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शहर में तीन हजार से ज्यादा गायें, पकड़ने के लिए सिर्फ एक ठेकेदार, हर रोज आ रही शिकायतें
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। इसे नगर निगम प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत ही कहा जाएगा कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं की समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। आए दिन लोगों को लावारिस पशु घायल कर रहे हैं, लेकिन निगम के पास इसका कोई ठोस हल तक दिखाई नहीं दे रहा है।
तीन हजार से ज्यादा लावारिस गायें शहर की सड़कों पर खुली घूम रही है। मगर उन्हें पकड़ने के लिए सिर्फ एक ठेकेदार है। पशुओं को पकड़ने में जोखिम होने के कारण यह ठेकेदार भी सुबह से लेकर शाम तक मुश्किल से 15 से 20 गायें ही पकड़ पाता है। ऐसे में निगम प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
एक गाय पकड़ने पर 99 रुपये होते हैं खर्च
नगर निगम प्रशासन एक गाय को पकड़ने के लिए ठेकेदार को 99 रुपये देता है। हालांकि पिछले ठेकेदार को 435 रुपये मिलते थे, उसके बावजूद भी वह खर्चा पूरा नहीं होने की शिकायत करता था। करीब ढाई महीने पहले नगर निगम प्रशासन ने शहर में गायों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया था। तब दो ठेकेदारों ने एक जैसे ही 99 रुपये के हिसाब से रेट भरे। दोनों को सिविल लाइन व सिटी थाना के हिसाब से एरिया बांटकर दे दिया गया। मगर दस दिन में ही एक ठेकेदार ने टेंडर वापस कर दिया।
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जहां से एक बार गाय पकड़ी, वहां दो दिन बाद वही हालात
इस समय स्थिति ऐसी है कि जहां से ठेकेदार की टीम गायों को पकड़ती है। वहां दो दिन बाद वैसे ही हालात फिर से हो जाते हैं। फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेक्टर 16-17 की आरडब्ल्यूए द्वारा खुद के स्तर पर गायों को कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित किया गया था। उसके बाद सेक्टर 16-17 से काफी गायों को ठेकेदार ने पकड़कर गोशाला पहुंचाया। मगर अब दोबारा से सेक्टर में वही हाल हो गया है।
बड़े नेक्सस की तरह बाधा बन रहे पशुपालक
निगम के कर्मचारियों के अनुसार शहर के पशुपालक बड़े नेक्सस की तरह काम कर रहे हैं। पशुपालक ही शहर को पूरी तरह कैटल फ्री बनाने में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। एक-एक व्यक्ति 50 से 100 गायों को रखे हुए हैं। सुबह दूध निकालने के बाद इन्हें शहर में खुला छोड़ दिया जाता है। शाम होते ही गायों को मोटरसाइकिल पीछे लगाकर घरों की ओर ले जाते हैं। इस तरह दो समय दूध निकालने के बाद गायों को शहर की सड़कों पर छोड़ देते हैं।
कमिश्नर के सामने बैठकर की शिकायत, तो तुरंत भेजा ठेकेदार
नगर निगम के कमिश्नर अशोक कुमार गर्ग से मिलने गए सेक्टर 16-17 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने जब उनके सामने सेक्टर में लावारिस पशुओं की समस्या रखी तो कमिश्नर ने उसी समय ठेकेदार को सेक्टर में भेजा। ठेकेदार ने अपनी टीम के साथ जाकर सेक्टर 16-17 से आठ गायों को पकड़कर उन्हें धांसू गोशाला पहुंचाया।
नगर निगम प्रशासन का ढंढूर के पास गो अभ्यारणय जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। उसका काम अंतिम चरण में हैं। उसके बाद शहर से पकड़े जाने वाली गायों को वहां छोड़ा जाएगा। तब तक जो भी गाय पकड़ी जाती हैं, उन्हें गोशालाओं में भिजवा रहे हैं। गो अभ्यारणय के तैयार होते ही इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे।
- अशोक कुमार गर्ग, कमिश्नर, नगर निगम
जब गायों को पकड़ने जाते हैं, तो उनके मालिक पशुपालक आकर झगड़ा तक करते हैं। इसलिए अब पुलिस सुरक्षा लेकर पशु पकड़ते हैं। 99 रुपये में काम नहीं चलता लेकिन फिर भी जुनून के साथ काम कर रहे हैं। एक दिन में 15 से 20 गायें पकड़ी जाती हैं।
