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Hisar News: 32 गवाह, 40 सुनवाई और 114 सबूतों ने राममेहर को आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे पहुंचाया
Fri, 28 Feb 2025 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Fri, 28 Feb 2025 11:36 PM IST
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हिसार। करीब साढ़े चार साल में 40 सुनवाई, 32 गवाह और 114 सबूत राममेहर को आखिरी सांस तक सलाखों के पीछे भिजवाने में अहम रहे। उसे सजा सुनाते हुए अदालत ने 100 पन्ने का फैसला लिखा। राममेहर के भांजे विकास, भतीजे अमित ने भी सच का साथ देते हुए उसके खिलाफ गवाही दी। सीडीआर रिपोर्ट, मोबाइल फोन लोकेशन, एफएसएल, पैथोलॉजी और डीएनए रिपोर्ट के जरिये पुलिस ने केस में मजबूत साक्ष्य रखे। राममेहर के भांजे विकास की गवाही सबसे ठोस कारण बनी। वारदात से पहले राममेहर ने उसे ही फोन किया था। विकास ने वाइस सैंपल और फोन की रिकॉर्डिंग भी अदालत को दी।
राममेहर को एडीजे गगनदीप की अदालत में पेश किया तो उसके चेहरे पर किसी तरह के पश्चाताप के भाव नहीं थे। सजा सुनने के बाद भी उसने रहम की अपील नहीं की। अदालत में उसके परिवार से कोई नहीं आया जबकि रमलू के परिवार से सभी लोग मौजूद रहे। पीड़ित पक्ष के वकील एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने सुनवाई के दौरान राममेहर को सजा-ए-मौत देने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि राममेहर ने बड़ी चालाकी और साजिश के तहत एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की है, जिस पर दो परिवारों की जिम्मेदारी थी। ऐसे शातिर, क्रूर हत्यारे को कठोर से कठोर सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति कर्ज से बाहर आने के लिए इस तरह का षड्यंत्र न रचे। कोर्ट परिसर में मौजूद रमलू की पत्नी कृष्णा ने राममेहर के लिए फांसी की सजा की मांग की।
ऐसे हुई वारदात...
6 अक्तूबर 2020 को हांसी के महजत-भाटला रोड पर पुलिस को एक व्यक्ति के कार में जिंदा जलने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो कार से धुआं उठ रहा था। ड्राइवर सीट के साइड वाली सीट पर बैठा व्यक्ति जलकर कंकाल बन चुका था। कार की नंबर प्लेट के आधार पर जले व्यक्ति की शिनाख्त डाटा गांव निवासी राममेहर के रूप में हुई। राममेहर के भतीजे अमित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके चाचा का फोन आया था। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उसे लूटने की नीयत से पीछा कर रहे हैं। जब वह मौके पर पहुंचा तो कार जल चुकी थी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर मृतक को राममेहर मान लिया और डीएनए जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा। रिपोर्ट आने पर पता चला कि मृतक राममेहर नहीं कोई और है। जब वह पकड़ा गया तो उसने कबूल किया कि मृतक रमलू था, जिसकी उसने हत्या कर दी थी। इसके बाद उस पर हत्या का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ी।
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राममेहर पर करीब 2 करोड़ का कर्ज था
राममेहर ने हांसी में डिस्पोजल तैयार करने के लिए रॉ मैटेरियल की फैक्टरी लगाई थी। कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से फैक्टरी बंद हो गई। ऐसे में उसने पीएनबी और एसबीआई से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का लोन लिया। इसके अलावा भी उस पर कर्ज था। दसवीं पास राममेहर ने कर्ज से उबरने के लिए 1.41 करोड़ रुपये का बीमा कराया। बीमा क्लेम हड़पने के लिए उसने खुद को हादसे में मरा दिखाने की कहानी रची। अपने हमनाम, कद-काठी व आयु के राममेहर उर्फ रमलू को किसी बहाने से अपनी कार में बैठाया। दोनों ने कार में घूमते हुए शराब पीते रहे। 6 अक्तूबर 2020 की रात करीब 9 बजे भाटला-महजत रोड पर राममेहर ने रमलू की गला रेतकर कार में ही हत्या कर दी। इसके बाद बाहर से कार बंदकर आग लगा दी।
पुलिस को इन कारणों से हुआ शक
- मौके पर मिली कार रोड साइड में खड़ी थी।
- कार के हैंड ब्रेक लगे हुए थे और दरवाजे बाहर से लॉक थे।
- शव चालक की बजाए साइड वाली सीट पर मिला।
मोबाइल कॉल ने खोले राज..
