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हड़ताल कर रहे 377 में से 367 एनएचएम कर्मचारियों की सेवाएं की समाप्त
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। पांच फरवरी से हड़ताल पर चल रहे नेशनल हेल्थ मिशन के 377 में से अब तक 367 कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के कड़े रुख की वजह से कर्मचारियों की मांगों को मानने के बजाय स्थानीय अधिकारियों द्वारा उन पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. दयानंद का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा मिशन के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के बावजूद कर्मियों का हड़ताल करना असांविधानिक है। सभी कर्मचारियों को सर्विस बाय-लॉज के अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि, डीए व अन्य लाभ निरंतर दिए जा रहे हैं, जिनसे हरियाणा सरकार पर प्रतिवर्ष 110 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ा है। उधर, एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जगत बिसला ने पलटवार करते हुए कहा है कि सिविल सर्जन वेतन विसंगतियों को दूर करने का लेटर दिखा दे। हम हड़ताल वापस ले लेंगे। यह सिर्फ अफवाहें फैलाई जा रही हैं। हकीकत तो यह है कि सात महीने पहले सर्विस बॉयलाज बनाए थे, उसके अनुसार भी सभी कर्मचारियों को लाभ नहीं मिला है।
दो साल में 10 बार हड़ताल कर चुके एनएचएम कर्मी
सिविल सर्जन के मुताबिक इससे पहले भी कर्मचारी हड़ताल कर चुके हैं। पिछले दो वर्ष के दौरान एनएचएम कर्मी 10 बार हड़ताल पर जा चुके हैं, जबकि इनके लिए 1 जनवरी 2018 से सर्विस बायलॉज बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार समझाए जाने के बावजूद कर्मचारी अपनी सेवाओं पर नहीं लौट रहे हैं। उनके इस अड़ियल रवैये को गंभीरता से लेते हुए अब तक 367 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। एनएचएम के अंतर्गत एसएनसीयू, लेबर रूम तथा आपातकालीन सेवाओं को जिला में कार्यरत नियमित कर्मचारियों के माध्यम से सुचारु ढंग से चलाने के प्रबंध कर लिए गए हैं। एंबुलेंस सेवाओं पर कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों की भरपाई के लिए नियमित चालकों, हरियाणा रोडवेज व आउटसोर्सिंग माध्यम से पर्याप्त संख्या में चालक जुटा लिए गए हैं।
कर्मचारी अपने हकों के लिए लड़ रहे : बिसला
एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जगत बिसला का कहना है कि कर्मचारी अपने हकों के लिए लड़ रहे हैं। कोई कर्मचारी 10 तो कोई 15 सालों से लगातार काम कर रहा है। मगर अभी तक किसी भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया है, जबकि कई प्रदेशों में एनएचएम कर्मी नियमित कर्मचारी बन चुके हैं। बार-बार सरकार झूठे आश्वासन दे रही है। अधिकारी भी सरकार को गुमराह कर रहे हैं।
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हिसार। पांच फरवरी से हड़ताल पर चल रहे नेशनल हेल्थ मिशन के 377 में से अब तक 367 कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश सरकार के कड़े रुख की वजह से कर्मचारियों की मांगों को मानने के बजाय स्थानीय अधिकारियों द्वारा उन पर काम पर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. दयानंद का कहना है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा मिशन के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने के बावजूद कर्मियों का हड़ताल करना असांविधानिक है। सभी कर्मचारियों को सर्विस बाय-लॉज के अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि, डीए व अन्य लाभ निरंतर दिए जा रहे हैं, जिनसे हरियाणा सरकार पर प्रतिवर्ष 110 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ा है। उधर, एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जगत बिसला ने पलटवार करते हुए कहा है कि सिविल सर्जन वेतन विसंगतियों को दूर करने का लेटर दिखा दे। हम हड़ताल वापस ले लेंगे। यह सिर्फ अफवाहें फैलाई जा रही हैं। हकीकत तो यह है कि सात महीने पहले सर्विस बॉयलाज बनाए थे, उसके अनुसार भी सभी कर्मचारियों को लाभ नहीं मिला है।
दो साल में 10 बार हड़ताल कर चुके एनएचएम कर्मी
सिविल सर्जन के मुताबिक इससे पहले भी कर्मचारी हड़ताल कर चुके हैं। पिछले दो वर्ष के दौरान एनएचएम कर्मी 10 बार हड़ताल पर जा चुके हैं, जबकि इनके लिए 1 जनवरी 2018 से सर्विस बायलॉज बना दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार समझाए जाने के बावजूद कर्मचारी अपनी सेवाओं पर नहीं लौट रहे हैं। उनके इस अड़ियल रवैये को गंभीरता से लेते हुए अब तक 367 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। एनएचएम के अंतर्गत एसएनसीयू, लेबर रूम तथा आपातकालीन सेवाओं को जिला में कार्यरत नियमित कर्मचारियों के माध्यम से सुचारु ढंग से चलाने के प्रबंध कर लिए गए हैं। एंबुलेंस सेवाओं पर कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों की भरपाई के लिए नियमित चालकों, हरियाणा रोडवेज व आउटसोर्सिंग माध्यम से पर्याप्त संख्या में चालक जुटा लिए गए हैं।
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कर्मचारी अपने हकों के लिए लड़ रहे : बिसला
एनएचएम कर्मचारी संघ के जिला प्रधान जगत बिसला का कहना है कि कर्मचारी अपने हकों के लिए लड़ रहे हैं। कोई कर्मचारी 10 तो कोई 15 सालों से लगातार काम कर रहा है। मगर अभी तक किसी भी कर्मचारी को नियमित नहीं किया गया है, जबकि कई प्रदेशों में एनएचएम कर्मी नियमित कर्मचारी बन चुके हैं। बार-बार सरकार झूठे आश्वासन दे रही है। अधिकारी भी सरकार को गुमराह कर रहे हैं।
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