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सूचना आयुक्त ने लगाया एक्सईएन लांबा को पांच हजार का जुर्माना
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:45 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
आरटीआई कार्यकर्ता को ट्रांसफार्मर की शिफ्टिंग संबंधी जानकारी समय पर नहीं देने के आरोप में सूचना आयोग की ओर से बिजली निगम के एक्सईएन विजेंद्र लांबा पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एक्सईएन को 15 जुलाई तक जुर्माना अदा करना होगा।
दरअसल, नवदीप कॉलोनी निवासी मनोज कड़वासरा की ओर से 8 सितंबर 2017 को आरटीआई के माध्यम से सेक्टर-15ए में ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करने से संबंधित जानकारी मांगी थी। नियमों के अनुसार यह जानकारी 30 दिन में देनी थी, लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता को यह जानकारी देने में तीन महीने की देरी की गई। उस समय डिविजन नंबर एक के एक्सईएन विजेंद्र लांबा जनसूचना अधिकारी थे। आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा 30 दिन बीतने के बाद पहली अपील दायर की गई। उसका कोई निर्णय नहीं निकला। फिर सूचना के लिए दूसरी अपील की गई। उसके बाद 8 सितंबर को मांगी गई सूचना उसे चार महीने बाद 25 जनवरी को दी गई। इसमें एक महीने का निर्धारित समय निकालने के बाद आयोग ने तीन महीने की देरी मानते हुए शो-कॉज नोटिस जारी कर जन सूचना अधिकारी से जवाब मांगा। हालांकि इसी बीच एक्सईएन विजेंद्र लांबा का डिविजन नंबर दो में तबादला हो गया, जिसके बाद नए एक्सईएन सतीश कुमार ने जवाब दाखिल कर दिया। इस पूरे प्रकरण में राज्य सूचना आयुक्त समीर माथुर ने जानकारी देने में देरी के लिए तत्कालीन एक्सईएन व जन सूचना अधिकारी विजेंद्र लांबा को दोषी मानते हुए उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना राशि प्रदेश के राजस्व विभाग में जमा होगी। अगर एक्सईएन ने जुर्माना राशि जमा नहीं करवाई तो उनसे रिकवरी की जाएगी।
वर्जन
मेरे पास सूचना आयोग द्वारा जुर्माना लगाने से संबंधित कोई लेटर नहीं आया है। इस संबंध में जवाब डिविजन नंबर एक की ओर से दाखिल कर दिया गया होगा।
विजेंद्र लांबा, एक्सईएन, डिविजन नंबर एक
हिसार।
आरटीआई कार्यकर्ता को ट्रांसफार्मर की शिफ्टिंग संबंधी जानकारी समय पर नहीं देने के आरोप में सूचना आयोग की ओर से बिजली निगम के एक्सईएन विजेंद्र लांबा पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एक्सईएन को 15 जुलाई तक जुर्माना अदा करना होगा।
दरअसल, नवदीप कॉलोनी निवासी मनोज कड़वासरा की ओर से 8 सितंबर 2017 को आरटीआई के माध्यम से सेक्टर-15ए में ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करने से संबंधित जानकारी मांगी थी। नियमों के अनुसार यह जानकारी 30 दिन में देनी थी, लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता को यह जानकारी देने में तीन महीने की देरी की गई। उस समय डिविजन नंबर एक के एक्सईएन विजेंद्र लांबा जनसूचना अधिकारी थे। आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा 30 दिन बीतने के बाद पहली अपील दायर की गई। उसका कोई निर्णय नहीं निकला। फिर सूचना के लिए दूसरी अपील की गई। उसके बाद 8 सितंबर को मांगी गई सूचना उसे चार महीने बाद 25 जनवरी को दी गई। इसमें एक महीने का निर्धारित समय निकालने के बाद आयोग ने तीन महीने की देरी मानते हुए शो-कॉज नोटिस जारी कर जन सूचना अधिकारी से जवाब मांगा। हालांकि इसी बीच एक्सईएन विजेंद्र लांबा का डिविजन नंबर दो में तबादला हो गया, जिसके बाद नए एक्सईएन सतीश कुमार ने जवाब दाखिल कर दिया। इस पूरे प्रकरण में राज्य सूचना आयुक्त समीर माथुर ने जानकारी देने में देरी के लिए तत्कालीन एक्सईएन व जन सूचना अधिकारी विजेंद्र लांबा को दोषी मानते हुए उन पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना राशि प्रदेश के राजस्व विभाग में जमा होगी। अगर एक्सईएन ने जुर्माना राशि जमा नहीं करवाई तो उनसे रिकवरी की जाएगी।
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वर्जन
मेरे पास सूचना आयोग द्वारा जुर्माना लगाने से संबंधित कोई लेटर नहीं आया है। इस संबंध में जवाब डिविजन नंबर एक की ओर से दाखिल कर दिया गया होगा।
विजेंद्र लांबा, एक्सईएन, डिविजन नंबर एक