पुलिस को शक हुआ तो राममेहर की फैक्टरी में काम करने वाली महिला कर्मियों से बातचीत की। उनकी कॉल डिटेल निकाली तो एक महिला कर्मी के नंबर पर नए नंबर से हत्या के दिन 36, अगले दिन 42 बार कॉल आने का पता चला। पुलिस ने इस नंबर को ट्रेस करना शुरू किया तो मामले की कड़ी से कड़ी जुड़ती गई। आखिर पुलिस राममेहर के नए मोबाइल नंबर की लोकेशन के जरिए छत्तीसगढ़ पहुंची और वहां से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने 6 आरोपी बनाए थे
पुलिस ने इस मामले में राममेहर, उसकी फैक्टरी में काम करने वाली सुनीता, रानी, राधा व उसके 2 बेटों को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। दो महिलाओं को अदालत ने बरी कर दिया था। राममेहर को फोन पर जानकारी देने व घटना को छिपाने वाली रानी और सुनीता को को छह-छह माह कैद की सजा सुनाई, जो फैसले से पहले ही काट चुकी है। ऐसे में दोनों को शुक्रवार को बरी कर दिया गया।
निशुल्क लड़ा केस, फोटोस्टेट के रुपये भी नहीं लिए
रमलू के पांच बच्चे हैं। उसके भाई के भी चार बच्चे हैं। भाई की मौत के बाद रमलू डमरू बजाकर दोनों परिवारों का पेट पालता था। पत्नी कृष्णा सहित परिवार में 11 सदस्य थे। अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले रमलू की हत्या के बाद तत्कालीन राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा उसके गांव शोक व्यक्त करने पहुंची थी। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ 11 लाख रुपए की एफडी परिवार के लिए कराई थी। एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल, श्वेता शर्मा ने केस निशुल्क लड़ा। परिवार से दस्तावेज के फोटोस्टेट के लिए भी एक रुपया तक नहीं लिया।
जज की टिप्पणी...
बेहद दुखद घटना है। इसके बाद भी अदालत को कहीं न कहीं रहम दिखाना पड़ता है। दोषी को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा काटनी होगी। अदालत का 100 पेज का फैसला दो दिन बाद दोनों पक्षों को दिया जाएगा। - गगनदीप मित्तल, एडीजे, हिसार।
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राममेहर को एडीजे गगनदीप की अदालत में पेश किया तो उसके चेहरे पर किसी तरह के पश्चाताप के भाव नहीं थे। सजा सुनने के बाद भी उसने रहम की अपील नहीं की। अदालत में उसके परिवार से कोई नहीं आया जबकि रमलू के परिवार से सभी लोग मौजूद रहे। पीड़ित पक्ष के वकील एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने सुनवाई के दौरान राममेहर को सजा-ए-मौत देने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि राममेहर ने बड़ी चालाकी और साजिश के तहत एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की है, जिस पर दो परिवारों की जिम्मेदारी थी। ऐसे शातिर, क्रूर हत्यारे को कठोर से कठोर सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई व्यक्ति कर्ज से बाहर आने के लिए इस तरह का षड्यंत्र न रचे। कोर्ट परिसर में मौजूद रमलू की पत्नी कृष्णा ने राममेहर के लिए फांसी की सजा की मांग की।
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ऐसे हुई वारदात...
