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रात दो बजे तक पिछले सालों के पेपर हल कर रुबानी ने 497 अंक किए हासिल

Fri, 03 May 2019 02:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 03 May 2019 02:03 AM IST
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रात दो बजे तक पिछले सालों के पेपर हल कर रुबानी ने 497 अंक किए हासिल
हिसार। विद्या देवी जिंदल स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा रुबानी चीमा ने सीबीएसई की परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर तीसरी रैंक हासिल की है। मूलरूप से करनाल जिले के गांव पखाना की रहने वाली रुबानी ने पांच विषयों में से चार में 100 में से 100 अंक हासिल किए हैं। रुबानी ने 500 में से 497 अंक हासिल किए हैं।
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सिर्फ अंग्रेजी में उनके तीन नंबर कट गए। उन्हें अंग्रेजी में 97 अंक हासिल हुए हैं, जबकि इकनॉमिक्स, ज्योग्राफी, साइकोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। रुबानी ने बताया कि वह परीक्षा से कुछ दिन पहले तक रात दो बजे तक भी अपने सहपाठियों के साथ हॉस्टल में पढ़ाई करती थी। पिछले सालों के पेपर हल करके परीक्षा की तैयारी करती थी। इसके अलावा सालभर नियमित रूप से पढ़ती थी, ताकि परीक्षा के दिनों में ज्यादा दबाव न झेलना पड़े।
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परिणाम...
विषय अंक
अंग्रेजी-97
इकोनॉमिक्स-100
ज्योग्राफी- 100
साइकोलॉजी-100
पॉलिटिकल साइंस-100
कुल अंक- 497

फोन पर रो पड़ती तो मां बढ़ाती थी हौसला
रुबानी का कहना है कि अक्सर वह हिम्मत हार जाती और फोन पर परिजनों से बात करते हुए रोने लग जाती थी। ऐसी स्थिति में उसकी मां गगनदीप कौर उसका हौसला बढ़ाती थीं। मां से मिले हौसले से उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता और वह फिर से दृढ़ निश्चय के साथ अपनी पढ़ाई को जारी रखती। रुबानी ने बताया कि उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि वह इतनी अच्छी रैंकिंग हासिल करेगी।
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आठ साल पहले हिसार में लिया था दाखिला
रुबानी के पिता अमनदीप सिंह चीमा करनाल जिले में ही राइस मिल चलाते हैं। उनकी मां गगनदीप कौर गृहिणी हैं, इकलौता भाई जयकीरत सिंह पढ़ाई के लिए कनाडा गया हुआ है। रुबानी का आठ साल पहले हिसार के विद्या देवी जिंदल स्कूल में पांचवीं कक्षा में दाखिला करवाया गया था। तभी से वह लगातार यहीं पढ़ रही थी। यहां वह स्कूल के हॉस्टल में रहती थी। परिवार से दूर रहते हुए भी रुबानी ने अपनी पढ़ाई पर अधिक फोकस किया।
जितनी जरूरत रही, उतना ही सोशल मीडिया को छुआ
रुबानी बताती हैं कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। जितनी जरूरत होती थी, उतना सोशल मीडिया का प्रयोग भी करती थी। मगर परीक्षा के दिनों में 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करने के कारण सोशल मीडिया का नाममात्र ही यूज कर पाती थी। रुबानी ने बताया कि उसने किसी तरह की कोचिंग नहीं ली, बल्कि स्कूल में ही रहकर पढ़ाई की।

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न्यायिक क्षेत्र में जाना है मकसद
रुबानी कहती हैं कि वह अभी आगे साइकोलॉजी ऑनर्स की पढ़ाई करेंगी। इसके बाद वह न्यायिक क्षेत्र में अपना भविष्य बनाएंगी। उसका भाई पढ़ाई के लिए विदेश गया हुआ है। इसलिए सभी उसको भी विदेश में पढ़ाई करने के लिए कहते हैं। मगर वह जज बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। रुबानी की उपलब्धि पर उनकी मां गगनदीप कौर व पिता अमनदीप सिंह चीमा ने भी खुशी जाहिर करते हुए बेटी के सपनों को साकार करने में पूरी मदद करने का भरोसा दिलाया।
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