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सरकारी नजरों में जिले भर के 68 हजार में से महज 1489 विद्यार्थी गरीब
ब्यूरो/अमर उजाला फतेहाबाद
Updated Fri, 01 Apr 2016 12:11 AM IST
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प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग गरीब बच्चों को शिक्षा देने के लिए नियम 134-ए को लागू करने के लिए जितनी मर्जी अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन फतेहाबाद की जमीनी हकीकत ना केवल इससे उलट है बल्कि शर्मनाक भी है।
शिक्षा विभाग गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सत्र में इस योजना के तहत अकेले फतेहाबाद में ही ढाई हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई। इसका मतलब ये है कि निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग को गरीब बच्चे मिले ही नहीं।
आंकड़ों की बात करें तो विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में 134-ए के तहत पहली से आठवीं तक 3669 सीटें हैं लेकिन अढ़ाई हजार से अधिक सीटें खाली रही। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी ये मानते हैं कि प्रवेश उत्सव एवं अन्य प्रचार अभियान के कारण बच्चे अब सरकारी स्कूलों की ओर रुझान करने लगे लगे हैं। अब फिर से विभाग द्वारा नियम 134-ए के तहत आवेदन एकत्रित करने एवं उनका ड्रा निकालने का काम किया जा रहा है।
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लेकिन लगता नहीं कि इस बार भी हालात कुछ बदलेंगे क्योंकि 134-ए के तहत शिक्षा देने के प्रावधान के बारे में शिक्षा विभाग प्रचार करता दिख ही नहीं रहा है। ऐसे में इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए ही नियम 134-ए के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा के बारे में पर्याप्त प्रचार नहीं किया गया।
आखिरकार 134-ए के तहत कम बच्चों का एडमिशन होने पर सबसे अधिक फायदा तो निजी स्कूलों का ही होगा। बची हुई सीटों को वो सामान्य विद्यार्थियों को दे सकते हैं, जिनसे उन्हें पूरी फीस एवं बाकी खर्चे मिलेंगे।
फतेहाबाद ब्लॉक में सबसे ज्यादा बदहाली, 82 फीसदी से अधिक सीटें खाली
134-ए के तहत गरीब बच्चों के लिए निजी स्कूलों में आरक्षित जिले भर की कुल 3669 सीटों में से पिछले साल 2598 सीटें खाली रह गई। अगर ब्लॉक वाइज बात की जाए तो जिले भर में सबसे बदहाल स्थिति में जिला मुख्यालय पर स्थित फतेहाबाद ब्लॉक की है।
फतेहाबाद ब्लॉक में विभाग की ओर से 1568 गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा देने की सीटें उपलब्ध थी लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी इन 1568 में से महज 289 बच्चों को ही निजी स्कूलों में दाखिला दिलवा पाए। अकेले फतेहाबाद ब्लॉक में और 1279 गरीब विद्यार्थी निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा हासिल कर सकते थे लेकिन विभाग की ढिलाई के चलते ऐसा ना हो पाया।
जिले के बाकी खंड भी इस मामले में काफी पिछड़ गए हैं। शिक्षा विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहली से आठवीं तक 134-ए के तहत गरीब बच्चों को शिक्षा देने के मामले फतेहाबाद के बाद भट्टू में सबसे अधिक सीटें खाली रही हैं। भट्टू में ये सीटें 382 हैं। इसके बाद टोहाना में कुल 320 सीटें खाली रही। इसके बाद भूना में 289, रतिया में 124 एवं जाखल में 48 सीटें खाली रही।
बीते साल में जिले में 134-ए के तहत सीटें खाली जरूर रही हैं लेकिन इसके पीछे असल बात ये है कि सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ा है। प्रवेश उत्सव एवं अन्य प्रचार के कारण ऐसा संभव हो रहा है। वैसे जो बच्चे 134-ए के तहत निजी स्कूलों में जाना चाहते हैं, उनकी पूरी मदद करते हैं। आवेदन मांगे हुए हैं जिनका 10 अप्रैल को ड्रा निकाला जाएगा।
