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बैंकों पर ताले, जिले में 350 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 16 Dec 2021 11:30 PM IST
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Locks on banks, 350 crore transactions affected in the district
एसबीआई मेन ब्रांच के बाहर विरोध प्रदर्शन करते बैंक अधिकारी व कर्मचारी। - फोटो : Fatehabad
फतेहाबाद। निजीकरण के विरोध में सरकारी बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी वीरवार को कुर्सी छोड़कर सड़क पर उतरे। जिले में दस बैंकों के 950 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के हड़ताल पर होने के कारण करीब 350 करोड़ रुपये का लेनदेन ठप रहा। धान कारोबारियों से लेकर अनाज मंडी के आढ़तियों के चेक क्लीयर नहीं हो पाए। शुक्रवार को भी हड़ताल होने से दो दिन तक चेक क्लीयर नहीं हो पाएंगे। वहीं, कुछ सरकारी विभागों से रोजाना जमा होने वाला कैश भी दो दिन तक बैंकों में नहीं पहुंच पाएगा।
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यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन के बैनर तले शहर की सभी शाखाओं के अधिकारी व कर्मचारी स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के बाहर एकजुट हुए और सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए जमकर नारेबाजी की। बैंक कर्मचारियों ने शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से रोष मार्च भी निकाला। कर्मचारी नेता नरेंद्र लांबा, जगदीश मोंगा व मनीष बेनीवाल ने बताया कि सरकारी बैंकों का निजीकरण कर आम जनता के हितों का गला घोटने पर तुली हुई है। यदि बैंकों का निजीकरण होगा तो सबसे ज्यादा नुकसान गरीब तबके की जनता को होगा। जो जनता सरकारी बैंकों से लाभ उठा पा रही है, वह लाभ उन्हें नहीं मिल पाएगा। देश की लगभग 70-80 प्रतिशत जनता सरकारी बैंकों में अपना खाता खुलवाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हड़ताल के बाद भी यदि सरकार नहीं मानी तो राष्ट्रव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल घोषित कर बैंक कर्मचारी सड़कों पर उतरेंगे। इस मौके पर एसबीआई से पूनम, ऊषा, संदीप जांगड़ा, मोहित, महावीर, कुलदीप ढाका, रवि, जगदीप सिंह, अनिल भिरडाना, जोगिंद्र भट्टू, पीएनबी से सुमन रानी, दीप कुमार नागपुर, कंवर सिंह सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे।
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जिले में 120 शाखाओं में कामकाज रहा बंद
हड़ताल के चलते पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कैनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, पंजाब एवं सिंध बैंक सहित दस प्रमुख बैंकों की जिले की 120 शाखाओं में कामकाज बंद रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को हड़ताल की पहले से जानकारी नहीं होने के कारण कुछ उपभोक्ता अपने कार्यों के लिए बैंक तक पहुंचे। मगर हड़ताल के कारण उन्हें वापस जाना पड़ा।
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रोडवेज की रिसीट का पैसा नहीं हो सका जमा
रोडवेज की ओर से हर रोज बैंक में रिसीट का पैसा जमा करवाया जाता है। फतेहाबाद डिपो की एक दिन की आमदनी 10 लाख रुपये से अधिक है। ऐसे में दो दिन में अकेले रोडवेज विभाग का ही 20 लाख रुपये बैंक में जमा नहीं हो पाएगा। इसी तरह ट्रेजरी के कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
निजीकरण के यह गिनवाए नुकसान
- प्राइवेट बैंकों में न्यूनतम राशि पांच हजार रुपये रखनी होती है जबकि सरकारी बैंक में जीरो बैलेंस पर खाता खुल जाता है।
- पेंशन धारकों को प्राइवेट बैंकों में खाता खुलवाने के लिए दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी।
- सरकारी रोजगार के अवसर खत्म हो जाएंगे।
जिले में दस बैंकों की 120 शाखाओं के करीब 950 अधिकारी व कर्मचारी हड़ताल पर रहे हैं। एक दिन में जिले में करीब 350 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। हम निजीकरण के खिलाफ हड़ताल पर हैं, शुक्रवार को भी बैंकों में काम नहीं होगा।
जगदीश मोंगा, महासचिव, बैंक यूनियन
टोहाना में 30 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
टोहाना। टोहाना में वीरवार को सभी सरकारी बैंकों के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने रेलवे रोड स्थित पीएनबी बैंक के सामने धरना दिया और निजीकरण का विरोध जताया। हड़ताल के चलते शहर में 30 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन प्रभावित हुआ।

बैंक कर्मचारी नरेश कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार सरकारी बैंकों का तेजी के साथ निजीकरण कर रही है। सरकारी बैंक हर साल केंद्र सरकार को करोड़ों रुपये का लाभांश देते हैं, फिर भी मौजूदा सरकार बैंकों का निजीकरण कर रही है। इस दौरान बैंक कर्मचारी वाईपी गर्ग, राजीव नरूला, विकास लांबा, रमेश, सुमन, रजनी, पुष्पा, सरोज, संजीव कुमार सहित कई कर्मचारी मौजूद रहे। संवाद

अधिकारियों की हड़ताल के चलते खाली नजर आ रहा फतेहाबाद स्थित एसबीआई।

अधिकारियों की हड़ताल के चलते खाली नजर आ रहा फतेहाबाद स्थित एसबीआई।- फोटो : Fatehabad

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