{"_id":"5bf45e3dbdec2269490084ea","slug":"161542741565-hisar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देर शाम 4 बजे बाद हिसार आकर थमने लगे बसों के पहिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देर शाम 4 बजे बाद हिसार आकर थमने लगे बसों के पहिए
Updated Wed, 21 Nov 2018 12:49 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर-कंडक्टरों का ओटी (ओवर टाइम) खत्म करने के विवाद के बीच मंगलवार को रोडवेज बसों के पहिये देर शाम चार बजे बाद हिसार डिपो में आकर थमने लगे। चंडीगढ़ के लिए जाने वाली करीब 23 बसें हिसार डिपो से तो चलीं, लेकिन उनका संचालन कैथल तक हुआ और वहां से वे वापस लौट आईं। इसी प्रकार हिसार से दिल्ली और सिरसा-फतेहाबाद होते हुए हिसार का रूट करने वाली 20 बसें दिल्ली से ही लौट आईं।
इसी बीच हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय द्वारा सभी डिपो जीएम को पत्र लिखकर पूछा गया कि उन्हें ओटी शून्य करने के लिए कितने ड्राइवर-कंडक्टरों की जरूरत है। इस पर हिसार डिपो द्वारा 20 ड्राइवरों और 90 कंडक्टरों की मांग की गई है। बसों के निर्धारित रूटों तक न जाने के कारण डिपो को भी लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर विभाग और रोडवेज कर्मचारियों की लड़ाई में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार देर शाम चार बजे लौटीं बसों के ड्राइवरों ने ड्यूटी समाप्त होने के कारण अपनी बसों को वर्कशॉप के अंदर लगा दिया। ऐसे में देर शाम चंडीगढ़, दिल्ली की ओर जाने वाली बसों का संचालन नहीं हो सका। यात्री बूथों पर बसों का इंतजार करते रहे, लेकिन रूटों पर बसें नहीं थीं।
इन बसों का परिचालन रहा प्रभावित
हिसार से चंडीगढ़ की ओर जाने वाली 23 बसें मंगलवार को कैथल तक का चक्कर लगाकर लौट आईं। हिसार से दिल्ली रूट की भी 20 बसें दिल्ली से ही लौट आईं। दिल्ली जाने वाली बसों का वापसी का रूट दिल्ली से वाया सिरसा-फतेहाबाद होते हुए हिसार पहुंचने का है, लेकिन मंगलवार को ये 20 बसें हिसार से दिल्ली और दिल्ली से हिसार मार्ग पर चलीं। तीन बजे एक बस ही चंडीगढ़ तक के लिए रवाना हुई, जिसका कंडक्टर अधिकारियों द्वारा लिखकर दिए जाने के बाद ही चंडीगढ़ तक बस लेकर जाने को राजी हुआ।
विज्ञापन
निदेशालय ने मांगी डिमांड
हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय चंडीगढ़ की ओर से सभी महाप्रबंधकों को मंगलवार को पत्र भेजा गया कि चालक-परिचालकों को दिए जा रहे ओवर टाइम को शून्य किया जाए, लेकिन कुछ महाप्रबंधकों द्वारा चालक-परिचालकों की कमी बताकर ऐसा करने में असमर्थता दर्शाई गई है। ऐसे में ओवर टाइम को शून्य करने के लिए आपके डिपो में वर्तमान चालक-परिचालकों के अलावा कितने और चालक-परिचालकों की आवश्यकता है। पत्र में लिखा गया है कि इसकी सूचना शाम पांच बजे तक ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराएं। इसकी एवज में हिसार डिपो द्वारा 90 कंडक्टरों और 20 ड्राइवरों की मांग का जवाब देते हुए की गई है। हिसार डिपो में वर्तमान में 220 बसें हैं। इनके लिए 290 कंडक्टर और 345 ड्राइवर कार्यरत हैं।
डिपो को हो रहा लाखों का नुकसान
रूट पूरा न करने के कारण रोडवेज डिपो को भी लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। चंडीगढ़ जाने वाली एक बस 24-25 हजार रुपये प्रति चक्कर इनकम होती थी। अब चूंकि चंडीगढ़ जाने वाली बसें केवल कैथल तक जा रही हैं तो उनसे प्रति चक्कर 12-13 हजार रुपये की इनकम है। यदि वही बस चंडीगढ़ तक भेजी जाए तो इसमें 3000 रुपये का तेल और 1500 रुपये ओवर टाइम के मिलाकर 4500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे, जबकि इनकम में 10-12 हजार रुपये का फायदा होगा। ओटी और तेल खर्च काटकर यह मुनाफा 6-7 हजार रुपये का होगा। ऐसे में 23 बसों का संचालन जो चंडीगढ़ होता था, उनसे यह शुद्ध मुनाफा एक दिन का डेढ़ लाख रुपये से भी अधिक पड़ेगा।
कल होगी रोडवेज तालमेल कमेटी की बैठक
तालमेल कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर किरमारा ने बताया कि बुधवार को रोडवेज वर्कशॉप में बैठक बुलाई गई है। इसमें कर्मचारियों के ओवर टाइम को लेकर बातचीत की जाएगी और आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इसमें तालमेल कमेटी के प्रदेश भर से पदाधिकारी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह रूल तो बना दिया, लेकिन इससे केवल डिपो को आर्थिक नुकसान है और जनता को परेशानी हो रही है। बैठक में लिए निर्णय के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
