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शिक्षा, रोजगार और ठोस राष्ट्रीय नीति से रुकेगी जनसंख्या वृद्धि

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 20 Jul 2022 12:27 AM IST
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Education, employment and a concrete national policy will stop population growth
हिसार-अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेते प्रबुद्धजन। - फोटो : Hisar
हिसार। जनसंख्या मुसीबत नहीं एक मजबूत संसाधन है। इसका सदुपयोग कर हम विश्व की महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हो सकते हैं। विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति भारत के पास है। शिक्षा के अनुसार हमारी जनसंख्या में बदलाव आया है। अब हमारी जनसंख्या उस रफ्तार से नहीं बढ़ रही जितनी रफ्तार से आजादी के बाद छह दशकों तक बढ़ रही थी। वर्ष 2023-24 में भारत चीन की आबादी से आगे निकल जाएगा। अगले पांच से सात साल बाद भारत की आबादी स्थिर हो जाएगी। आबादी को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। जिसे सख्ती से साथ लागू करने का प्रयास हो। यह कानून तभी सफल हो सकेगा जब हम उसके लिए मानसिक तौर पर परिपक्व होंगे। यह बात शहर के प्रबुद्धजनों ने अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही।
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जनगणना के आंकड़ों के बिना विकास की योजना तैयार नहीं हो सकती। विश्व की बात करें तो वर्ष 1922 में कुल 100 करोड़ आबादी थी। जो अब वर्ष 2022 में 800 करोड़ हो चुकी है। वर्ष 2050 में यह 1000 करोड़ तक पहुंच जाएगी। भारत में 1951 से 1961 के बीच 7.8 करोड़ आबादी बढ़ी। वर्ष 2011 से 2021 के बीच 18 करोड़ जनसंख्या बढ़ी। वर्ष 2023 में हम चीन को जनसंख्या में पीछे छोड़ देंगे। 1976 में चीन ने सिंगल चाइल्ड पॉलिसी लागू की। चार दशक में उन्होंने करीब 40 करोड़ बच्चों को पैदा होने से रोका। उनकी रोक की नीति के कारण चीन की आबादी पर नियंत्रण हुआ। - देवेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त जिला शिक्षा अधिकारी
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भारत के पास सबसे अधिक युवा शक्ति है। जिसे हमें संसाधन के तौर पर उपयोग करना चाहिए। अगर हमने आबादी की रफ्तार को प्रभावित किया तो हम बुजुर्ग देश बन जाएंगे। फील्ड में काम करने वाले युवाओं की जरूरत है। जनसंख्या को लेकर एक कानून बनाया जाना चाहिए। - प्रो. विनोद कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, आदमपुर
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देश में हर वर्ग की अपनी भूमिका है। 15 से कम आयु वर्ग के बच्चे हमारा भविष्य हैं। 65 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग हमारी धरोहर हैं। राष्ट्र निर्माण में हर वर्ग की अपनी भूमिका है। जनसंख्या को हमें बोझ नहीं मानना चाहिए। महाभारत काल में देखें तो हमारे यहां 100 पुत्र की कामना की जाती थी। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून पूरे देश के लिए लागू होना चाहिए। किसी वर्ग विशेष को आबादी बढ़ाकर संसाधन का दुरुपयोग करने की अनुमति न हो। - एडवोकेट मनोज चंद्रवंशी, सदस्य बाल कल्याण समिति
हमने जनसंख्या को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। अब एक या दो बच्चों तक हम सीमित हो चुके हैं। हम दोनों एक हमारा भी एक नारे पर आगे बढ़ रहे हैं। हमें शिक्षा व रोजगार के क्षेत्र में अधिक काम करने की जरूरत है। युवाओं को तकनीकी शिक्षा से दक्ष करना होगा। स्किल्ड यूथ को रोजगार प्रदान करने के लिए योजना तैयार करनी होंगी। अगर युवाओं को रोजगार मिले तो हम विश्व गुरु बन सकते हैं। - राजेंद्र सैनी, प्रधान, सेक्टर-3 आरडब्ल्यू
हमें हेल्थ और एजुकेशन सेक्टर में काम करने की जरूरत है। इसी के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होना चाहिए। अगर हमारी जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए एक कानून की जरूरत है। इसका कठोरता से पालन कराया जाए। अगर जनसंख्या पर नियंत्रण होगा तो हम बेहतर तरीके से योजनाएं काम कर सकेंगे। - कैप्टन नरेंद्र शर्मा, मनोनीत पार्षद
