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भगाना प्रकरण में मुख्य सचिव, डीजीपी, हिसार डीसी तलब
Updated Fri, 09 Mar 2018 01:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
भगाणा कांड मामले में एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन प्रो. डॉ. राम शंकर कठेरिया ने सुनवाई के लिए 14 मार्च की तारीख तय की है। इसमें चीफ सेक्रेटरी हरियाणा सरकार, डीजीपी हरियाणा व डीसी हिसार को तलब किया गया है।
भगाना कांड संघर्ष समिति के सदस्य सतीश काजला ने बताया कि पहले भी सदस्य ईश्वर सिंह ने 2015 में गांव का दौरा करके मामले में पीड़ितों की कुछ उम्मीद जगाई थी। ईश्वर सिंह ने पीड़ितों को निराश ही किया। कार्रवाई न कर सिर्फ समझौता यात्रा कर अपना पल्ला झाड़ गए। पीड़ितों की न्याय की नई किरण प्रो. डॉ. रामशंकर कठेरिया के रूप में दिखाई दी है।
काजला ने बताया कि 18 महीने के लंबे समय के बाद ही सही अब 14 मार्च 2018 को उनकी सुनवाई की तारीख निर्धारित हई है। इस दिन पीड़ित फिर चेयरमैन के सामने अपने हालात, दुख व पीड़ा बयां कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही (एससी, एसटी एक्ट के तहत) करने की मांग करेंगे। जो 2011-12 से एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।
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पीड़ितों के शहर में पुनर्वास की मांग करेंगे। पदाधिकारियों ने बताया कि छह साल से बंद पड़े मकानों में अब चोरी की वारदातें होने लगी हैं। 2011 से आज तक पुलिस प्रशासन ने केवल पीड़ितों को ही प्रताड़ित किया है। मांग की कि सामाजिक बहिष्कार कर गांव से निकालने वाले दबंग आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर जेल में डाला जाए और सभी सैकड़ों पीड़ित परिवारों को शिक्षा, सुरक्षा व रोजगार का प्रबंध कर हिसार शहर में पुनर्वास करवाया जाएगा।
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हिसार।
भगाणा कांड मामले में एससी/एसटी आयोग के चेयरमैन प्रो. डॉ. राम शंकर कठेरिया ने सुनवाई के लिए 14 मार्च की तारीख तय की है। इसमें चीफ सेक्रेटरी हरियाणा सरकार, डीजीपी हरियाणा व डीसी हिसार को तलब किया गया है।
भगाना कांड संघर्ष समिति के सदस्य सतीश काजला ने बताया कि पहले भी सदस्य ईश्वर सिंह ने 2015 में गांव का दौरा करके मामले में पीड़ितों की कुछ उम्मीद जगाई थी। ईश्वर सिंह ने पीड़ितों को निराश ही किया। कार्रवाई न कर सिर्फ समझौता यात्रा कर अपना पल्ला झाड़ गए। पीड़ितों की न्याय की नई किरण प्रो. डॉ. रामशंकर कठेरिया के रूप में दिखाई दी है।
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काजला ने बताया कि 18 महीने के लंबे समय के बाद ही सही अब 14 मार्च 2018 को उनकी सुनवाई की तारीख निर्धारित हई है। इस दिन पीड़ित फिर चेयरमैन के सामने अपने हालात, दुख व पीड़ा बयां कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही (एससी, एसटी एक्ट के तहत) करने की मांग करेंगे। जो 2011-12 से एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई।
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पीड़ितों के शहर में पुनर्वास की मांग करेंगे। पदाधिकारियों ने बताया कि छह साल से बंद पड़े मकानों में अब चोरी की वारदातें होने लगी हैं। 2011 से आज तक पुलिस प्रशासन ने केवल पीड़ितों को ही प्रताड़ित किया है। मांग की कि सामाजिक बहिष्कार कर गांव से निकालने वाले दबंग आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई कर जेल में डाला जाए और सभी सैकड़ों पीड़ित परिवारों को शिक्षा, सुरक्षा व रोजगार का प्रबंध कर हिसार शहर में पुनर्वास करवाया जाएगा।