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किसान पराली न जलाएं, प्राकृतिक खेती अपनाएं : बलवान सिंह

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:16 PM IST
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Farmers should not burn stubble, adopt natural farming: Balwan Singh
अमर उजाला व कृ​षि विज्ञान केंद्र फतेहाबाद द्वारा गांव धौलू में आयोजित किसान चौपाल व मेले में मं
भूना। गांव धौलू के बाबा रामदेव मंदिर में कृषि विज्ञान केंद्र फतेहाबाद और अमर उजाला के संयुक्त तत्वावधान में क्षेत्रीय किसान मेला एवं किसान चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एचएयू हिसार के विस्तार शिक्षा निदेशक बलवान सिंह मंडल की ओर से पराली न जलाने का दिया गया मंत्र किसानों के जेहन में मजबूती से बैठ गया। बलवान सिंह ने बेहद रोचक तरीके से किसानों को पराली न जलाने और प्राकृतिक खेती को अपनाने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि फसल लेने के बाद धान या अन्य फसल के अवशेषों को किसान जलाएं नहीं बल्कि खेत में ही गला दें। इससे उनके खेत की मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनेगी। इससे फसलों की पैदावार बढ़ेगी और पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचा सकेंगे। सह निदेशक डॉ. सुनील ढांडा व डॉ. अनु वर्मा ने किसानों से कहा कि खेत में ही पराली जलाने से मित्र कीट जल जाते हैं। इससे उत्पादन की मात्रा भी घटती है। इसलिए फानों में आग न लगाकर उनका स्थायी समाधान किया जाए। किसानों को भूमि की उर्वरता शक्ति को बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों की मात्रा कम करने के साथ धान के फानों में आग लगाना भी बंद करना होगा। किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं का फायदा उठाना चाहिए। वैज्ञानिकों ने किसानों को परंपरागत खेती को छोड़कर बिजनेस आधारित खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।
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इस मौके पर डॉ. ओपी कंबोज, डॉ. भगत सिंह, डॉ. सरोज, डॉ. अमित कुमार, डॉ. कुलदीप सिंह, सरपंच प्रतिनिधि रामकिशन, पूर्व सरपंच राधेश्याम, डॉ. रणसिंह रणवा, रामकिशन गेदर, हरिसिंह गोदारा सहित कई किसान मौजूद थे। संवाद
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किसान बोले- चौपाल व मेले में मिले संदेश ने किया प्रेरित
एचएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक बलवान सिंह मंडल ने हमें जो बातें बताई हैं, उस पर मंथन करना पड़ेगा। उन्होंने कई उदाहरण देकर किसानों को आर्थिक रूप से उभरने के टिप्स दिए हैं, जो किसानों के लिए विचारणीय है।
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-जिले सिंह, किसान, गांव धौलू

मेले व किसान चौपाल में फसलों की बिजाई से लेकर पकाई तक आने वाली समस्याओं को लेकर कई जानकारियां मिली। वैज्ञानिकों ने नई तरीके से खेती करने की विधि बताई। पराली न जलाने का भी संदेश दिया।
-निहाल सिंह आर्य, किसान, गांव गोरखपुर

पराली जलाने से खेतों में होने वाले प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नुकसान के बारे में वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है। भविष्य में हम पराली नहीं जलाएंगे। नरमे के पौधे की लकड़ियों को भी एक जगह भूमि पर नहीं रखेंगे। वैज्ञानिकों ने आंखें खोल दी है।

-कुलदीप सिंह, किसान, गांव डाटा गुराना

मेले में आकर खेती करने की विधि सीखने का मिली। हमें मित्र कीटों को बचाने के लिए खेतों में पराली जलाने से दूरी बनानी होगी। विस्तार शिक्षा निदेशक द्वारा जहर से छुटकारा पाकर जैविक-प्राकृतिक खेती अपनाने का संदेश प्रत्येक किसान को लुभा गया।
-जगदेव सिंह, किसान, उकलाना
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