जनसंख्या को लेकर एक नीति लंबे समय पहले आनी चाहिए थी। जिसे पूरी सख्ती के साथ लागू किया जाता तो आज परिणाम बेहतर होते। केंद्र सरकार अब इस बात पर गंभीरता से काम कर रही है। हमें जल्द ही एक कानून मिल सकता है। - सतीश सुरलिया, मनोनीत पार्षद
हमारी जनसंख्या 2.1 के अनुपात से बढ़ रही है, जिसमें युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। यह अच्छा संकेत है। अगर शिक्षा का स्तर बढ़ाया जाए और गरीबी को हटाया जाए तो जनसंख्या नियंत्रण खुद ही हो जाएगा। महिला शिक्षा सबसे अधिक जरूरी है। हमें जनसंख्या नियंत्रण के लिए किसी तरह की सख्ती के बजाय लोगों की सोच में बदलाव करना होगा। अपनी जनसंख्या को सदुपयोग कर चीन ने विश्व को अपनी मुठ्ठी में कर लिया। हमें संसाधनों का सदुपयोग करना होगा। देश में कुछ लोगों का प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा है, उसे खत्म करना होगा। कृषि को लाभकारी बनाएंगे तो 60 प्रतिशत आबादी की बेरोजगारी खत्म हो जाएगी। - बलजीत भ्याण, रिटायर्ड डीएचओ
हमारा टीएफआर 1.98 है। जिसका मतलब हमारी आबादी बढ़ नहीं रही। हमारी आबादी बढ़ने का कारण जन्म दर और मृत्यु दर में अंतर है। एक घंटे में 51 नए लोग पैदा हो रहे हैं। इसमें हर घंटे 19 लोगों की मौत होती है। यह अंतर जनसंख्या की बढ़ोतरी है। आजादी के समय औसत आयु 39 से 40 साल थी, जो अब 69 साल है। दो साल बाद चीन से अधिक आबादी वाले देश बन जाएंगे। लगभग 4 से 5 साल के बाद आबादी स्थिर हो जाएगी। जरूरतों के अनुसार स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार नहीं हो रहा। हमें जनसंख्या के अनुसार कम से कम 500 बेड का अस्पताल चाहिए। जमीनी स्तर पर जाकर फीडबैक लेकर नीतियां तैयार करनी होंगी। - डॉ. एपी सेतिया, पूर्व प्रधान, आईएमए हरियाणा
संसाधनों का सदुपयोग होना चाहिए। जनसंख्या नियंत्रण के लिए एक नीति की जरूरत है। जिस पर केंद्र सरकार काम कर रही है। नई शिक्षा नीति से देश में काफी बदलाव आएगा। युवाओं को रोजगार के प्रति प्रशिक्षण मिलेगा। कौशल पर फोकस किए जाने से सोच में भी बदलाव आएगा। - प्रो. मनोज दयाल, डीन, जीजेयू
गरीबी व शिक्षा की कमी के कारण जनसंख्या में बढ़ोतरी रही। वर्किंग केपेसिटी को बढ़ाना होगा। अगर विश्व की तुलना देखी जाए तो हमारा घनत्व काफी कम है। हमारा घनत्व 470 व्यक्ति प्रति किलोमीटर है। सिंगापुर में यह 7000 से अधिक है। आज के समय में युवाओं के रोजगार के लिए काम करने की जरूरत है। हमें संपति के वितरण में सामनता लानी होगी। जनसंख्या को बोझ मानने के बजाय उसे संसाधन के तौर पर उपयोग कर सफलता हासिल करनी होगी। - डीपी ढुल, रिटायर्ड चीफ कम्युनिकेशन ऑफिसर, डीएचबीवीएनएल
हमें स्वास्थ्य, शिक्षा पर फोकस करना होगा। वर्तमान में युवाओं के लिए रोजगार सबसे अधिक जरूरत है। इसके लिए काम करना होगा। अगर हमने जनसंख्या बढ़ोतरी पर रोक नहीं लगाई तो त्रासदी को कोई रोक नहीं सकता। धीरे-धीरे जंगल, खेत खत्म हो रहे हैं। मजबूत इच्छा शक्ति के साथ कानून लाना होगा। जिसे लागू कर जनसंख्या पर रोक लगानी होगी। - सतपाल ठाकुर, प्रधान, आरडब्ल्यूए ,पीएलए
जनसंख्या नियंत्रण जरूरी है, इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति होनी चाहिए। शिक्षा नीति में बदलाव लाना होगा। पहले की तरह से बुनियादी शिक्षा को लागू करना होगा। राधाकृष्ण आयोग, कोठारी आयोग को लागू करते तो नई शिक्षा नीति की जरूरत ही नहीं थी। देश में 60 प्रतिशत आबादी ग्रामीण हैं। वह पूरी तरह से स्किल्ड हैं। आधारभूत सरंचना को मजबूत करना होगा। सभी को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। - प्रो. नेपाल सिंह वर्मा, पूर्व एचओडी ,एचएयू
हमें कुशल मैनपावर की जरूरत है। छठी कक्षा से ही हमें हुनर पर फोकस करना होगा। हम हुनरमंद युवा तैयार करने की बजाए डिग्री धारकों की फौज तैयार कर रहे हैं। 8वीं पास चपरासी की जरूरत तो हमें हजारों बीए, एम, पीएचडी डिग्री वाले मिल जाएंगे। - प्रो. रमेश आर्य, राजकीय महाविद्यालय

प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं। जिन्हें तैयार करना हमारे हाथ में नहीं है। ऐसे में हर व्यक्ति को इसका सदुपयोग करना चाहिए। अगर हमें हर व्यक्ति तक खाना पहुंचाना है तो हमें भोजन का एक दाना भी बर्बाद न करने का संकल्प लेना चाहिए। - नरेंद्र सोनी, असिस्टेंट प्रोफेसर, डीएन कॉलेज
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