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जो कहा, उसे अपने आचरण में ढालना ही सदाचार : स्वामी दिव्यानंद
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रघुनाथ मंदिर में पांच दिवसरीय शिव महापुराण कथा के दौरान शिवलिंग की पूजा करते स्वामी दिव्यानंद
फतेहाबाद। श्री रघुनाथ मंदिर फतेहाबाद में आयोजित पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा में डॉ. स्वामी दिव्यानंद महाराज ने कहा कि कथा सुनना केवल धार्मिक कहानियां या इतिहास सुनना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जीवन शैली में बदलाव लाना और सुनने वाले को भगवान का प्रेमी बनाना है।
स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि सदाचार का अर्थ है जो कहा, वही आचरण में करना। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में कई पढ़े-लिखे लोग कहते हैं पर अपने व्यवहार में मुकर जाते हैं और अपने घटिया व्यवहार को भी प्रमाणित कर लेते हैं। स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि शिवपुराण में ऋषियों ने सदाचारी बनने की कला पूछी, जिसका उत्तर सूत जी ने शिवाराधना करना बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिव पूजा करता है लेकिन मर्यादा और अच्छा आचरण नहीं अपनाता, तो पूजा का कोई अर्थ नहीं रह जाता। श्रद्धा हो, लेकिन पाखंड से मुक्त। आजकल लोग पूजा के नाम पर मिथ्या आचरण का सहारा लेते हैं, जिससे सच्ची श्रद्धा प्रभावित होती है।
स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि शिव अरुणेश्वर महादेव इसीलिए प्रथम प्रकट हुए ताकि पाखंड पर रोक लग सके। उन्होंने बुजुर्गों से भी अनुरोध किया कि वे समय रहते अपने जीवन जीने के ढंग में सुधार करें। इस अवसर पर बुधवार को अरुणेश्वर महादेव का मुख्य यजमान कैलाश बतरा द्वारा परिवार सहित अभिषेक हुआ। पूजा में प्रधान टेकचंद मिढ़ा, योगेश मेहता, सुभाष बतरा, मदन लाल नारंग, बंटी निझारा ने आशीर्वाद लिया।
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स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि सदाचार का अर्थ है जो कहा, वही आचरण में करना। उन्होंने कहा कि आज की जीवनशैली में कई पढ़े-लिखे लोग कहते हैं पर अपने व्यवहार में मुकर जाते हैं और अपने घटिया व्यवहार को भी प्रमाणित कर लेते हैं। स्वामी दिव्यानंद ने कहा कि शिवपुराण में ऋषियों ने सदाचारी बनने की कला पूछी, जिसका उत्तर सूत जी ने शिवाराधना करना बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिव पूजा करता है लेकिन मर्यादा और अच्छा आचरण नहीं अपनाता, तो पूजा का कोई अर्थ नहीं रह जाता। श्रद्धा हो, लेकिन पाखंड से मुक्त। आजकल लोग पूजा के नाम पर मिथ्या आचरण का सहारा लेते हैं, जिससे सच्ची श्रद्धा प्रभावित होती है।
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स्वामी दिव्यानंद ने बताया कि शिव अरुणेश्वर महादेव इसीलिए प्रथम प्रकट हुए ताकि पाखंड पर रोक लग सके। उन्होंने बुजुर्गों से भी अनुरोध किया कि वे समय रहते अपने जीवन जीने के ढंग में सुधार करें। इस अवसर पर बुधवार को अरुणेश्वर महादेव का मुख्य यजमान कैलाश बतरा द्वारा परिवार सहित अभिषेक हुआ। पूजा में प्रधान टेकचंद मिढ़ा, योगेश मेहता, सुभाष बतरा, मदन लाल नारंग, बंटी निझारा ने आशीर्वाद लिया।
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