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धान के तीन लाख रकबे पर सिर्फ 190 बेलर
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फतेहाबाद के गांव दिगोह में पराली की गांठे बनवाते किसान।
- फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। धान कटाई के पीक सीजन में प्रशासन किसानों को समय पर बेलर मुहैया नहीं करवा पाया। तीन लाख 24 हजार एकड़ धान के रकबे के लिए प्रशासन के पास मात्र 190 बेलर ही उपलब्ध हैं। जिसका नतीजा यह रहा है कि गेहूं बिजाई के चक्कर में किसान धड़ाधड़ अपने खेतों में पराली को जलाने में जुटे हैं और पराली जलाने के मामले में जिला पूरे प्रदेश में दूसरे नंबर पर आ गया है। जिले में अब तक 502 स्थानों पर पराली जलाई जा चुकी है। पराली जलने की घटनाओं के कारण वीरवार पूरे दिन आसमान में स्मॉग छाए रहने से एक्यूआई का अधिकतम स्तर 475 तक पहुंच गया तो वहीं औसत 316 रहा।
फतेहाबाद जिले में इस बार तीन लाख 24 हजार एकड़ पर धान की बिजाई हुई थी। धान की कटाई का समय आया तो 24 सितंबर को हुई भारी बारिश के कारण किसानों के खेत पानी से भर गए और पानी निकलने के बाद किसानों ने एकदम से पराली की कटाई पर जोर दे दिया। इस बार लेबर कम आने के कारण किसानों ने कंबाइन से धान की कटाई करवाई और जल्द धान निकलने के बाद किसान गेहूं की बिजाई की तैयारियां करने लगे। पिछले एक सप्ताह से धान की कटाई का पीक समय चल रहा है, लेकिन प्रशासन के पास इतने बेलर नहीं हैं कि हर किसान तक पहुंचाया जा सके। संवाद
सीजन के दौरान एक हजार से 1200 बेलर होने चाहिए उपलब्ध
तीन लाख 24 हजार एकड़ धान के रकबे के लिए प्रशासन के पास मात्र 190 बेलर ही उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशासन के पास अधिकतर छोटे बेलर उपलब्ध हैं। इन बेलरों के माध्यम से एक दिन में मात्र 20 एकड़ को कवर किया जा सकता है और बड़ी बेलर मशीन के माध्यम से 40 एकड़ ही जमीन कवर की जा सकती है। ऐसे में इस सीजन में एक लाख से सवा लाख एकड़ जमीन को ही कवर किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को धान के सीजन में एक हजार से 1200 बेलर मशीन उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, ताकि वह जल्द से जल्द पराली प्रबंधन कर सकें। जिला में अब तक मात्र 70 हजार एकड़ जमीन पर ही पराली प्रबंधन हो पाया है। पर्याप्त मात्रा में बेलर न मिलने के कारण कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
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वीरवार को 48 जगहों पर जली पराली
हरसेक ने जिले में वीरवार को 48 जगहों की फायर लोकेशन कृषि विभाग को भेजी है। जिले में एक्यूआई का अधिकतम स्तर पर 475 अंकित किया गया, वहीं औसत एक्यूआई 316 दर्ज किया गया है। अब तक जिले में 502 स्थानों पर फायर लोकेशन मिल चुकी है। जबकि पिछले साल तीन नवंबर तक मात्र 90 स्थानों पर फायर लोकेशन मिली थी और तीन नवंबर को एक्यूआई भी मात्र 149 था।
कोट
सरकार पराली प्रबंधन को लेकर वायदे तो अनेक करती है, लेकिन धरातल पर काम कुछ हो रहा है। सरकार के पास किसानों को उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त संख्या में बेलर मशीन भी नहीं है। अब गेहूं बिजाई का समय चल रहा है और मजबूरन किसानों को पराली जलानी पड़ रही है।
-मनदीप नथवान, संयोजक पकड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति।
कोट
जिले में अब तक 70 हजार एकड़ जमीन पर पराली प्रबंधन करके गांठें बनाई गई हैं। किसानों को जहां भी बेलर मशीनों की आवश्यकता होती है, वहां बेलर मशीन उपलब्ध करवाई जा रही है। पराली प्रबंधन को लेकर पोर्टल पर 31 दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है, ताकि किसानों को पराली प्रबंधन पर एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा सके।
-पवन कुमार, सहायक कृषि अधिकारी, फतेहाबाद।
कोट
