई योजना के लिए फसल की बिजाई के समय ही पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण कराने वाले किसानों को फसल की ब्रिकी का जे फार्म लेना होगा। जिसकी एक प्रति मंडी मार्केट कमेटी कार्यालय में जमा करानी होती है। भाव के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाती है।
-सुरेंद्र सिहाग, जिला उद्यान अधिकारी, हिसार।
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हिसार। लॉकडाउन में सब्जी उत्पादक किसान ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उचित भाव नहीं मिलने से उनकी लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। इस बार टमाटर पैदा करने वाले किसानों को काफी घाटा हुआ है। किसानों के अनुसार टमाटर की तुड़ाई, लोडिंग, किराया भाड़ा लगाकर तीन रुपये प्रति किलो खर्च आता है, जबकि मंडी में जाकर टमाटर का भाव दो रुपये किलो तक ही मिला। ऐसे हालात बने तो किसानों ने टमाटर को मंडी ले जाना ही बंद कर दिया।
हरी मिर्च के भाव भी दस रुपये किलो तक ही मिले। तोरी, घिया, टिंडा, तरबूज, खरबूजा उगाने वाले किसानों को भी सामान्य की बजाय आधे भाव मिल रहे हैं, जिस कारण उन्हें इस बार खेती से फायदा होना तो दूर उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। किसानों को टमाटर की तुड़ाई, लोडिंग, ट्रांसपोर्टेशन पर औसतन तीन रुपये किलोग्राम तक का खर्च आ रहा है। किसानों को मंडी में टमाटर के भाव भी तीन से चार रुपये किलोग्राम ही मिल रहे हैं। पिछले सप्ताह किसानों का टमाटर दो रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से भी बिका है।
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क्या कहते हैं किसान
नहीं चुका पाऊंगा कर्ज
दो एकड़ में टमाटर लगाया था। खाद-बीज, बिजाई, खेत तैयार कराना, पानी का एक एकड़ पर 50 हजार रुपये खर्च आया। जमीन का किराया 30 हजार रुपये है। करीब 80 हजार रुपये प्रति एकड़ खर्च करने के बाद 50 हजार के टमाटर ही बेच पाया। अब आखिरी 15 दिन की खेती बची है। मुझे नहीं लगता कि मेरी लागत पूरी हो पाएगी। बैंकों का 10 लाख रुपये कर्ज है। इस बार कर्ज में से कुछ चुकाना चाहता था। अगर फसल को पूरा भाव मिलता तो दो लाख रुपये तक मुनाफा होने की आस थी।
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-ताराचंद, बहबलपुर, हिसार।
82 हजार रुपये खर्च, सब्जी बेची 42 हजार की
आधा एकड़ में करेला-भिंडी और आधा एकड़ में हरी मिर्च लगाई थी। किसी भी फसल का उचित भाव नहीं मिला। लॉकडाउन के कारण गाड़ियों का किराया भी ज्यादा है। अब थोड़ी सब्जी को बेचने के लिए मंडी जाएं तो खर्चा ज्यादा होगा। गांव के बस अड्डे पर दुकानदारों को सब्जी बेचकर आता हूं। मिर्च को 10 रुपये किलोग्राम के भाव पर भी लेने को तैयार नहीं। हिसार मंडी में भी पता किया वहां भी यही भाव मिल रहा है। 82 हजार रुपये का खर्च हो चुका। अब तक 45 हजार रुपये की सब्जी बेच पाया हूं।
- ईश्वर सिंह, बहबलपुर, हिसार
ट्रांसपोर्टेशन का खर्च ज्यादा
नवंबर में टमाटर की पौध लगाई थी। आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए 65 हजार रुपये के बांस खेत में लगवाए। 33 हजार रुपये तार, तीन क्विंटल सुतली, लेबर मिलाकर 1.5 लाख रुपये का खर्चा हुआ। टमाटर को नारनौंद मंडी में लेकर जाते थे। यहां भाव नहीं मिले तो जींद, हांसी भी गए। वहां भी ऐसा ही हाल रहा। जितने के टमाटर बिकते उससे ज्यादा खर्चा ट्रांसर्पोटेशन और मजदूरी का आ जाता था। कुल मिलाकर 42 हजार रुपये के ही टमाटर बिके।
- शमशेर लोहान, नारनौंद, हिसार
50 रुपये में बिक रहा 25 किलो टमाटर
टमाटर की 25 किलोग्राम की क्रेट महज 50 रुपये में बिक रही थी। तुड़ाई, किराया का खर्च ही 45 से 50 रुपये ही खर्च आ रहा था। दो एकड़ में टमाटर लगाए थे। करीब 12 हजार के टमाटर ही सीजन में बेच सके। करीब एक लाख रुपये खर्च आया था। मंडी में नहीं बिके तो हमने टमाटर गोशाला भेजे। पिछले साल भी नुकसान हुआ था।
जय सिंह, किसान, रायपुर
आवक अधिक होने से रेट कम
रायपुर, शिकारपुर, बहबलपुर से सब्जी अधिक आती है। इन गांवों में टमाटर की आवक होती है। पूरे जिले का 90 प्रतिशत टमाटर रायपुर-शिकारपुर से आता है। मंडी में रोजाना 500 क्विंटल लोकल टमाटर आता है। इस समय आवक अधिक होने के कारण रेट कम हैं।
-मुकेश थोक विक्रेता, सब्जी मंडी, हिसार
भावांतर भरपाई योजना के लिए पंजीकरण अनिवार्य
भावांतर भरपाई योजना के लिए फसल की बिजाई के समय ही पंजीकरण कराना अनिवार्य है। पंजीकरण कराने वाले किसानों को फसल की ब्रिकी का जे फार्म लेना होगा। जिसकी एक प्रति मंडी मार्केट कमेटी कार्यालय में जमा करानी होती है। भाव के अंतर की भरपाई सरकार की ओर से की जाती है।
-सुरेंद्र सिहाग, जिला उद्यान अधिकारी, हिसार।