- विकास पूनिया, ठेकेदार।
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हिसार। इसे नगर निगम प्रशासन के लिए बड़ी मुसीबत ही कहा जाएगा कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी शहर की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं की समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। आए दिन लोगों को लावारिस पशु घायल कर रहे हैं, लेकिन निगम के पास इसका कोई ठोस हल तक दिखाई नहीं दे रहा है।
तीन हजार से ज्यादा लावारिस गायें शहर की सड़कों पर खुली घूम रही है। मगर उन्हें पकड़ने के लिए सिर्फ एक ठेकेदार है। पशुओं को पकड़ने में जोखिम होने के कारण यह ठेकेदार भी सुबह से लेकर शाम तक मुश्किल से 15 से 20 गायें ही पकड़ पाता है। ऐसे में निगम प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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एक गाय पकड़ने पर 99 रुपये होते हैं खर्च
नगर निगम प्रशासन एक गाय को पकड़ने के लिए ठेकेदार को 99 रुपये देता है। हालांकि पिछले ठेकेदार को 435 रुपये मिलते थे, उसके बावजूद भी वह खर्चा पूरा नहीं होने की शिकायत करता था। करीब ढाई महीने पहले नगर निगम प्रशासन ने शहर में गायों को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया था। तब दो ठेकेदारों ने एक जैसे ही 99 रुपये के हिसाब से रेट भरे। दोनों को सिविल लाइन व सिटी थाना के हिसाब से एरिया बांटकर दे दिया गया। मगर दस दिन में ही एक ठेकेदार ने टेंडर वापस कर दिया।
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जहां से एक बार गाय पकड़ी, वहां दो दिन बाद वही हालात
इस समय स्थिति ऐसी है कि जहां से ठेकेदार की टीम गायों को पकड़ती है। वहां दो दिन बाद वैसे ही हालात फिर से हो जाते हैं। फरवरी के प्रथम सप्ताह में सेक्टर 16-17 की आरडब्ल्यूए द्वारा खुद के स्तर पर गायों को कम्युनिटी सेंटर में एकत्रित किया गया था। उसके बाद सेक्टर 16-17 से काफी गायों को ठेकेदार ने पकड़कर गोशाला पहुंचाया। मगर अब दोबारा से सेक्टर में वही हाल हो गया है।
बड़े नेक्सस की तरह बाधा बन रहे पशुपालक
निगम के कर्मचारियों के अनुसार शहर के पशुपालक बड़े नेक्सस की तरह काम कर रहे हैं। पशुपालक ही शहर को पूरी तरह कैटल फ्री बनाने में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। एक-एक व्यक्ति 50 से 100 गायों को रखे हुए हैं। सुबह दूध निकालने के बाद इन्हें शहर में खुला छोड़ दिया जाता है। शाम होते ही गायों को मोटरसाइकिल पीछे लगाकर घरों की ओर ले जाते हैं। इस तरह दो समय दूध निकालने के बाद गायों को शहर की सड़कों पर छोड़ देते हैं।
कमिश्नर के सामने बैठकर की शिकायत, तो तुरंत भेजा ठेकेदार
नगर निगम के कमिश्नर अशोक कुमार गर्ग से मिलने गए सेक्टर 16-17 रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने जब उनके सामने सेक्टर में लावारिस पशुओं की समस्या रखी तो कमिश्नर ने उसी समय ठेकेदार को सेक्टर में भेजा। ठेकेदार ने अपनी टीम के साथ जाकर सेक्टर 16-17 से आठ गायों को पकड़कर उन्हें धांसू गोशाला पहुंचाया।
नगर निगम प्रशासन का ढंढूर के पास गो अभ्यारणय जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगा। उसका काम अंतिम चरण में हैं। उसके बाद शहर से पकड़े जाने वाली गायों को वहां छोड़ा जाएगा। तब तक जो भी गाय पकड़ी जाती हैं, उन्हें गोशालाओं में भिजवा रहे हैं। गो अभ्यारणय के तैयार होते ही इस समस्या का स्थायी समाधान करेंगे।
- अशोक कुमार गर्ग, कमिश्नर, नगर निगम
जब गायों को पकड़ने जाते हैं, तो उनके मालिक पशुपालक आकर झगड़ा तक करते हैं। इसलिए अब पुलिस सुरक्षा लेकर पशु पकड़ते हैं। 99 रुपये में काम नहीं चलता लेकिन फिर भी जुनून के साथ काम कर रहे हैं। एक दिन में 15 से 20 गायें पकड़ी जाती हैं।
- विकास पूनिया, ठेकेदार।