हरियाणा: संविधान निर्माण में हरियाणवी लोगों का योगदान स्मरणीय, 75 साल पहले उठाए कई मुद्दे आज भी ज्वलंत
14 जुलाई 1947 को संविधान सभा के प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले हरियाणा क्षेत्र के चौधरी रणबीर सिंह एकमात्र सदस्य थे। वहीं, 18 नंवबर 1948 को उन्होंने हरियाणा के गठन की आवाज उठाई थी। उनको संविधान सभा के सबसे युवा सदस्य होने का गौरव प्राप्त है।
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पुराना संसद भवन भले ही अब स्मारक बन गया, लेकिन संविधान सभा के हरियाणा के सदस्यों का योगदान स्मरणीय है। 75 साल पहले इनके द्वारा उठाए गए कई मुद्दे आज भी ज्वलंत हैं। चाहे वह गोरक्षा का मुद्दा हो या किसानों के हित की बात। संविधान सभा में बहस के दौरान शराबबंदी, कृषि, सेना, राष्ट्रभाषा हिंदी समेत कई मुद्दों पर हरियाणा क्षेत्र के नौ नेताओं ने पुरजोर वकालत की थी। इतिहास के पन्नों में इनका योगदान दर्ज है। इनमें तीन हिसार से थे। ठाकुर दास भार्गव, चौधरी सूरजमल और लाला अचिंत राम। इन नेताओं ने कानून निर्माण संबंधी वाद-विवाद में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था।
कमजोर किसानों को बचाने का प्रावधान
जगत सिंह हुड्डा द्वारा लिखित शोधपरक पुस्तक संविधान सभा में हरयाणा में इस बात का उल्लेख है कि देहाती पृष्ठभूमि से आने वाले चौधरी सूरजमल ने सरदार पटेल से अर्जी लगाई थी कि कमजोर किसानों को बचाने का प्रावधान संविधान में करें। उनका मानना था कि एक बार जब किसान नष्ट हो जाते हैं तो उनको बचाने वाला कोई नहीं होता। उन्होंने वाद-विवाद में यह भी कहा था कि जो लोग फौज से संबंध रखते हैं, उनके बच्चों के साथ अच्छा बर्ताव करें और उनको कमजोर न करें। क्योंकि भविष्य में उनकी जरूरत पड़ेगी।
1 नंवबर 1966 को हरियाणा राज्य भारत के मानचित्र पर स्थापित हुआ
14 जुलाई 1947 को संविधान सभा के प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले हरियाणा क्षेत्र के चौधरी रणबीर सिंह एकमात्र सदस्य थे। रोहतक निवासी चौधरी रणबीर सिंह आर्य समाजी थे, इसलिए उन्होंने गोरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विधानसभा के मसौदे पर चौ. रणबीर सिंह ने बेबाकी भाषण दिए थे। 18 नंवबर 1948 को उन्होंने हरियाणा के गठन की आवाज उठाई थी। उनको संविधान सभा के सबसे युवा सदस्य होने का गौरव प्राप्त है।
उन्होंने किसानों के हित, वर्गविहीन समाज और हरियाणा के निर्माण जैसे मुद्दों पर संविधान सभा में प्रमुखता से आवाज उठाई थी। आखिरकार सरदार हुकम सिंह की संसदीय रिपोर्ट के आधार पर पंजाब से हिंदी भाषी क्षेत्र को निकालकर नए राज्य हरियाणा का उदय हुआ। भारत के 17वें राज्य के रूप में 1 नंवबर 1966 को हरियाणा राज्य भारत के मानचित्र पर स्थापित हुआ।
द्वितीय अधिवेधन में पहली बार हरियाणा की आवाज सुनाई पड़ी
बुधवार 20 अगस्त, 1947 को 5 नए सदस्यों ने प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिनमें हरियाणा क्षेत्र से चौधरी निहाल सिंह तक्षक शामिल थे। उन्होंने देसी रियासतों में डाक समस्या से संबंधित संशोधन प्रस्ताव रखा था। पानीपत के मूल निवासी देशबंधु गुप्ता, विक्रम लाल सोपानी और बख्शी टेक चंद भी भारतीय संविधान सभा के सदस्य थे।
1947 में 20 से 25 जनवरी को हुए द्वितीय अधिवेधन में पहली बार हरियाणा की आवाज सुनाई पड़ी थी। संविधान सभा के सदस्य पंडित श्रीराम शर्मा भी रोहतक क्षेत्र से थे। संविधान सभा के अधिवेशन में 1 दिसंबर 1948 को पं. ठाकुर दास भार्गव ने विधानसभा के मसौदे पर वाद-विवाद में और गौवध पर अपना पक्ष रखा था। इसी के साथ शांतिपूर्ण सम्मेलन करने के पर भी उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए थे।
चौ. सूरजमल का मानना था कि ग्रामीण इलाकों का विकास किया जाना चाहिए
संविधान सभा में हरियाणा के नौ लोग थे। उनमें हिसार निवासी पं. ठाकुर दास भार्गव ने गौ हत्या व शराबबंदी पर लगाम लगाने के लिए अपनी आवाज उठाई थी। उन्होंने नीति निर्देशक सिद्धांतों के बारे में अपनी राय रखी थी। दादरी के रहने वाले निहाल सिंह तक्षक का मानना था कि लोगों को उनके आर्थिक मौलिक अधिकार दिए जाने चाहिए। चौ. सूरजमल का मानना था कि ग्रामीण इलाकों का विकास किया जाना चाहिए और शहर व गांव के बीच की दूरी को खत्म किया जाना चाहिए। लाला अचिंतराम गांधीवादी सोच के व्यक्ति थे। उनका मानना था कि देश में पंचायती प्रजातंत्र होना चाहिए।
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