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Fatehabad News: शर्तों में उलझा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का टेंडर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 11:19 PM IST
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Tender for sterilization and vaccination of dogs entangled in conditions
नगर परिषद परिसर में पिंजरे में रखे गए फतेहाबाद शहर से  पकड़े गए बंदर।
फतेहाबाद। शहर में घूम रहे कुत्तों को पकड़कर उनके नसबंदी करने और टीकाकरण का टेंडर शर्तों में उलझकर रह गया है। इस टेंडर को लेकर एक ही एजेंसी आई थी और आचार संहिता लगने से पहले आनन-फानन में नगर परिषद अधिकारी एजेंसी को वर्क ऑर्डर देने की तैयारी में थे लेकिन एजेंसी शर्तें पूरी नहीं कर पाई। यहां तक कि नगर परिषद ने एजेंसी से रेट भी कम करवा लिया था। एजेंसी ने आखिर में 1190 रुपये प्रति कुत्ते का रेट मांगा लेकिन अब ये टेंडर ठंडे बस्ते में चला गया है और इसे रद्द करने की तैयारी है।
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बताया जा रहा है कि कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाना है लेकिन एजेंसी नियम अनुसार कुत्तों को तीन दिन तक निगरानी में रखने और उपचार की व्यवस्था को लेकर शर्तें पूरी नहीं कर पा रही थी। जबकि ये गंभीर शर्तें हैं और अधिकारी इन्हें अनदेखा भी नहीं कर सकते थे। ऐसे में एजेंसी को वर्क ऑर्डर नहीं दिया गया। शहर में कुत्तों के आतंक को देखते हुए नगर परिषद ने करीब चार माह पहले प्रस्ताव तैयार किया था। जो प्रस्ताव तैयार किया गया उसमें एजेंसी के लिए 36 शर्तें लगाई गई। जिसमें मुख्य तौर पर एजेंसी को खुद वेटरनरी सर्जन रखना होगा। शहर में एक साल के अंदर इस प्रोजेक्ट को पूरा करना होगा। पहले एक क्षेत्र से कुत्तों को पकड़ा जाएगा और उनके ऑपरेशन होने और क्वारंटीन पीरियड पूरा होने के बाद वापस उसी जगह पर छोड़ा जाएगा। कुत्तों के नसबंदी और टीकाकरण के बाद टैगिंग भी करनी होगी।
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नगर परिषद ने एजेंसी पर ये लगाई है मुख्य शर्तें
- ठेकेदार को वर्क आर्डर मिलने के एक सप्ताह के अंदर ही टेंडर में दी गई नियम व शर्तों के अनुरूप नगर परिषद फतेहाबाद से इकरारनामा करना होगा।
- ठेके की अवधि एक वर्ष की होगी, वेटरनरी डॉक्टर का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
- ठेकेदार जिन कर्मचारियों को रखेगा, उन्हें कुत्ते पकड़ने का पूर्व में अनुभव होना चाहिए।
- पकड़ने के साधन, एंटी रैबीज दवाई, कुत्ते की खुराक, कुत्ते के बीमार होने पर इलाज के समय प्रयोग में लाई जाने वाली दवाई इत्यादि का प्रबंध ठेकेदार स्वयं अपने स्तर पर करेगा।
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- कुत्तों को रखने का स्थान, पानी, बिजली, ऑपरेशन थियेटर के लिए कमरा, पंखा, दवाई रखने के लिए फ्रिज, सामान रखने के लिए अलमारी व फर्नीचर इत्यादि का प्रबंध ठेकेदार अपने स्तर पर करेगा।
कुत्तों को पकड़ने समय कोई निर्दयता नहीं बरती जानी चाहिए। वर्ष 2001 व 2023 में दी गई हिदायतों की अनुपालना करनी होगी जिनकी उल्लंघन के लिए ठेकेदार खुद जिम्मेदार होगा।
- ठेकेदार द्वारा जिस क्षेत्र से नर व मादा कुत्तों को पकड़ने जाएगा, उनका इन्द्राज रजिस्टर में करना।
ऑपरेशन उपरांत कुत्तों को पकड़े गए स्थान पर वापस छोड़ना होगा। स्थान की पहचान के लिए कुत्ते के गले में उस क्षेत्र के नाम का टैग लगाना होगा।
- ठेकेदार के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए खुद का वाहन होना चाहिए तथा वाहन के आगे नगर परिषद का बैनर लगा होना चाहिए।
- ठेकेदार के बिल की अदायगी पशुपालन विभाग के डॉक्टर व इस कार्य हेतु गठित की गई कमेटी के द्वारा सत्यापन उपरांत की जाएगी।
- कुत्तों को पकड़ने के लिए एजेंसी चिमटे और तारों का प्रयोग नहीं करेगी।
- नसबंदी हेतु शल्यक्रिया से ठीक होने के उपरांत कुत्तों को कम से कम 4 दिन के लिए चयनित जगह पर रखा जाएगा।
शहर में रोजाना 10 से 15 लोग हो रहे शिकार
शहर में कुत्तों के काटने के मामले रोजाना बढ़ रहे है। रोजाना नागरिक अस्पताल में 10 से 15 लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। अहम बात यह है कि मॉडल टाउन क्षेत्र में ही सबसे ज्यादा कुत्तों का आतंक हैं।
शहर में डेढ़ हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते, रजिस्ट्रेशन एक भी नहीं
नगर निकाय ने पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन को लेकर भी निर्देश दे रखे हैं। लेकिन पिछले दो साल में एक भी कुत्ते का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। जबकि शहर में डेढ़ हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते हैं। यहां तक नगर परिषद द्वारा भी पालतू कुत्तों के मालिकों को नोटिस जारी नहीं किया गया है। नगर परिषद द्वारा वर्ष 2023-24 के बजट में 1 लाख रुपये का बजट रखा गया था लेकिन कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। अब वर्ष 2024-25 में रजिस्ट्रेशन आय को घटाकर 50 हजार रुपये रखा गया है।
सबसे ज्यादा नोच रहे पालतू कुत्ते
केस एक : शहर के ग्रीन पार्क कॉलोनी में करीब 15 दिन पहले पालतू कुत्ते ने गुरुग्राम निवासी 10 वर्षीय बच्चे को नोच लिया था। बच्चे के गंभीर चोटें आई। इस मामले में कुत्ते के मालिक के खिलाफ शहर थाना में मामला भी दर्ज हो चुका है।
केस दो : गांव मुस्सेअहली में भी पिछले साल नवंबर माह में मामला आया था। जब पालतू कुत्ते डेढ़ साल की बच्ची को उठाकर ले गए थे और बुरी तरह से नोचा था। इस मामले में भी बच्ची के पिता चांदी की शिकायत पर कुत्तों के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था।
बंदरों को पकड़ने का अभियान शुरू
शहर में बंदरों को पकडऩे का मथुरा से आई टीम ने अभियान शुरू कर दिया है। एजेंसी बंदरों को पकड़कर पिंजरे में नगर परिषद परिसर में ही रख रही है। इन बंदरों को फिरोजपुर झिरका के जंगलों में छोड़ा जाएगा।

कोट
शहर को पशु मुक्त किया जाएगा। बंदर और बेसहारा पशुओं को पकड़ा जा रहा है। नियम अनुसार ही कुत्तों को पकड़ा जाना है और उनका टीकाकरण व नसबंदी होनी है। जो शर्तें हैं उनके भी पूरा होना भी जरूरी है। अधिकारियों से इस टेंडर के स्टेटस के बारे में जानकारी ली जाएगी।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान नगर परिषद
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