6 अक्तूबर 2020 को हांसी के महजत-भाटला रोड पर पुलिस को एक व्यक्ति के कार में जिंदा जलने की सूचना मिली। पुलिस मौके पर पहुंची तो कार से धुआं उठ रहा था। ड्राइवर सीट के साइड वाली सीट पर बैठा व्यक्ति जलकर कंकाल बन चुका था। कार की नंबर प्लेट के आधार पर जले व्यक्ति की शिनाख्त डाटा गांव निवासी राममेहर के रूप में हुई। राममेहर के भतीजे अमित ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसके चाचा का फोन आया था। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उसे लूटने की नीयत से पीछा कर रहे हैं। जब वह मौके पर पहुंचा तो कार जल चुकी थी। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के आधार पर मृतक को राममेहर मान लिया और डीएनए जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा। रिपोर्ट आने पर पता चला कि मृतक राममेहर नहीं कोई और है। जब वह पकड़ा गया तो उसने कबूल किया कि मृतक रमलू था, जिसकी उसने हत्या कर दी थी। इसके बाद उस पर हत्या का केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ी।
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राममेहर पर करीब 2 करोड़ का कर्ज था
राममेहर ने हांसी में डिस्पोजल तैयार करने के लिए रॉ मैटेरियल की फैक्टरी लगाई थी। कोरोना काल में लॉकडाउन की वजह से फैक्टरी बंद हो गई। ऐसे में उसने पीएनबी और एसबीआई से करीब डेढ़ करोड़ रुपये का लोन लिया। इसके अलावा भी उस पर कर्ज था। दसवीं पास राममेहर ने कर्ज से उबरने के लिए 1.41 करोड़ रुपये का बीमा कराया। बीमा क्लेम हड़पने के लिए उसने खुद को हादसे में मरा दिखाने की कहानी रची। अपने हमनाम, कद-काठी व आयु के राममेहर उर्फ रमलू को किसी बहाने से अपनी कार में बैठाया। दोनों ने कार में घूमते हुए शराब पीते रहे। 6 अक्तूबर 2020 की रात करीब 9 बजे भाटला-महजत रोड पर राममेहर ने रमलू की गला रेतकर कार में ही हत्या कर दी। इसके बाद बाहर से कार बंदकर आग लगा दी।
पुलिस को इन कारणों से हुआ शक
- मौके पर मिली कार रोड साइड में खड़ी थी।
- कार के हैंड ब्रेक लगे हुए थे और दरवाजे बाहर से लॉक थे।
- शव चालक की बजाए साइड वाली सीट पर मिला।
मोबाइल कॉल ने खोले राज..
पुलिस को शक हुआ तो राममेहर की फैक्टरी में काम करने वाली महिला कर्मियों से बातचीत की। उनकी कॉल डिटेल निकाली तो एक महिला कर्मी के नंबर पर नए नंबर से हत्या के दिन 36, अगले दिन 42 बार कॉल आने का पता चला। पुलिस ने इस नंबर को ट्रेस करना शुरू किया तो मामले की कड़ी से कड़ी जुड़ती गई। आखिर पुलिस राममेहर के नए मोबाइल नंबर की लोकेशन के जरिए छत्तीसगढ़ पहुंची और वहां से उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने 6 आरोपी बनाए थे
पुलिस ने इस मामले में राममेहर, उसकी फैक्टरी में काम करने वाली सुनीता, रानी, राधा व उसके 2 बेटों को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। दो महिलाओं को अदालत ने बरी कर दिया था। राममेहर को फोन पर जानकारी देने व घटना को छिपाने वाली रानी और सुनीता को को छह-छह माह कैद की सजा सुनाई, जो फैसले से पहले ही काट चुकी है। ऐसे में दोनों को शुक्रवार को बरी कर दिया गया।
निशुल्क लड़ा केस, फोटोस्टेट के रुपये भी नहीं लिए
रमलू के पांच बच्चे हैं। उसके भाई के भी चार बच्चे हैं। भाई की मौत के बाद रमलू डमरू बजाकर दोनों परिवारों का पेट पालता था। पत्नी कृष्णा सहित परिवार में 11 सदस्य थे। अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले रमलू की हत्या के बाद तत्कालीन राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा उसके गांव शोक व्यक्त करने पहुंची थी। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ 11 लाख रुपए की एफडी परिवार के लिए कराई थी। एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल, श्वेता शर्मा ने केस निशुल्क लड़ा। परिवार से दस्तावेज के फोटोस्टेट के लिए भी एक रुपया तक नहीं लिया।
जज की टिप्पणी...
बेहद दुखद घटना है। इसके बाद भी अदालत को कहीं न कहीं रहम दिखाना पड़ता है। दोषी को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा काटनी होगी। अदालत का 100 पेज का फैसला दो दिन बाद दोनों पक्षों को दिया जाएगा। - गगनदीप मित्तल, एडीजे, हिसार।