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मंत्रिमंडल की बैठक से थी डेयरी शिफ्टिंग की उम्मीद, शाम को मिली मायूसी

Wed, 15 Feb 2017 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार Updated Wed, 15 Feb 2017 12:33 AM IST
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डेयरी शिफ्टिंग को लेकर मंत्रिमंडल की बैठक से लगी उम्मीदों पर पानी फिर गया। कई महीनों से मंत्रिमंडल की बैठक में पशुधन फार्म की 50 एकड़ जमीन निगम को देने के लिए इंतजार कर रही फाइल पर फिर मुहर नहीं लग पाई। जमीन फाइनल होने की बजाए बैठक में देरी पर जरूर मुहर लग गई। 10 सालों से डेयरी शिफ्टिंग को लेकर चल रही जिला प्रशासन की कार्रवाई में हर बार की तरह इस बार भी एक तरह से अड़ंगा लगा गया। अब सरकार ने डेयरी के साथ दूसरे विकल्प के लिए भी जगह तलाशने के निर्देश दे दिए।

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डेयरी शिफ्टिंग की जगह के साथ अब नगर निगम को चारामंडी व सब्जीमंडी के लिए भी देखनी होगी। यानी यह तय है कि डेयरियां शहर से बाहर शिफ्ट करने में और अधिक देरी हो सकती है। बार बार डेयरी शिफ्टिंग को लेकर टाइम बढ़ता जा रहा है। सीएम एनाउंसमेंट में शहर के चार जोन में डेयरियों के लिए जगह देखनी थी। नगर निगम आखिर में पहले वाली बगला रोड स्थित जगह को ही फाइनल कर पाया। तीन अन्य जगह जो जगह देखी गई थी वो रिजेक्ट हो गई। पंचायतों ने जमीन देने से इनकार कर दिया।
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यह हुआ फैसला
फरीदाबाद के सूरजकुंड में सीएम मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के सभी शहरों में समेकित डेयरी परिसरों का एक खाका तैयार किया जाएगा। इसको लेकर मंत्रिपरिषद की एक उप समिति गठित की गई। उप समिति में कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन और सहकारिता राज्यमंत्री मनीष ग्रोवर शामिल होंगे। यह कमेटी एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग को ये भी निर्देश दिए गए कि हर शहर की विकास योजना में चारों ओर कुछ ऐसे क्षेत्र निर्धारित किए जाएं जहां डेरियों, चारा मंडी और सब्जी मंडी की स्थापना की जा सके। इन इकाइयों को समेकित डेरी परिसर कहा जाएगा।
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ये है हमारी डेयरी के लिए चिन्हित जगह को लेकर स्टेटस
सीएम घोषणा के तहत प्रशासन को शहर के चारों तरफ चार जोन में डेयरियां बनाने के निर्देश हुए थे। निगम ने इसके लिए धांसू रोड, बालसमंद रोड, देव मुकलान रोड व भगाणा के आसपास जमीन भी देखी थी। मगर ये साइट फाइनल नहीं हो पाई। कई सालों से बगला रोड पर निगम द्वारा पहले ही देखी गई जमीन ही आखिर में अधिकारियों को स्थानीय अधिकारियों की अनुमति पर सरकार के पास अप्रूवल के लिए भेजनी पड़ी। यह जमीन राजकीय पशुधन फार्म की है। इस जमीन को कलेक्टर रेट पर निगम को दिए जाने का पत्र व्यवहार चल रहा है। फिलहाल गेंद सरकार के पाले में थी। सरकार ने इस मामले में मंगलवार को कोई फैसला नहीं किया बल्कि समेकित डेयरियों के लिए उप समिति गठित कर दी।

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