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निजीकरण के खिलाफ सड़कों पर कर्मचारी
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Fri, 22 Apr 2016 12:50 AM IST
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बिजली
- फोटो : file
हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर फतेहाबाद जिले के बिजली कर्मचारियों ने 33केवी फतेहाबाद के प्रांगण में विरोध प्रदर्शन किया व लाल बत्ती चौक से लघु सचिवालय में रोष प्रदर्शन कर प्रदेश की 23सब डिवीजनों को निजी हाथों में देने के फैसले को तुरंत वापस लेने और लंबित मांगों को हल करवाने बारे ज्ञापन उपायुक्त के माध्यम से अतिरिक्त मुख्य सचिव बिजली को भेजा है।
इस दौरान ऑल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ व एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य सहसचिव राजेश आसन ने कहा कि सरकार व निगम प्रबंधक कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। इससे पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में रोष है। आंदोलन की अगली कड़ी में वीरवार को प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को निजीकरण के खिलाफ व कर्मचारियों की मांगों को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपना चाहती है, जिसके जनता और कर्मचारी वर्ग को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जनता को बिजली ओर ज्यादा महंगे दामों पर मिलेगी। बेरोजगारी में बढ़ोतरी होगी। भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। निजीकरण की नीतियों के कारण बिजली निगमों का घाटा बढ़कर 400 करोड़ से 35 हजार करोड़ हो गया है।
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घाटे की समीक्षा करने की बजाय सरकार निजीकरण को ओर ज्यादा तेजी से लागू करने का काम कर रही है। इसे कर्मचारी किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। प्रदर्शन को सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान भूप सिंह भड़ोलांवाली, महासंघ के जिला प्रधान फूल कुमार कुंडू, फकीर चंद सैनी, अमित शर्मा, भूप सिंह, दलीप लोढा, प्रदीप यादव, पवन कड़वा, ललित शर्मा आदि ने भी संबोधित किया।
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इस दौरान ऑल हरियाणा पॉवर कार्पोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य सचिव अजय वशिष्ठ व एचएसईबी वर्कर यूनियन के राज्य सहसचिव राजेश आसन ने कहा कि सरकार व निगम प्रबंधक कर्मचारियों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं है। इससे पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में रोष है। आंदोलन की अगली कड़ी में वीरवार को प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को निजीकरण के खिलाफ व कर्मचारियों की मांगों को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं।
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उन्होंने कहा कि सरकार बिजली बोर्ड को निजी हाथों में सौंपना चाहती है, जिसके जनता और कर्मचारी वर्ग को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। जनता को बिजली ओर ज्यादा महंगे दामों पर मिलेगी। बेरोजगारी में बढ़ोतरी होगी। भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा। निजीकरण की नीतियों के कारण बिजली निगमों का घाटा बढ़कर 400 करोड़ से 35 हजार करोड़ हो गया है।
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घाटे की समीक्षा करने की बजाय सरकार निजीकरण को ओर ज्यादा तेजी से लागू करने का काम कर रही है। इसे कर्मचारी किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेंगे। प्रदर्शन को सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान भूप सिंह भड़ोलांवाली, महासंघ के जिला प्रधान फूल कुमार कुंडू, फकीर चंद सैनी, अमित शर्मा, भूप सिंह, दलीप लोढा, प्रदीप यादव, पवन कड़वा, ललित शर्मा आदि ने भी संबोधित किया।