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एसडीएम कार्यालय में एक दशक से चल रहा आरसी बनाने में फर्जीवाड़ा

Wed, 07 Apr 2021 11:16 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:16 PM IST
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Fraud in making RC running for a decade in SDM office
2009 में बनी आरसी, जिसमें गांव का नाम रामगढ़ दिया हुआ है। - फोटो : Fatehabad
वाहनों के रजिस्ट्रेशन में हुए फर्जीवाड़े के मामले में बेशक एफआईआर में पुलिस ने चंद मामलों का जिक्र किया हो, लेकिन यह फर्जीवाड़ा एक दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। खुद मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के अधिकारियों ने भी माना है कि इस फर्जीवाड़े की गहनता से जांच की गई तो सैकड़ों मामले सामने आएंगे। मीडिया व सोशल मीडिया पर वर्ष 2009 और 2011 में बनी कुछ फर्जी आरसी भी सामने आई हैं, जिसके बाद एसडीएम कार्यालय में चले इस फर्जीवाड़े ने अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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गौरतलब है कि मुख्यमंत्री उड़नदस्ते के हिसार स्थित डीएसपी कार्यालय के एसआई राजेश कुमार की शिकायत पर एक दिन पहले ही फतेहाबाद शहर थाना में तीन पूर्व एसडीएम सतबीर जांगू, सुरजीत नैन व संजय बिश्नोई, दो क्लर्कों ओमप्रकाश सिहाग व राजेश खटक सहित आठ लोगों पर केस दर्ज किया गया है। अधिकारियों व कर्मचारियों पर केस दर्ज होने के बाद आरसी की कुछ प्रतियां सोशल मीडिया में वायरल हो गई हैं। एक आरसी 23 मार्च 2009 को जारी हुई है, इसमें वाहन मालिक का पता रामगढ़ जिला संगरूर लिखा हुआ है। संगरूर पंजाब में है। इसलिए साथ में हाल निवासी टोहाना लिखा गया है। इसी तरह एक आरसी 2013 में बनी है। इसमें गांव रपानागनीजा लिखा हुआ है, लेकिन फतेहाबाद में ऐसा गांव ही नहीं है। 9 सितंबर 2011 को जारी एक आरसी में अकबरपुरा बिहार का पता है। यानी फर्जीवाड़ा दस साल से भी अधिक समय से चल रहा है।
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टाइपिस्टों के साथ ऐसे चलता है नेटवर्क
वाहन रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदक सबसे पहले टाइपिस्टों से मिलते हैं। टाइपिस्ट से पूछता है कि आरसी बनवानी है, लेकिन मैं पंजाब का रहने वाला हूं। टाइपिस्ट अंदर कर्मचारी से मिलता है। कर्मचारी अंदर जाकर अफसर से बात करता है। फिर बाहर आकर कहता है कि काम हो जाएगा, लेकिन रुपये लगेंगे। आवेदक समय की बर्बादी और परेशानी से बचना चाहता है। इसलिए वह खर्चा देने को राजी हो जाता है। फिर कर्मचारी ही तरकीब बताते हैं कि कागजों में अपना पता कैसे बदलना है।
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वाहन की क्षमता से तय होते हैं रेट
एसडीएम कार्यालय में बाइक, जीप, कार जैसे वाहनों का पंजीकरण होता है। इसलिए वाहनों की क्षमता व कीमत के हिसाब से ही पंजीकरण की रिश्वत तय होती है। बाइक जैसे छोटे वाहनों के पंजीकरण के लिए 2 से 3 हजार रुपये व गाड़ियों के 10 से 20 हजार तक रुपये ले लिए जाते हैं। बताया जाता है कि इसमें टाइपिस्ट से लेकर कर्मचारी व अधिकारी तक सबका कमीशन होता है।
रोजाना आते हैं वाहन पंजीकरण के 20 से 25 आवेदन
फतेहाबाद में वाहन पंजीकरण के लिए रोजाना 20 से 25 आवेदन आते हैं। दीपावली व नववर्ष पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है, क्योंकि उस समय लोग नए वाहन खरीदते हैं। कर्मचारी बताते हैं कि 10 से 15 फीसदी लोगों के पास स्थानीय रिहायश संबंधी प्रमाण पत्र नहीं होते, क्योंकि यहां पर यूपी व बिहार के मजदूर रह रहे हैं। काफी लोग कामकाज के सिलसिले में आते हैं और यहीं आकर रहने लगते हैं। वे लोग वाहन पंजीकरण के लिए रिश्वत देने को तैयार हो जाते हैं। उनको इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह काम फर्जी है, बस उन्हें आरसी मिलनी चाहिए।
कोट ---
वाहन पंजीकरण मामले में फिलहाल किसी तरह का फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। मेरे समय में हर काम पूरी पड़ताल के साथ हो रहा है। यदि कोई फतेहाबाद का स्थायी निवासी है तो उसी का पंजीकरण होगा। इस मामले में पूरी सख्ती बरती जा रही है। एक-एक दस्तावेज अच्छी तरह चेक किया जा रहा है।

- कुलभूषण बंसल, एसडीएम।

2011 में बनी आरसी, जिसमें बिहार के गांव अकबरपुर का पता दिया हुआ है।

2011 में बनी आरसी, जिसमें बिहार के गांव अकबरपुर का पता दिया हुआ है।- फोटो : Fatehabad

2013 में बनी आरसी, जिसमें गांव का पता रपानागनीजा दिया हुआ है।

2013 में बनी आरसी, जिसमें गांव का पता रपानागनीजा दिया हुआ है।- फोटो : Fatehabad

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