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सरपंच बनने के लिए दिया बहन का शैक्षणिक प्रमाण पत्र, अब चौधर पर तलवार
सुरेंद्र असीजा/फतेहाबाद
Updated Mon, 08 Aug 2016 12:45 AM IST
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panchayat
- फोटो : Bureau
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प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता की शर्त अनिवार्य क्या की, चौधराहट हासिल करने के लिए सरपंच पद के दावेदारों ने जिले के अफसरों की आंखों पर पट्टी चढ़ाने के लिए किसी हद को नहीं छोड़ा। जिले के भानीखेड़ा गांव के सरपंच ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी बहन का ही शैक्षणिक प्रमाण पत्र दे डाला। अब विरोधियों ने शिकायत दर्ज करवा दी। जांच में मामला सही निकला, अब डीसी के नोटिस के बाद सरपंच पद पर बर्खास्तगी की तलवार लटक रही है। पंचायत चुनाव लड़ने के लिए फर्जीवाड़ा किए जाने के अब तक कुल 14 मामले जिला प्रशासन के सामने आ चुके हैं।
चार को डीसी का नोटिस, एक के खिलाफ शिकायत निकली झूठी
जिले के इन 14 में से 4 सरपंचों को डीसी एनके सोलंकी की ओर से निजी सुनवाई के लिए नोटिस जारी हो चुका है। अगर ये सरपंच डीसी के सामने निजी सुनवाई में अपने पक्ष में कोई ठोस दलील नहीं दे पाए तो इनकी बर्खास्तगी तय है। डीडीपीओ की जांच में इन चारों सरपंचों के खिलाफ जांच में शैक्षणिक योग्यता में धोखाधड़ी होना पाया गया है। इसके अलावा 10 अन्य सरपंचों की जांच में एक गांव कमाना के सरपंच के खिलाफ शिकायत झूठी पाई गई है। जिल विकास एवं पंचायत विभाग के सूत्रों की मानें तो बाकी नौ सरपंचों के खिलाफ डीडीपीओ राजेश खोथ की जांच पूरी हो चुकी है। डीसी एनके सोलंकी के भाई के निधन के कारण डीसी के अवकाश पर जाने से इस मामले में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि डीसी के वापस आते ही जल्द ही बाकी नौ सरपंचों को भी नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों का तो ये भी कहना है कि डीडीपीओ की जांच में इन नौ सरपंचों के खिलाफ शिकायत भी सही पाई गई है। ऐसे में इन सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई किसी भी समय हो सकती है।
सबसे ज्यादा रतिया ब्लॉक के सरपंचों पर आरोप
सरपंच पद के चुनाव में धोखाधड़ी के मामले में सबसे अधिक आरोप रतिया ब्लॉक के सरपंचों पर लगे हैं। रतिया ब्लॉक के कुल पांच गांवों पिलछियां, भानीखेड़ा, कमाना, बादलगढ़ व रतिया के सरपंचों पर चुनाव में फर्जी प्रमाणपत्र पेश करने का आरोप है। फतेहाबाद खंड के चार गांवों बनगांव, ढाणी ईसर, नखाटिया और भिरडाना के सरपंचों के खिलाफ जांच जारी है। टोहाना खंड के दो गांव धारसूल खुर्द व समैण गांव के सरपंचों पर फर्जी डिग्री दिखाने का आरोप है। जाखल में रूपावाली, भूना में नहला व बैजलपुर गांव के सरपंचों के खिलाफ फर्जी कागजात जमा करवाने का आरोप है। भट्टू ब्लॉक के किसी सरपंच पर अभी तक कोई आरोप नहीं है।
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ये होती है प्रक्रिया
जिले के किसी भी सरपंच के खिलाफ शैक्षणिक योग्यता बाबत कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी यानी डीडीपीओ को सौंपी जाती है। डीडीपीओ आरोपी सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी कर उसे जांच के लिए बुलाते हैं। जरूरत होने पर मौके पर जाकर भी जांच की जाती है। अगर शिकायत सही पाई जाती है तो डीडीपीओ उपायुक्त को सरपंच के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा करते हैं। उपायुक्त पंचायतीराज अधिनियम के तहत सरपंच को बर्खास्त करते हैं।