यज्ञदत्त वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।
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शिक्षा विभाग गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सत्र में इस योजना के तहत अकेले फतेहाबाद में ही ढाई हजार से ज्यादा सीटें खाली रह गई। इसका मतलब ये है कि निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग को गरीब बच्चे मिले ही नहीं।
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आंकड़ों की बात करें तो विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में 134-ए के तहत पहली से आठवीं तक 3669 सीटें हैं लेकिन अढ़ाई हजार से अधिक सीटें खाली रही। हालांकि शिक्षा विभाग के अधिकारी ये मानते हैं कि प्रवेश उत्सव एवं अन्य प्रचार अभियान के कारण बच्चे अब सरकारी स्कूलों की ओर रुझान करने लगे लगे हैं। अब फिर से विभाग द्वारा नियम 134-ए के तहत आवेदन एकत्रित करने एवं उनका ड्रा निकालने का काम किया जा रहा है।
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लेकिन लगता नहीं कि इस बार भी हालात कुछ बदलेंगे क्योंकि 134-ए के तहत शिक्षा देने के प्रावधान के बारे में शिक्षा विभाग प्रचार करता दिख ही नहीं रहा है। ऐसे में इस बात की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता कि निजी स्कूलों को लाभ पहुंचाने के लिए ही नियम 134-ए के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा के बारे में पर्याप्त प्रचार नहीं किया गया।
आखिरकार 134-ए के तहत कम बच्चों का एडमिशन होने पर सबसे अधिक फायदा तो निजी स्कूलों का ही होगा। बची हुई सीटों को वो सामान्य विद्यार्थियों को दे सकते हैं, जिनसे उन्हें पूरी फीस एवं बाकी खर्चे मिलेंगे।
फतेहाबाद ब्लॉक में सबसे ज्यादा बदहाली, 82 फीसदी से अधिक सीटें खाली
134-ए के तहत गरीब बच्चों के लिए निजी स्कूलों में आरक्षित जिले भर की कुल 3669 सीटों में से पिछले साल 2598 सीटें खाली रह गई। अगर ब्लॉक वाइज बात की जाए तो जिले भर में सबसे बदहाल स्थिति में जिला मुख्यालय पर स्थित फतेहाबाद ब्लॉक की है।
फतेहाबाद ब्लॉक में विभाग की ओर से 1568 गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा देने की सीटें उपलब्ध थी लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी इन 1568 में से महज 289 बच्चों को ही निजी स्कूलों में दाखिला दिलवा पाए। अकेले फतेहाबाद ब्लॉक में और 1279 गरीब विद्यार्थी निजी स्कूलों में अच्छी शिक्षा हासिल कर सकते थे लेकिन विभाग की ढिलाई के चलते ऐसा ना हो पाया।
जिले के बाकी खंड भी इस मामले में काफी पिछड़ गए हैं। शिक्षा विभाग के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पहली से आठवीं तक 134-ए के तहत गरीब बच्चों को शिक्षा देने के मामले फतेहाबाद के बाद भट्टू में सबसे अधिक सीटें खाली रही हैं। भट्टू में ये सीटें 382 हैं। इसके बाद टोहाना में कुल 320 सीटें खाली रही। इसके बाद भूना में 289, रतिया में 124 एवं जाखल में 48 सीटें खाली रही।
बीते साल में जिले में 134-ए के तहत सीटें खाली जरूर रही हैं लेकिन इसके पीछे असल बात ये है कि सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों का रुझान बढ़ा है। प्रवेश उत्सव एवं अन्य प्रचार के कारण ऐसा संभव हो रहा है। वैसे जो बच्चे 134-ए के तहत निजी स्कूलों में जाना चाहते हैं, उनकी पूरी मदद करते हैं। आवेदन मांगे हुए हैं जिनका 10 अप्रैल को ड्रा निकाला जाएगा।
यज्ञदत्त वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, फतेहाबाद ।