{"_id":"5faaeb998ebc3eefbb076e8a","slug":"court-stay-against-nagr-nigam-action-hisar-news-rtk58220453","type":"story","status":"publish","title_hn":"निगम की जेसीबी गिरा चुकी थी 5 कब्जे, व्यापारी ले आए स्टे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निगम की जेसीबी गिरा चुकी थी 5 कब्जे, व्यापारी ले आए स्टे
विज्ञापन
काठमंडी में अवैध कब्जा ढहा रही निगम टीम के साथ बहस करता व्यापारी अनिल बिंदल।
- फोटो : Hisar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिसार। काठमंडी में अतिक्रमण मामले में मंगलवार को हाई वॉल्टेज ड्रामा चला। नगर निगम की टीम ने पांच दुकानों के कब्जे हटाए थे कि तभी एक व्यापारी भी यह कहते हुए अतिक्रमण हटा रही जेसीबी के सामने खड़ा हो गया कि कोर्ट ने कार्रवाई पर स्टे लगा दिया है।
निगम अधिकारियों ने स्टे के ऑर्डर की कॉपी दिखाने का तर्क देते हुए व्यापारी को आगे से हटवा दिया। बाद में व्यापारी के वकील ने निगम अधिकारियों को कोर्ट के आदेश से अवगत कराया तो निगम ने अतिक्रमण की कार्रवाई रोक दी। हालांकि बाद में सेशन कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 18 नवंबर तक यथास्थिति बरकरार रखने को कहा। अदालत के इस आदेश के बाद निगम का अमला काठमंडी से चला गया।
बता दें कि काठमंडी में अतिक्रमण मामले में 4 नवंबर को जेएमआईसी मनोज दहिया की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्टे हटा दिया था। अदालत के फैसले के बाद निगम प्रशासन फैसले के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहा था। कॉपी मिलने के बाद निगम की टीम मंगलवार को काठमंडी में अतिक्रमण हटाने पहुंची। उधर महावीर व अन्य पक्ष ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की है, जिसकी मंगलवार को ही सुनवाई थी।
विज्ञापन
पुलिस बल के साथ पहुंचा अमला
सुबह साढ़े नौ बजे निगम अधिकारी पुलिस बल के साथ काठमंडी में अतिक्रमण हटाने पहुंचे। जेसीबी ने पहले काठमंडी के प्रवेश द्वार के बायीं तरफ बनी महावीर प्रसाद की दुकान के आगे किए गए अतिक्रमण को हटाना शुरू कर दिया। चूंकि बनाए गए पक्के शेड के नीचे काफी सामान रखा था तो अधिकारियों ने व्यापारी से सामान हटाने को कहा। इसके बाद टीम दायीं तरफ बनी दुकानों के आगे किए अतिक्रमण पर जेसीबी से कार्रवाई की। टीम ने डेढ़ घंटे में एक के बाद एक पांच दुकानों के आगे किए अवैैध निर्माण को गिरा दिया। इनमें व्यापारी राधेश्याम आर्य की दुकान भी शामिल रही, जो निगम की इस कार्रवाई के पक्ष में हैं।
महावीर प्रसाद की दुकान पर हुआ हंगामा
इस कार्रवाई का विरोध कर रहे महावीर प्रसाद की दुकान पर निगम की टीम पहुंची। जैसे ही जेसीबी ने अतिक्रमण गिराना शुरू किया तो महावीर प्रसाद के बेटे अनिल बिंदल जेसीबी के सामने आ गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया है। अनिल बिंदल ने इस दौरान आरोप लगाया कि टीम ने राधेश्याम आर्य की दुकान के आगे बनी दीवार जानबूझकर नहीं तोड़ी। निगम का मकसद सिर्फ मेरी दुकान के आगे बने शेड को तोड़ना है। इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस ने बल ने उन्हें जेसीबी के सामने से हटाया। साथ ही उनसे कोर्ट के आदेशों की कॉपी भी मांगी। उसी दौरान महावीर प्रसाद के वकील वहां पहुंचे और उन्होंने बताया कि कोर्ट ने मामले की सुनवाई होने तक एक घंटे तक कार्रवाई रोकने का कहा है। इसके बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। हालांकि निगम की कार्रवाई रोकने के बाद व्यापारी खुद ही दुकानों के आगे किए गए अवैैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई करते रहे।