सोमवार से शैक्षणिक योग्यता में अयोग्य पाए गए सरपंचों के खिलाफ कार्यवाही शुरू होने की संभावना है। तकरीबन 14 मामले ऐसे थे जिसमें से 8-9 के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। उपायुक्त के पास ऐसे दोषी सरपंचों को बर्खास्त करने की शक्ति है। जो सरपंच बर्खास्त होंगे, उन गांवों में सरपंच पद के लिए दोबारा चुनाव करवाए जाएंगे।
-राजेश खोथ, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, फतेहाबाद
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चार को डीसी का नोटिस, एक के खिलाफ शिकायत निकली झूठी
जिले के इन 14 में से 4 सरपंचों को डीसी एनके सोलंकी की ओर से निजी सुनवाई के लिए नोटिस जारी हो चुका है। अगर ये सरपंच डीसी के सामने निजी सुनवाई में अपने पक्ष में कोई ठोस दलील नहीं दे पाए तो इनकी बर्खास्तगी तय है। डीडीपीओ की जांच में इन चारों सरपंचों के खिलाफ जांच में शैक्षणिक योग्यता में धोखाधड़ी होना पाया गया है। इसके अलावा 10 अन्य सरपंचों की जांच में एक गांव कमाना के सरपंच के खिलाफ शिकायत झूठी पाई गई है। जिल विकास एवं पंचायत विभाग के सूत्रों की मानें तो बाकी नौ सरपंचों के खिलाफ डीडीपीओ राजेश खोथ की जांच पूरी हो चुकी है। डीसी एनके सोलंकी के भाई के निधन के कारण डीसी के अवकाश पर जाने से इस मामले में थोड़ी देरी हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि डीसी के वापस आते ही जल्द ही बाकी नौ सरपंचों को भी नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों का तो ये भी कहना है कि डीडीपीओ की जांच में इन नौ सरपंचों के खिलाफ शिकायत भी सही पाई गई है। ऐसे में इन सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई किसी भी समय हो सकती है।
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सबसे ज्यादा रतिया ब्लॉक के सरपंचों पर आरोप
सरपंच पद के चुनाव में धोखाधड़ी के मामले में सबसे अधिक आरोप रतिया ब्लॉक के सरपंचों पर लगे हैं। रतिया ब्लॉक के कुल पांच गांवों पिलछियां, भानीखेड़ा, कमाना, बादलगढ़ व रतिया के सरपंचों पर चुनाव में फर्जी प्रमाणपत्र पेश करने का आरोप है। फतेहाबाद खंड के चार गांवों बनगांव, ढाणी ईसर, नखाटिया और भिरडाना के सरपंचों के खिलाफ जांच जारी है। टोहाना खंड के दो गांव धारसूल खुर्द व समैण गांव के सरपंचों पर फर्जी डिग्री दिखाने का आरोप है। जाखल में रूपावाली, भूना में नहला व बैजलपुर गांव के सरपंचों के खिलाफ फर्जी कागजात जमा करवाने का आरोप है। भट्टू ब्लॉक के किसी सरपंच पर अभी तक कोई आरोप नहीं है।
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ये होती है प्रक्रिया
जिले के किसी भी सरपंच के खिलाफ शैक्षणिक योग्यता बाबत कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी यानी डीडीपीओ को सौंपी जाती है। डीडीपीओ आरोपी सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी कर उसे जांच के लिए बुलाते हैं। जरूरत होने पर मौके पर जाकर भी जांच की जाती है। अगर शिकायत सही पाई जाती है तो डीडीपीओ उपायुक्त को सरपंच के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुशंसा करते हैं। उपायुक्त पंचायतीराज अधिनियम के तहत सरपंच को बर्खास्त करते हैं।
सोमवार से शैक्षणिक योग्यता में अयोग्य पाए गए सरपंचों के खिलाफ कार्यवाही शुरू होने की संभावना है। तकरीबन 14 मामले ऐसे थे जिसमें से 8-9 के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। उपायुक्त के पास ऐसे दोषी सरपंचों को बर्खास्त करने की शक्ति है। जो सरपंच बर्खास्त होंगे, उन गांवों में सरपंच पद के लिए दोबारा चुनाव करवाए जाएंगे।
-राजेश खोथ, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, फतेहाबाद