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विधायक डॉ. कमल सहित 23 भाजपाईयों का केस वापस लेने की रिविजन खारिज
Updated Thu, 02 Aug 2018 01:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पाराशर की अदालत ने विधायक डॉ. कमल गुप्ता समेत भाजपा के 23 लोगों के खिलाफ चल रहे केस को वापस लेने की रिविजन को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि वीडियो में आरोपियों के चेहरे साफ दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर मौजूदा सरकार के नेता या वर्कर हैं। इस तथ्य को नजर अंदाज नही किया जा सकता कि केस को कैसे निपटान करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार अभियोजन पक्ष से केस वापस लेने के लिए पब्लिक प्रोसीक्यूटर पर दबाव बना रही है। पब्लिक प्रोसीक्यूटर सरकार के दबाव में केस वापस लेने की अपील कर रहे हैं। यह उनका वैचारिक फैसला नही है। यह कहते हुए कोर्ट ने तत्कालीन मंत्री सावित्री जिंदल की कोठी में घुसने का प्रयास करने और रोड़ जाम करने व सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के मुकदमा वापस लेने संबंधी सरकारी पक्ष कि याचिका खारिज कर दी है। अब भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता और अन्य पर ट्रायल फेस करना पड़ेगा। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान 12 जून 2013 को भाजपा और हजकां कार्यकर्ताओं ने दिल्ली रोड़ पर तात्कालिक मंत्री सावित्री जिंदल के आवास के सामने अपनी मांगो को लेकर रास्ता जाम किया था। कुछ लोगों ने पुलिसकर्मी पर काला तेल भी फेंका था। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के घर में घुसने का प्रयास कर रहे थे। डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा के नेतृत्व में वहां पर पुलिसबल तैनात था। पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज कर कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। सिविल लाईन थाना ने इस मामले में सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, रोड़ जाम करने, कोठी में घुसने का प्रयास करने, तोड़-फोड़ करने का केस दर्ज किया था।
सरकारी पक्ष ने कोर्ट में केस वापस लेने की याचिका लगाई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे पहले एसीजेएम सुरेंद्र कुमार की अदालत में केस वापस लेने के लिए याचिका दी थी। जिसे एसीजेएम की मांग को खारिज कर दिया था।
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इन लोगों पर दर्ज है केस
पुलिस ने इस मामले में डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. योगेश बिदानी, रवि सैनी, अरुण कुमार, प्रवीन जैन, मनदीप मलिक, प्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र सपड़ा, सुजीत कुमार, रणधीर पनिहार, रामफल बूरा, सूबे सिंह आर्य, सुभाष टाक, रामनिवास राड़ा, मुकेश गौड़, अजय सिंधू, कर्ण सिहं राणोलिया, जोगीराम सिहाग, पवन खारिया व नरेश नैन के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी मामले में डॉ. कमल गुप्ता ने भी डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा समेत चालीस पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ इस्तगासा के जरिये केस दर्ज करवाया था। जिसे बाद में डॉ. कमल गुप्ता ने करीब चार महीने पहले उसे वापस ले लिया।
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हिसार। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पाराशर की अदालत ने विधायक डॉ. कमल गुप्ता समेत भाजपा के 23 लोगों के खिलाफ चल रहे केस को वापस लेने की रिविजन को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बेहद निराशाजनक है कि वीडियो में आरोपियों के चेहरे साफ दिखाई दे रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर मौजूदा सरकार के नेता या वर्कर हैं। इस तथ्य को नजर अंदाज नही किया जा सकता कि केस को कैसे निपटान करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार अभियोजन पक्ष से केस वापस लेने के लिए पब्लिक प्रोसीक्यूटर पर दबाव बना रही है। पब्लिक प्रोसीक्यूटर सरकार के दबाव में केस वापस लेने की अपील कर रहे हैं। यह उनका वैचारिक फैसला नही है। यह कहते हुए कोर्ट ने तत्कालीन मंत्री सावित्री जिंदल की कोठी में घुसने का प्रयास करने और रोड़ जाम करने व सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के मुकदमा वापस लेने संबंधी सरकारी पक्ष कि याचिका खारिज कर दी है। अब भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता और अन्य पर ट्रायल फेस करना पड़ेगा। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान 12 जून 2013 को भाजपा और हजकां कार्यकर्ताओं ने दिल्ली रोड़ पर तात्कालिक मंत्री सावित्री जिंदल के आवास के सामने अपनी मांगो को लेकर रास्ता जाम किया था। कुछ लोगों ने पुलिसकर्मी पर काला तेल भी फेंका था। प्रदर्शनकारियों ने मंत्री के घर में घुसने का प्रयास कर रहे थे। डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा के नेतृत्व में वहां पर पुलिसबल तैनात था। पुलिसकर्मियों ने लाठीचार्ज कर कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। सिविल लाईन थाना ने इस मामले में सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने, रोड़ जाम करने, कोठी में घुसने का प्रयास करने, तोड़-फोड़ करने का केस दर्ज किया था।
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सरकारी पक्ष ने कोर्ट में केस वापस लेने की याचिका लगाई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे पहले एसीजेएम सुरेंद्र कुमार की अदालत में केस वापस लेने के लिए याचिका दी थी। जिसे एसीजेएम की मांग को खारिज कर दिया था।
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इन लोगों पर दर्ज है केस
पुलिस ने इस मामले में डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. योगेश बिदानी, रवि सैनी, अरुण कुमार, प्रवीन जैन, मनदीप मलिक, प्रकाश अग्रवाल, राजेंद्र सपड़ा, सुजीत कुमार, रणधीर पनिहार, रामफल बूरा, सूबे सिंह आर्य, सुभाष टाक, रामनिवास राड़ा, मुकेश गौड़, अजय सिंधू, कर्ण सिहं राणोलिया, जोगीराम सिहाग, पवन खारिया व नरेश नैन के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसी मामले में डॉ. कमल गुप्ता ने भी डीएसपी सिद्धार्थ ढांडा समेत चालीस पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ इस्तगासा के जरिये केस दर्ज करवाया था। जिसे बाद में डॉ. कमल गुप्ता ने करीब चार महीने पहले उसे वापस ले लिया।