हिसार। हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर-कंडक्टरों का ओटी (ओवर टाइम) खत्म करने के विवाद के बीच मंगलवार को रोडवेज बसों के पहिये देर शाम चार बजे बाद हिसार डिपो में आकर थमने लगे। चंडीगढ़ के लिए जाने वाली करीब 23 बसें हिसार डिपो से तो चलीं, लेकिन उनका संचालन कैथल तक हुआ और वहां से वे वापस लौट आईं। इसी प्रकार हिसार से दिल्ली और सिरसा-फतेहाबाद होते हुए हिसार का रूट करने वाली 20 बसें दिल्ली से ही लौट आईं।
इसी बीच हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय द्वारा सभी डिपो जीएम को पत्र लिखकर पूछा गया कि उन्हें ओटी शून्य करने के लिए कितने ड्राइवर-कंडक्टरों की जरूरत है। इस पर हिसार डिपो द्वारा 20 ड्राइवरों और 90 कंडक्टरों की मांग की गई है। बसों के निर्धारित रूटों तक न जाने के कारण डिपो को भी लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर विभाग और रोडवेज कर्मचारियों की लड़ाई में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार देर शाम चार बजे लौटीं बसों के ड्राइवरों ने ड्यूटी समाप्त होने के कारण अपनी बसों को वर्कशॉप के अंदर लगा दिया। ऐसे में देर शाम चंडीगढ़, दिल्ली की ओर जाने वाली बसों का संचालन नहीं हो सका। यात्री बूथों पर बसों का इंतजार करते रहे, लेकिन रूटों पर बसें नहीं थीं।
विज्ञापन
इन बसों का परिचालन रहा प्रभावित
हिसार से चंडीगढ़ की ओर जाने वाली 23 बसें मंगलवार को कैथल तक का चक्कर लगाकर लौट आईं। हिसार से दिल्ली रूट की भी 20 बसें दिल्ली से ही लौट आईं। दिल्ली जाने वाली बसों का वापसी का रूट दिल्ली से वाया सिरसा-फतेहाबाद होते हुए हिसार पहुंचने का है, लेकिन मंगलवार को ये 20 बसें हिसार से दिल्ली और दिल्ली से हिसार मार्ग पर चलीं। तीन बजे एक बस ही चंडीगढ़ तक के लिए रवाना हुई, जिसका कंडक्टर अधिकारियों द्वारा लिखकर दिए जाने के बाद ही चंडीगढ़ तक बस लेकर जाने को राजी हुआ।
विज्ञापन
निदेशालय ने मांगी डिमांड
हरियाणा राज्य परिवहन निदेशालय चंडीगढ़ की ओर से सभी महाप्रबंधकों को मंगलवार को पत्र भेजा गया कि चालक-परिचालकों को दिए जा रहे ओवर टाइम को शून्य किया जाए, लेकिन कुछ महाप्रबंधकों द्वारा चालक-परिचालकों की कमी बताकर ऐसा करने में असमर्थता दर्शाई गई है। ऐसे में ओवर टाइम को शून्य करने के लिए आपके डिपो में वर्तमान चालक-परिचालकों के अलावा कितने और चालक-परिचालकों की आवश्यकता है। पत्र में लिखा गया है कि इसकी सूचना शाम पांच बजे तक ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराएं। इसकी एवज में हिसार डिपो द्वारा 90 कंडक्टरों और 20 ड्राइवरों की मांग का जवाब देते हुए की गई है। हिसार डिपो में वर्तमान में 220 बसें हैं। इनके लिए 290 कंडक्टर और 345 ड्राइवर कार्यरत हैं।
डिपो को हो रहा लाखों का नुकसान
रूट पूरा न करने के कारण रोडवेज डिपो को भी लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। चंडीगढ़ जाने वाली एक बस 24-25 हजार रुपये प्रति चक्कर इनकम होती थी। अब चूंकि चंडीगढ़ जाने वाली बसें केवल कैथल तक जा रही हैं तो उनसे प्रति चक्कर 12-13 हजार रुपये की इनकम है। यदि वही बस चंडीगढ़ तक भेजी जाए तो इसमें 3000 रुपये का तेल और 1500 रुपये ओवर टाइम के मिलाकर 4500 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे, जबकि इनकम में 10-12 हजार रुपये का फायदा होगा। ओटी और तेल खर्च काटकर यह मुनाफा 6-7 हजार रुपये का होगा। ऐसे में 23 बसों का संचालन जो चंडीगढ़ होता था, उनसे यह शुद्ध मुनाफा एक दिन का डेढ़ लाख रुपये से भी अधिक पड़ेगा।
कल होगी रोडवेज तालमेल कमेटी की बैठक
तालमेल कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष दलबीर किरमारा ने बताया कि बुधवार को रोडवेज वर्कशॉप में बैठक बुलाई गई है। इसमें कर्मचारियों के ओवर टाइम को लेकर बातचीत की जाएगी और आगामी रणनीति बनाई जाएगी। इसमें तालमेल कमेटी के प्रदेश भर से पदाधिकारी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह रूल तो बना दिया, लेकिन इससे केवल डिपो को आर्थिक नुकसान है और जनता को परेशानी हो रही है। बैठक में लिए निर्णय के अनुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।