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Hindi News ›   Haryana ›   Fatehabad News ›   Farmers to increase the tension of rain

बारिश ने बढ़ाई किसानों की टेंशन

Tue, 25 Mar 2014 12:21 AM IST
fatehabad
fatehabad Updated Tue, 25 Mar 2014 12:21 AM IST
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दो दिन से जिलेभर में हो रही बूंदाबांदी से किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। बूंदाबांदी से खेताें में पानी जमा हो गया है और गेहूं की बालियों का वजन बढ़ गया है।

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 थोड़ी सी हवा चलने पर ही गेहूं की फसल जमीन पर बिछने के आसार हैं। हालांकि इससे पहले मौसम किसानों के लिए अनुकूल था। इससे रिकॉर्डतोड़ उत्पादन की उम्मीद थी।
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यदि शीघ्र ही मौसम नहीं खुला तो किसानों की 6 माह की मेहनत मिट्टी में मिल जाएगी और वे कर्जदार हो जाएंगे।
रविवार दोपहर तक बूंदाबांदी हुई थी। सोमवार सुबह से रिमझिम बरसात शुरू हो गई, जो पांच घंटे तक चलती रही, जिससे खेतों में पानी भर गया। इससे गेहूं के पौधे पर लगी बालियां पहले से ही भारी हो गई हैं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक गेहूं की फसल पकने में अभी एक सप्ताह देरी थी, लेकिन बेमौसम बरसात ने देरी बढ़ा दी है। पहले गेहूं 8 अप्रैल तक मंडियों में आना शुरू  हो जाता था, लेकिन इस बार 17 अप्रैल के बाद ही यह मंडियों में आना शुरू होगा। गेहूं बिजाई से अब तक मौसम गेहूं के अनुकूल रहा है।



 ऐसे में माना जा रहा था कि रिकॉर्डतोड़ उत्पादन होगा। टाहली वाली ढाणी के किसान गुरमीत सिंह और सनवंत सिंह ने बताया कि इस बरसात से गेहूं का दाना पतला हो जाएगा और उत्पादन 30 फीसदी कम होगा।



 माना जा रहा था कि इस बार 2012 वाला उत्पादन किसानों को मिलेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मौसम ऐसा ही रहा और शीघ्र ही नहीं खुला तो उत्पादन में गिरावट आ सकती है।   


कृषि विभाग के विशेषज्ञ राकेश कुमार ने बताया है कि गेहूं में अभी अंतिम पानी लगा हुआ है। फतेहाबाद में इस साल 1 लाख 86 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की गई है। अगर और बरसात आती है तो पत्ता नीचे गिर जाएगा। ऐसे में नुकसान संभव है।

फतेहाबाद। गांव धांगड़, सालमखेड़ा, बड़ोपल, धारनियां, कुम्मारिया और खाराखेड़ी में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन प्लांटों का कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों की ओर से निरीक्षण किया गया।

 सूत्रकृमि विशेषज्ञ डॉ. सरदूल मान और चौ. चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से आए वरिष्ठ सूत्रकृमि वैज्ञानिक डॉ. आरएस कंवर ने अवलोकन किया।

 इस दौरान गेहूं में रतुआ बीमारी की आशंका पाई गई, जिसे रोकने के लिए उचित दवा के छिड़काव की सलाह विशेषज्ञों ने दी।



 इन गांवों में रेतीली मिट्टी होने के कारण गेहूं में मोल्या सूत्रकृमि की समस्या अधिक रहती है। उक्त गांवों में मोल्या सूत्रकृमि प्रबंधन के लिए चार तरह से प्रदर्शन प्लांट लगवाए थे।

 इनमें पहला समस्या ग्रस्त खेतों में गेहूं के बजाय सरसों (आरएच-406) लगाना, दूसरा गेहूं की मोल्या सूत्रकृमि प्रतिरोधकता वाली किस्म राज एमआर-1 की बिजाई कराना, तीसरा गेहूं की बिजाई के समय बायोटिका एचटी-54 से बीज उपचारित कराना और गेहूं की बिजाई के समय 13 किलोग्राम कार्बोफ्यूरान 3जी मिट्टी में डलवाना था।


 विशेषज्ञों ने गेहूं के बजाय सरसों की फसल को बेहतर पाया। कहीं-कहीं रतुआ देखने को मिला। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से प्रमाणित फफूंदनाशक और उनकी मात्रा बताई गई है।

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