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Fatehabad News: लालच देकर दो युवकों को रशियन आर्मी में भर्ती कराया....अब यूक्रेन युद्ध में भेज रहे....बचा लीजिए
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फतेहाबाद। स्टडी वीजा पर दो युवक भविष्य बनाने रूस गए थे। युद्ध के हालात में दोनों युवक रूस-यूक्रेन की सीमा में फंस गए हैं और उनकी जिंदगी सांसत में है। एक महिला ने इन युवकों को लालच देकर रशियन आर्मी में भर्ती कराया। अब इन युवकों को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में धकेला जा रहा है। इन युवकों ने परिवार को मोबाइल पर वीडियो कॉल कर कहा कि बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं.. हमें बचा लो। हमारे पास एक-दो दिन बचे हैं। इसके बाद युद्ध में भेज दिया जाएगा। परिवार के सदस्यों ने मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मिलकर मदद की गुहार लगाई है।
गांव कुम्हारिया निवासी अंकित जांगड़ा (23) पुत्र रामप्रसाद और विजय पूनिया (25) पुत्र रोहताश दोनों स्टडी वीजा पर रूस गए थे। दोनों मास्को शहर में ठहरे हुए थे। भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि 12वीं पास उनका छोटा भाई अंकित 15 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। उसने मॉस्को शहर के एमएसएलयू कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया था। दूसरा युवक विजय भी इसी तरह स्टडी वीजा पर गया। विजय एक बार आकर दोबारा डेढ़ महीने ही पहले गया था। रघुवीर ने बताया कि उनके भाई और उनके साथी को सोलीडेव एरिया के जंगल के इलाके में रखा गया है। दोनों युवकों को दो-तीन दिन बाद युद्ध के मैदान में भेजने की तैयारी है।
महिला ने कहा- अंकित और विजय मर गए
रघुवीर ने बताया कि उनके भाई ने कॉल कर बताया कि उन्हें एक महिला ने लालच देकर फंसाया है। उनसे कहा गया कि उन्हें रशियन आर्मी में नौकरी दिलाई जाएगी। 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये मिलेंगे। इसके बाद हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये सैलरी दी जाएगी। 15-15 लोगों के तीन बैच बनाए गए हैं। सबसे पहले बैच में उनका भाई अंकित व गांव का ही विजय भी शामिल हैं। गांव के ही एक युवक ने व्हाट्सअप कॉल से उनके भाई को जॉब दिलाने वाली महिला से बात की। उसने कह दिया कि अंकित और विजय मर गए हैं। उनकी मौत को चार-पांच दिन हो चुके हैं। इसके बाद नंबर ब्लॉक कर दिया।
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अंकित से पहले गया था विजय
रघुवीर ने बताया कि विजय पहले जुलाई 2024 में रूस गया था। वहां से मार्च 2025 में लौट आया। इसके बाद पांच महीने गांव में रहने के बाद डेढ़ महीने पहले फिर से चला गया।
परिवार को डर-जीरो लाइन पर न भेज दें, आधे-आधे घंटे बाद कर रहे कॉल
रघुबीर का कहना है कि आधे-आधे घंटे बाद कॉल कर बात की जा रही है। चिंता के कारण परिवार ने खाना नहीं खाया है। सीएम से मिल चुके हैं। बुधवार को परिजन ग्रामीणों के साथ एडीसी अनुराग ढालिया से मिलकर मदद की गुहार लगाई। एडीसी ने कहा कि सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। अब उन्हें डर सता रहा है कि कहीं जीरो लाइन पर न भेज दें। भाई को पांच लाख रुपये खर्च कर स्टडी वीजा पर भेजा था।
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गांव कुम्हारिया निवासी अंकित जांगड़ा (23) पुत्र रामप्रसाद और विजय पूनिया (25) पुत्र रोहताश दोनों स्टडी वीजा पर रूस गए थे। दोनों मास्को शहर में ठहरे हुए थे। भाई रघुवीर जांगड़ा ने बताया कि 12वीं पास उनका छोटा भाई अंकित 15 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था। उसने मॉस्को शहर के एमएसएलयू कॉलेज में लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया था। दूसरा युवक विजय भी इसी तरह स्टडी वीजा पर गया। विजय एक बार आकर दोबारा डेढ़ महीने ही पहले गया था। रघुवीर ने बताया कि उनके भाई और उनके साथी को सोलीडेव एरिया के जंगल के इलाके में रखा गया है। दोनों युवकों को दो-तीन दिन बाद युद्ध के मैदान में भेजने की तैयारी है।
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महिला ने कहा- अंकित और विजय मर गए
रघुवीर ने बताया कि उनके भाई ने कॉल कर बताया कि उन्हें एक महिला ने लालच देकर फंसाया है। उनसे कहा गया कि उन्हें रशियन आर्मी में नौकरी दिलाई जाएगी। 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 20 लाख रुपये मिलेंगे। इसके बाद हर महीने डेढ़ से दो लाख रुपये सैलरी दी जाएगी। 15-15 लोगों के तीन बैच बनाए गए हैं। सबसे पहले बैच में उनका भाई अंकित व गांव का ही विजय भी शामिल हैं। गांव के ही एक युवक ने व्हाट्सअप कॉल से उनके भाई को जॉब दिलाने वाली महिला से बात की। उसने कह दिया कि अंकित और विजय मर गए हैं। उनकी मौत को चार-पांच दिन हो चुके हैं। इसके बाद नंबर ब्लॉक कर दिया।
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अंकित से पहले गया था विजय
रघुवीर ने बताया कि विजय पहले जुलाई 2024 में रूस गया था। वहां से मार्च 2025 में लौट आया। इसके बाद पांच महीने गांव में रहने के बाद डेढ़ महीने पहले फिर से चला गया।
परिवार को डर-जीरो लाइन पर न भेज दें, आधे-आधे घंटे बाद कर रहे कॉल
रघुबीर का कहना है कि आधे-आधे घंटे बाद कॉल कर बात की जा रही है। चिंता के कारण परिवार ने खाना नहीं खाया है। सीएम से मिल चुके हैं। बुधवार को परिजन ग्रामीणों के साथ एडीसी अनुराग ढालिया से मिलकर मदद की गुहार लगाई। एडीसी ने कहा कि सरकार को रिपोर्ट भेज दी है। अब उन्हें डर सता रहा है कि कहीं जीरो लाइन पर न भेज दें। भाई को पांच लाख रुपये खर्च कर स्टडी वीजा पर भेजा था।