सेशन कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
उधर इस मामले में एडीजे विवेक गोयल की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान महावीर व अन्य के वकील व निगम के वकील ने अपने-अपने पक्ष रखे। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की और तब तक यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।
विज्ञापन
निगम अधिकारियों ने स्टे के ऑर्डर की कॉपी दिखाने का तर्क देते हुए व्यापारी को आगे से हटवा दिया। बाद में व्यापारी के वकील ने निगम अधिकारियों को कोर्ट के आदेश से अवगत कराया तो निगम ने अतिक्रमण की कार्रवाई रोक दी। हालांकि बाद में सेशन कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 18 नवंबर तक यथास्थिति बरकरार रखने को कहा। अदालत के इस आदेश के बाद निगम का अमला काठमंडी से चला गया।
विज्ञापन
बता दें कि काठमंडी में अतिक्रमण मामले में 4 नवंबर को जेएमआईसी मनोज दहिया की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्टे हटा दिया था। अदालत के फैसले के बाद निगम प्रशासन फैसले के आदेश की कॉपी का इंतजार कर रहा था। कॉपी मिलने के बाद निगम की टीम मंगलवार को काठमंडी में अतिक्रमण हटाने पहुंची। उधर महावीर व अन्य पक्ष ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की है, जिसकी मंगलवार को ही सुनवाई थी।
विज्ञापन
पुलिस बल के साथ पहुंचा अमला
सुबह साढ़े नौ बजे निगम अधिकारी पुलिस बल के साथ काठमंडी में अतिक्रमण हटाने पहुंचे। जेसीबी ने पहले काठमंडी के प्रवेश द्वार के बायीं तरफ बनी महावीर प्रसाद की दुकान के आगे किए गए अतिक्रमण को हटाना शुरू कर दिया। चूंकि बनाए गए पक्के शेड के नीचे काफी सामान रखा था तो अधिकारियों ने व्यापारी से सामान हटाने को कहा। इसके बाद टीम दायीं तरफ बनी दुकानों के आगे किए अतिक्रमण पर जेसीबी से कार्रवाई की। टीम ने डेढ़ घंटे में एक के बाद एक पांच दुकानों के आगे किए अवैैध निर्माण को गिरा दिया। इनमें व्यापारी राधेश्याम आर्य की दुकान भी शामिल रही, जो निगम की इस कार्रवाई के पक्ष में हैं।
महावीर प्रसाद की दुकान पर हुआ हंगामा
इस कार्रवाई का विरोध कर रहे महावीर प्रसाद की दुकान पर निगम की टीम पहुंची। जैसे ही जेसीबी ने अतिक्रमण गिराना शुरू किया तो महावीर प्रसाद के बेटे अनिल बिंदल जेसीबी के सामने आ गए। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर स्टे लगा दिया है। अनिल बिंदल ने इस दौरान आरोप लगाया कि टीम ने राधेश्याम आर्य की दुकान के आगे बनी दीवार जानबूझकर नहीं तोड़ी। निगम का मकसद सिर्फ मेरी दुकान के आगे बने शेड को तोड़ना है। इस दौरान मौके पर मौजूद पुलिस ने बल ने उन्हें जेसीबी के सामने से हटाया। साथ ही उनसे कोर्ट के आदेशों की कॉपी भी मांगी। उसी दौरान महावीर प्रसाद के वकील वहां पहुंचे और उन्होंने बताया कि कोर्ट ने मामले की सुनवाई होने तक एक घंटे तक कार्रवाई रोकने का कहा है। इसके बाद निगम ने कार्रवाई रोक दी। हालांकि निगम की कार्रवाई रोकने के बाद व्यापारी खुद ही दुकानों के आगे किए गए अवैैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई करते रहे।
सेशन कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
उधर इस मामले में एडीजे विवेक गोयल की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान महावीर व अन्य के वकील व निगम के वकील ने अपने-अपने पक्ष रखे। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की और तब तक यथास्थिति बरकरार रखने को कहा।