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Hisar News: विद्यालयों-आंगनबाड़ी केंद्रों पर 1 से 19 साल तक के बच्चों को खिलाई जाएंगी पेट के कीड़े मारने की दवा

Mon, 10 Feb 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Mon, 10 Feb 2025 01:06 AM IST
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Deworming medicine will be given to children aged 1 to 19 years at schools and Anganwadi centers.
हिसार। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले के राजकीय विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई जाएगी। एक से लेकर 19 साल तक के बच्चों को कृमि नाशक गोलियां दी जाएंगी। सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा।
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जिले में 6,28,324 बच्चों को कृमि नाशक गोलियां खिलाई जाएंगी। जिसमें पांच साल तक के 5,80,171 और 5 से अधिक आयु के 48,153 बच्चों को गोलियां खिलाई जाएंगी। स्कूल हेल्थ की तरफ से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर कृमि नाशक गोलियां भिजवा दी हैं।
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राउंडवॉर्म, हुकवर्म, पिनवर्म आदि प्रकार की होती है कृमि बीमारियां : नागरिक अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजू हुड्डा ने बताया कि मिट्टी से फैलने वाले कृमि संक्रमित लोगों के मल में मौजूद अंडों से फैलते हैं। वयस्क कृमि संक्रमित व्यक्ति की आंत में रहते हैं, जहां वे हर दिन हजारों अंडे देते हैं। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त स्वच्छता का अभाव है, वहां ये अंडे मिट्टी को दूषित करते हैं। कृमि संक्रमण से खून की कमी, कुपोषण, मानसिक और शारीरिक विकास में कमी आ जाती है।
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उन्होंने बताया कि कृमि बीमारियां राउंडवॉर्म, हुकवर्म, पिनवर्म आदि प्रकार की होती है। हुकवर्म के अंडे मिट्टी में फूटते हैं, जिससे लार्वा निकलते हैं जो एक ऐसे रूप में परिपक्व हो जाते हैं जो सक्रिय रूप से त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं। लोग मुख्य रूप से दूषित मिट्टी पर नंगे पैर चलने से हुकवर्म से संक्रमित हो जाते हैं। छोटे बच्चे मिट्टी को खाते हैं तो वे इसका शिकार हो जाते हैं। पेट के अंदर कीड़े बनने लगते हैं जिस कारण बच्चों का शारीरिक विकास भी रुक जाता है और पेट में दर्द होता है। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा राउंडवॉर्म का अंडा निगलता है, तो वह आंत में चला जाता है और एक शिशु कृमि में बदल जाता है।

लारवा आंत की दीवार से होकर रक्त प्रवाह में जा सकता है, फिर वे फेफड़ों से होते हुए गले तक पहुंचते हैं। उन्हें फिर से निगल लिया जाता है और छोटी आंत में वापस आ जाते हैं। वहां वे वयस्क कृमियों में विकसित होते हैं। इसके अलावा अन्य प्रकार से भी पेट में कीड़े बन जाते है।
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