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Fatehabad News: पराली जलाने के बजाय आय, रोजगार और पर्यावरण के प्रहरी बने मेजर सिंह
Thu, 06 Nov 2025 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 06 Nov 2025 11:22 PM IST
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फतेहाबाद। अपने खेत में पराली प्रबंधन के कार्य के साथ ढाणी मसीतावाली के किसान मेजर सिंह। सूचना
फतेहाबाद। गांव ढाणी मसीतावाली के किसान मेजर सिंह (68) ने हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की नई मिसाल कायम की है। जहां अधिकतर किसान धान की पराली को जलाकर खेत खाली करते हैं, वहीं मेजर सिंह ने इसे कमाई, रोजगार और पर्यावरण सुरक्षा का साधन बना लिया है।
मेजर सिंह अपनी दो स्ट्रॉ बेलर मशीनों की मदद से हर वर्ष लगभग 2000 एकड़ क्षेत्र से धान की पराली के गांठ (बेल्स) तैयार करते हैं। वे सालाना करीब 50,000 क्विंटल पैडी स्ट्रॉ बेल्स बनाकर बायोमास ईंधन संयंत्रों, डेयरियों और विभिन्न उद्योगों को सप्लाई करते हैं। इस प्रक्रिया से वायु प्रदूषण में कमी आई है और 30 से 40 स्थानीय मजदूरों को पूरे वर्ष रोजगार मिल रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 68 वर्ष की आयु में मेजर सिंह यह साबित कर रहे हैं कि सही सोच और नीयत के साथ खेती में रोजगार, नवाचार और पर्यावरण सुरक्षा तीनों को एक साथ चलाया जा सकता है। उनकी पहल ने न केवल गांव की आर्थिक स्थिति को सशक्त किया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।
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मेजर सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि पराली को जलाने के बजाय इसे विकास और पर्यावरण सुरक्षा का साधन बनाया जा सकता है। उनका प्रयास दिखाता है कि कृषि में नवाचार और समाजहित को जोड़कर स्थायी विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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मेजर सिंह अपनी दो स्ट्रॉ बेलर मशीनों की मदद से हर वर्ष लगभग 2000 एकड़ क्षेत्र से धान की पराली के गांठ (बेल्स) तैयार करते हैं। वे सालाना करीब 50,000 क्विंटल पैडी स्ट्रॉ बेल्स बनाकर बायोमास ईंधन संयंत्रों, डेयरियों और विभिन्न उद्योगों को सप्लाई करते हैं। इस प्रक्रिया से वायु प्रदूषण में कमी आई है और 30 से 40 स्थानीय मजदूरों को पूरे वर्ष रोजगार मिल रहा है।
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कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 68 वर्ष की आयु में मेजर सिंह यह साबित कर रहे हैं कि सही सोच और नीयत के साथ खेती में रोजगार, नवाचार और पर्यावरण सुरक्षा तीनों को एक साथ चलाया जा सकता है। उनकी पहल ने न केवल गांव की आर्थिक स्थिति को सशक्त किया है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है।
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मेजर सिंह की कहानी यह संदेश देती है कि पराली को जलाने के बजाय इसे विकास और पर्यावरण सुरक्षा का साधन बनाया जा सकता है। उनका प्रयास दिखाता है कि कृषि में नवाचार और समाजहित को जोड़कर स्थायी विकास को बढ़ावा दिया जा सकता है।