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Mohali News: कार्बाइन गिरने से चलीं पांच गोलियां<bha>;</bha> एएसआई की मौत
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कार्बाइन गिरने से चलीं पांच गोलियां; एएसआई की मौत
रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला के घर सुरक्षा ड्यूटी पर थे ओंकार सिंह, पांच साल से थे तैनात; सुबह छह बजे मोहाली के सेक्टर-85 स्थित वेव एस्टेट में हादसा
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। रिटायर्ड विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अर्पित शुक्ला के मोहाली स्थित आवास पर सुरक्षा ड्यूटी दे रहे एएसआई ओंकार सिंह (52) की गोली लगने से मौत हो गई। हादसा वीरवार सुबह करीब छह बजे सेक्टर-85 स्थित वेव एस्टेट में हुआ। प्रारंभिक जांच के मुताबिक ओंकार सिंह की ऑटोमैटिक कार्बाइन अचानक गिर गई। कार्बाइन गिरते ही उससे पांच गोलियां चल गईं और सभी गोलियां ओंकार सिंह को लगीं। गंभीर रूप से घायल ओंकार सिंह को तुरंत फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
ओंकार सिंह नवांशहर के रहने वाले थे। वह करीब पांच साल से रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला की सुरक्षा में तैनात थे। हादसे के समय भी वह सुरक्षा ड्यूटी पर थे। घटना के बाद मोहाली पुलिस की टीमें और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर साक्ष्य जुटाए। मौके पर मौजूद लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली गई।
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पुलिस बोली- शुरुआती जांच में फाउल प्ले नहीं
डीएसपी सिटी-1 हरसिमरन सिंह बल ने बताया कि शुरुआती जांच में किसी तरह का फाउल प्ले सामने नहीं आया है। पुलिस इसे हादसा मानकर जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कार्बाइन किस तरह गिरी और उसके गिरने के बाद एक साथ पांच गोलियां चलने की परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल फेज-6 की मोर्चरी में रखवाया। दोपहर बाद पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई है।
अर्पित शुक्ला ने बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सुबह करीब छह बजे ओंकार सिंह की कार्बाइन गिर गई। ऑटोमैटिक होने के कारण उससे पांच गोलियां चलीं, जो ओंकार सिंह को लग गईं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस विभाग इस दुख की घड़ी में ओंकार सिंह के परिवार के साथ खड़ा है।
कार्बाइन और घटना की परिस्थितियों की जांच
पुलिस घटना के हर पहलू की जांच कर रही है। कार्बाइन गिरने की वजह, उससे पांच गोलियां चलने की परिस्थितियां और उस समय मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की अब तक की जांच में किसी आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं।
साइड स्टोरी...
एक गोली चलती तो समझ आता, पांच कैसे लगीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। एएसआई ओंकार सिंह की मौत के बाद परिवार ने घटना की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पोस्टमार्टम के दौरान परिजन भावुक थे। परिवार के मुताबिक, सुबह उन्हें फोन कर बताया गया कि ओंकार सिंह खड़े-खड़े गिर गए और कंधे पर डाली कार्बाइन से चली गोलियां लगने से उनकी मौत हो गई। परिजनों का सवाल है कि अगर कार्बाइन गिरने से गोली चली थी तो एक गोली लगनी चाहिए थी लेकिन ओंकार सिंह को पांच गोलियां कैसे लगीं। परिवार ने इसे जांच का विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि ओंकार सिंह को करीब एक महीने से छुट्टी नहीं मिली थी। वह काफी परेशान चल रहे थे। परिवार के मुताबिक, बुधवार को उनकी छुट्टी थी और वह घर पर ही थे। इसी दौरान किसी का फोन आया। इसके बाद वह किट लेकर दोबारा ड्यूटी पर चले गए। परिजनों का कहना है कि ओंकार सिंह इस जगह ड्यूटी नहीं करना चाहते थे और नवांशहर में तबादला करवाने का प्रयास कर रहे थे।
शव देखने तक नहीं दिया
परिवार ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें ओंकार सिंह का शव देखने तक नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि घटना की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने खास तौर पर पांच गोलियां लगने की बात पर सवाल उठाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
तीन बच्चों को छोड़ गए ओंकार
ओंकार सिंह अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। सबसे छोटा बेटा यादविंदर सिंह 12वीं कक्षा में पढ़ता है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी विदेश में पढ़ाई कर रही है जबकि दूसरी बेटी भी पढ़ाई कर रही है। ओंकार सिंह के पिता पंजाब पुलिस में एएसआई पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्नी गृहणी हैं।
रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला के घर सुरक्षा ड्यूटी पर थे ओंकार सिंह, पांच साल से थे तैनात
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। रिटायर्ड विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) अर्पित शुक्ला के मोहाली स्थित आवास पर सुरक्षा ड्यूटी दे रहे एएसआई ओंकार सिंह (52) की गोली लगने से मौत हो गई। हादसा वीरवार सुबह करीब छह बजे सेक्टर-85 स्थित वेव एस्टेट में हुआ। प्रारंभिक जांच के मुताबिक ओंकार सिंह की ऑटोमैटिक कार्बाइन अचानक गिर गई। कार्बाइन गिरते ही उससे पांच गोलियां चल गईं और सभी गोलियां ओंकार सिंह को लगीं। गंभीर रूप से घायल ओंकार सिंह को तुरंत फेज-6 स्थित सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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ओंकार सिंह नवांशहर के रहने वाले थे। वह करीब पांच साल से रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला की सुरक्षा में तैनात थे। हादसे के समय भी वह सुरक्षा ड्यूटी पर थे। घटना के बाद मोहाली पुलिस की टीमें और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल की जांच कर साक्ष्य जुटाए। मौके पर मौजूद लोगों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली गई।
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पुलिस बोली- शुरुआती जांच में फाउल प्ले नहीं
डीएसपी सिटी-1 हरसिमरन सिंह बल ने बताया कि शुरुआती जांच में किसी तरह का फाउल प्ले सामने नहीं आया है। पुलिस इसे हादसा मानकर जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कार्बाइन किस तरह गिरी और उसके गिरने के बाद एक साथ पांच गोलियां चलने की परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस ने शव को सिविल अस्पताल फेज-6 की मोर्चरी में रखवाया। दोपहर बाद पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मामले में धारा 174 के तहत कार्रवाई की गई है।
अर्पित शुक्ला ने बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
रिटायर्ड डीजीपी अर्पित शुक्ला ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सुबह करीब छह बजे ओंकार सिंह की कार्बाइन गिर गई। ऑटोमैटिक होने के कारण उससे पांच गोलियां चलीं, जो ओंकार सिंह को लग गईं। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस विभाग इस दुख की घड़ी में ओंकार सिंह के परिवार के साथ खड़ा है।
कार्बाइन और घटना की परिस्थितियों की जांच
पुलिस घटना के हर पहलू की जांच कर रही है। कार्बाइन गिरने की वजह, उससे पांच गोलियां चलने की परिस्थितियां और उस समय मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की अब तक की जांच में किसी आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं।
साइड स्टोरी...
एक गोली चलती तो समझ आता, पांच कैसे लगीं
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। एएसआई ओंकार सिंह की मौत के बाद परिवार ने घटना की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पोस्टमार्टम के दौरान परिजन भावुक थे। परिवार के मुताबिक, सुबह उन्हें फोन कर बताया गया कि ओंकार सिंह खड़े-खड़े गिर गए और कंधे पर डाली कार्बाइन से चली गोलियां लगने से उनकी मौत हो गई। परिजनों का सवाल है कि अगर कार्बाइन गिरने से गोली चली थी तो एक गोली लगनी चाहिए थी लेकिन ओंकार सिंह को पांच गोलियां कैसे लगीं। परिवार ने इसे जांच का विषय बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि ओंकार सिंह को करीब एक महीने से छुट्टी नहीं मिली थी। वह काफी परेशान चल रहे थे। परिवार के मुताबिक, बुधवार को उनकी छुट्टी थी और वह घर पर ही थे। इसी दौरान किसी का फोन आया। इसके बाद वह किट लेकर दोबारा ड्यूटी पर चले गए। परिजनों का कहना है कि ओंकार सिंह इस जगह ड्यूटी नहीं करना चाहते थे और नवांशहर में तबादला करवाने का प्रयास कर रहे थे।
शव देखने तक नहीं दिया
परिवार ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें ओंकार सिंह का शव देखने तक नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि घटना की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। उन्होंने खास तौर पर पांच गोलियां लगने की बात पर सवाल उठाया और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
तीन बच्चों को छोड़ गए ओंकार
ओंकार सिंह अपने पीछे पत्नी और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। सबसे छोटा बेटा यादविंदर सिंह 12वीं कक्षा में पढ़ता है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी विदेश में पढ़ाई कर रही है जबकि दूसरी बेटी भी पढ़ाई कर रही है। ओंकार सिंह के पिता पंजाब पुलिस में एएसआई पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्नी गृहणी हैं।