पराली जलाने के कारण उठने वाले धुुएं से आंखों में जलन, सूखापन, खारिश आना, पानी आना तथा दृष्टि में धुंधलापन की शिकायतें आती हैं। इसके अलावा सांस लेने मेें तकलीफ, खांसी व बेहोशी आने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। इसलिए जितना हो सके घर में ही रहें और बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा पहनें तथा मुंह ढककर चलें। बार-बार आंखों में पानी छींटे मारते रहें।
-डॉ. विनोद शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ।
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फतेहाबाद जिले में इस बार तीन लाख 24 हजार एकड़ पर धान की बिजाई हुई थी। धान की कटाई का समय आया तो 24 सितंबर को हुई भारी बारिश के कारण किसानों के खेत पानी से भर गए और पानी निकलने के बाद किसानों ने एकदम से पराली की कटाई पर जोर दे दिया। इस बार लेबर कम आने के कारण किसानों ने कंबाइन से धान की कटाई करवाई और जल्द धान निकलने के बाद किसान गेहूं की बिजाई की तैयारियां करने लगे। पिछले एक सप्ताह से धान की कटाई का पीक समय चल रहा है, लेकिन प्रशासन के पास इतने बेलर नहीं हैं कि हर किसान तक पहुंचाया जा सके। संवाद
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सीजन के दौरान एक हजार से 1200 बेलर होने चाहिए उपलब्ध
तीन लाख 24 हजार एकड़ धान के रकबे के लिए प्रशासन के पास मात्र 190 बेलर ही उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रशासन के पास अधिकतर छोटे बेलर उपलब्ध हैं। इन बेलरों के माध्यम से एक दिन में मात्र 20 एकड़ को कवर किया जा सकता है और बड़ी बेलर मशीन के माध्यम से 40 एकड़ ही जमीन कवर की जा सकती है। ऐसे में इस सीजन में एक लाख से सवा लाख एकड़ जमीन को ही कवर किया जा सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को धान के सीजन में एक हजार से 1200 बेलर मशीन उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, ताकि वह जल्द से जल्द पराली प्रबंधन कर सकें। जिला में अब तक मात्र 70 हजार एकड़ जमीन पर ही पराली प्रबंधन हो पाया है। पर्याप्त मात्रा में बेलर न मिलने के कारण कृषि विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
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वीरवार को 48 जगहों पर जली पराली
हरसेक ने जिले में वीरवार को 48 जगहों की फायर लोकेशन कृषि विभाग को भेजी है। जिले में एक्यूआई का अधिकतम स्तर पर 475 अंकित किया गया, वहीं औसत एक्यूआई 316 दर्ज किया गया है। अब तक जिले में 502 स्थानों पर फायर लोकेशन मिल चुकी है। जबकि पिछले साल तीन नवंबर तक मात्र 90 स्थानों पर फायर लोकेशन मिली थी और तीन नवंबर को एक्यूआई भी मात्र 149 था।
कोट
सरकार पराली प्रबंधन को लेकर वायदे तो अनेक करती है, लेकिन धरातल पर काम कुछ हो रहा है। सरकार के पास किसानों को उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त संख्या में बेलर मशीन भी नहीं है। अब गेहूं बिजाई का समय चल रहा है और मजबूरन किसानों को पराली जलानी पड़ रही है।
-मनदीप नथवान, संयोजक पकड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति।
कोट
जिले में अब तक 70 हजार एकड़ जमीन पर पराली प्रबंधन करके गांठें बनाई गई हैं। किसानों को जहां भी बेलर मशीनों की आवश्यकता होती है, वहां बेलर मशीन उपलब्ध करवाई जा रही है। पराली प्रबंधन को लेकर पोर्टल पर 31 दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है, ताकि किसानों को पराली प्रबंधन पर एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा सके।
-पवन कुमार, सहायक कृषि अधिकारी, फतेहाबाद।
कोट
पराली जलाने के कारण उठने वाले धुुएं से आंखों में जलन, सूखापन, खारिश आना, पानी आना तथा दृष्टि में धुंधलापन की शिकायतें आती हैं। इसके अलावा सांस लेने मेें तकलीफ, खांसी व बेहोशी आने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। इसलिए जितना हो सके घर में ही रहें और बाहर निकलते समय आंखों पर चश्मा पहनें तथा मुंह ढककर चलें। बार-बार आंखों में पानी छींटे मारते रहें।
-डॉ. विनोद शर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ।

फतेहाबाद के गांव भोडियाखेड़ा के पास स्मॉग में छिपे सूर्यदेव।- फोटो : Fatehabad