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ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ी के लिए 13 मिनट चला आपरेशन डेथ

Wed, 28 Mar 2018 01:17 AM IST
Updated Wed, 28 Mar 2018 01:17 AM IST
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ग्लैंडर्स ग्रसित घोड़ी के लिए 13 मिनट चला आपरेशन डेथ
अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
पशुबाड़े में ग्लैंडर्स से ग्रसित एक घोड़ी की पशुपालन विभाग की टीम ने पेनलैस किलिंग करने के बाद उसे दफना दिया। 17 चिकित्सकों की टीम ने मंगलवार को करीब एक घंटे के ऑपरेशन डेथ के दौरान घोड़ी को मौत का इंजेक्शन दिया। पशुपालन विभाग को ग्लैंडर्स पीड़ित बाकी घोड़ों की तलाश है। कुल पांच घोड़ों को ग्लैंडर्स मिलने पर एक घोड़ी की कुछ दिन पहले मौत हो चुकी है। अभी तीन घोड़े नहीं मिल पा रहे।
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक मोतीलाल शर्मा ने की टीम मंगलवार को धांसू रोड स्थित पशुबाडे़ में पहुंची। यहां मालिक अपनी घोड़ी को लेकर पहुंची। दोपहर 2 बजकर 2 मिनट पर घोड़ी के ब्लड सैंपल लिए गए। इसके बाद नगर निगम की ओर से भेजी गई जेसीबी ने 10 का गड्ढा खोदा। चिकित्सकों ने घोड़ी को इंजेक्शन देकर बेहोश दिया। महज एक मिनट से भी कम समय में घोड़ी बेहोश होकर गिर गई। इसके बाद चिकित्सकों की टीम ने घोड़ी को जहर का इंजेक्शन चढ़ाना शुरू किया। बड़ी बोतल वाला यह इंजेक्शन तीन मिनट में पूरा हुआ। दोपहर 2 बजकर 13 मिनट पर चिकित्सकों ने घोड़ी के मरने की पुष्टि की। इसके बाद घोड़ी को जमीन में दफनाया गया। पशु पालन विभाग के उपनिदेशक मोतीलाल शर्मा ने कहा कि पशु मालिक सही जानकारी नहीं दे रहा। वह तीन घोड़ों को बेचने की बात कह रहा है। खरीदने वालों के नाम पता नहीं बता रहा। तीन घोड़े विभाग के सुपुर्द न करने पर पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा है।
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इंसान में भी फैल सकता है यह रोग
ग्लैंडर्स एक लाइलाज बीमारी है। यह रोग घोड़ों में ही नहीं मनुष्य में भी फैल सकता है। यह रोग न फैले, इसके लिए विभाग को बीमारी से ग्रसित घोड़े को मारने के लिए शहर से बाहर जगह को चिह्नित करना पड़ता है।
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पांच किलोमीटर के दायरे में होगी जांच
पशुपालन विभाग ग्लैंडर्स के अलर्ट के चलते अब पशुबाड़े के आसपास के पांच किलोमीटर के दायरे में घोड़ों के सैंपल लेगा। ग्लैंडर्स बीमारी के प्रकोप के चलते घोड़ों और खच्चरों के सैंपल लेने के लिए पशुपालन विभाग ने नौ टीमों का गठन किया है। यह टीम बुधवार से सैंपल लेने का कार्य करेगी।

ऐसे आया मामला पकड़ में
महाबीर कालोनी में रमेश कुमार के पशुबाड़े में ग्लैंडर्स रोग से प्रभावित घोड़े होने का उस समय पता चला, जब उसके दो घोड़े मर गए थे। इन घोड़ों का जब लुवास में पोस्टमार्टम हुआ तो इस बीमारी का पता चला। जब अन्य घोड़ों के सैंपल लेकर जांच की तो पांच घोड़ों में ग्लैंडर्स की पुष्टि हुई।
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