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रोहतक जा रही सेना की 11 गाड़ियों को रोका, 24 घंटे बाद रवाना
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
Updated Sun, 21 Feb 2016 12:30 AM IST
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जाट आंदोलन को लेकर नारनौंद क्षेत्र के गांव मदनहेड़ी में सैकड़ों आंदोलनकारियों ने सेना की 11 गाड़ियों को रोक लिया। जिनको 24 घंटे के बाद रवाना किया गया। मौके पर पुलिस और प्रशासन का कोई भी बड़ा अधिकारी नहीं पहुंच पाया।
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हिंसा कर रहे आंदोलनकारियों पर काबू पाने के लिए हिसार कैंट से सेना की 11 गाड़ियों को रोहतक की स्थिति संभालने के लिए रवाना किया गया।
सड़कों पर जाम होने से सेना की गाड़ियां लिंक रास्तों से गुजर रही थीं। गांव मदनहेड़ी के बस स्टैंड पर भी ग्रामीणों ने रास्ते को जाम किया हुआ था। जैसे ही रात को सेना की गाड़ियां मदनहेड़ी गांव में पहुंची तो सैकड़ों युवा आंदोलनकारी सड़क के बीचों-बीच बैठ गए और गाड़ियों को आगे नहीं जाने दिया। सेना के जवानों ने गुहार लगाई कि उनको रोहतक पहुंचना है, लेकिन आंदोलनकारियों ने एक न सुनी।
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आखिरकार गांव के बुजुर्गों ने मोर्चा संभाला और सेना के जवानों को खाना खिलाकर कुछ देर आराम करने की सलाह दी। बाद में युवा आंदोलनकारियों को समझा-बुझाकर सेना की गाड़ियों को वहां से निकालने के लिए राजी किया। करीब 24 घंटे बाद शनिवार दोपहर को सेना की गाड़ियों को वहां से रवाना किया गया।
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सेना की सभी गाड़ियां रोहतक की तरफ कूच कर गई। सेना के जवानों ने इसकी सूचना अपने उच्च अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन की तरफ से उनके सहयोग के लिए कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
इस संबंध में गांव मदनहेड़ी के सरपंच नरेंद्र ने बताया कि रात को सेना के जवान गांव में पहुंचे थे, लेकिन आगे रास्ता बंद होने के कारण वे गांव के बस स्टैंड पर खड़े हुए थे, जिनको ग्रामीणों ने उनके रहने और खाने-पीने का प्रबंध कर उनको गांव के स्कूल में ठहराया और दिन में उनको चाय-पानी पिलाने के बाद खाना खिलाकर रवाना कर दिया गया था।
पुलिस का दावा, आंदोलनकारियों ने नहीं रोका
इस संबंध में थाना प्रभारी मंदीप सांगवान ने बताया कि सेना की गाड़ियों को किसी भी आंदोलनकारी ने नहीं रोका। बल्कि रास्ते पर जगह जगह पेड़ कटे पड़े होने के कारण सेना गांव मदनहेड़ी पहुंची तो ग्रामीणों ने उनका सहयोग करते हुए उनको गांव के स्कूल में ठहराया और उनको चाय व खाना खिलाकर ही रवाना किया।
ग्रामीणों ने सेना के जवानों का भरपूर सहयोग किया है। किसी शरारती तत्व ने इसकी झूठी अफवाह फैला दी है, लेकिन इसकी पूरी रिपोर्ट सेना के उच्च अधिकारियों के पास भेज दी गई है।