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Hisar News: फसल अवशेष जलाएं नहीं, वैज्ञानिक तरीके से करें प्रबंधन
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ह
हांसी। गांव जमावड़ी में सोमवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से सोमवार को जागरूक शिविर आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि एसडीएम राजेश खोथ ने किसानों से पराली न जलाने और वैज्ञानिक तकनीकों से फसल अवशेषों का प्रबंधन करने का आह्वान किया।
उन्होंने इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी भी दी। एसडीएम ने कहा कि पराली जलाने से धुआं और हानिकारक गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है। खेत में अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं।
कृषि विशेषज्ञों ने इन-सीटू प्रबंधन के तहत फसल अवशेषों को खेत में ही काटकर, बारीक कर मिट्टी में मिलाने की तकनीक समझाई। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने के साथ उसकी उर्वरता और संरचना बेहतर होती है। किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर और रोटावेटर सहित अन्य कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई।
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एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत फसल अवशेषों को खेत से बाहर निकालकर उचित तरीके से संग्रहित करने और उपयोगी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इससे पराली को जलाने की जरूरत नहीं रहती और यह उपयोगी संसाधन बन सकती है।
कैंप में डॉ. वाईके सक्सेना, एसडीएओ डॉ. रविंद्र, विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रीति वर्मा, एएई गोपी राम, विषय विशेषज्ञ डॉ. रॉबिन और बीएओ डॉ. रूपेश ने भी किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक प्रबंधन से वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के साथ मिट्टी की उर्वरता, जैविक गुणवत्ता और जल धारण क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।
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उन्होंने इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी भी दी। एसडीएम ने कहा कि पराली जलाने से धुआं और हानिकारक गैसें फैलती हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मानव स्वास्थ्य प्रभावित होता है। खेत में अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व भी प्रभावित होते हैं।
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कृषि विशेषज्ञों ने इन-सीटू प्रबंधन के तहत फसल अवशेषों को खेत में ही काटकर, बारीक कर मिट्टी में मिलाने की तकनीक समझाई। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ने के साथ उसकी उर्वरता और संरचना बेहतर होती है। किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर और रोटावेटर सहित अन्य कृषि यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई।
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एक्स-सीटू प्रबंधन के तहत फसल अवशेषों को खेत से बाहर निकालकर उचित तरीके से संग्रहित करने और उपयोगी गतिविधियों में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि इससे पराली को जलाने की जरूरत नहीं रहती और यह उपयोगी संसाधन बन सकती है।
कैंप में डॉ. वाईके सक्सेना, एसडीएओ डॉ. रविंद्र, विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रीति वर्मा, एएई गोपी राम, विषय विशेषज्ञ डॉ. रॉबिन और बीएओ डॉ. रूपेश ने भी किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक प्रबंधन से वायु प्रदूषण नियंत्रित करने के साथ मिट्टी की उर्वरता, जैविक गुणवत्ता और जल धारण क्षमता बनाए रखने में मदद मिलती है।