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Fatehabad News: फसलों की बुवाई के समय से पहले ही जिले में डीएपी खाद की होने लगी मारामारी
Mon, 23 Sep 2024 05:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 23 Sep 2024 05:14 AM IST
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फतेहाबाद। जिले में इन दिनाें सब्जियों की फसल की बुवाई का समय चल रहा है। अगले माह सरसों की बुवाई शुरू हो जाएगी। ऐसे में किसानों को अब डीएपी खाद की जरूरत है। नहीं मिलने से अभी से ही डीएपी खाद के लिए मारामारी शुरू हो गई है। डीएपी खाद केंद्रों से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
फसल बुवाई के लिए किसानों के सामने डीएपी की किल्लत सामने आ रही है। सरकारी खाद-बीज की दुकानों पर भी खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का मानना है कि साल 2020 से पहले डीएपी खाद की कमी नहीं थी। मगर अब पिछले चार वर्षों से बुवाई के समय उनको न तो खाद मिलती है तो न ही बीज मिल पा रहा है। हर साल किसानों को डीएपी खाद के लिए भटकना पड़ता है।
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डीएपी की जगह एनपीके का प्रयोग कर सकते हैं किसान
कृषि सहायक अधिकारी डॉ. बहादुर सिंह ने बताया कि डीएपी में नाइट्रोजन फॉस्फोरस होता है, जबकि एनपीके में नाइट्रोजन फॉस्फोरस के साथ- साथ पोटाश भी होता है। एनपीके में 123216 के अनुपात में पोषक तत्व होते हैं। वहीं, डीएपी में 184600 के अनुपात में पोषक तत्व होते हैं। इसलिए डीएपी खाद की जगह एनपीके प्रयोग कर कर सकते हैं। एनपीके और डीएपी की दोनों की कीमतों में ज्यादा रुपये का अंतर नहीं है। डीएपी की कीमत 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम कट्टा है, जबकि एनपीके 123216 की कीमत 1470 रुपये प्रति कट्टा है। यह फसलों के लिए डीएपी से भी अच्छे परिणाम देता है। वहीं, तिलहन की फसलों में सुपर खाद का प्रयोग करना चाहिए, जिससे फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
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खेतों में सरसों की फसल की बुवाई का समय करीब आ रहा है। बुवाई के समय प्रयोग होने वाली डीएपी खाद नहीं मिल रही है। दो दिन से खरीद केंद्रों के चक्कर लगा रहा हूं। फसलों की बुवाई लेट न हो, इसके लिए प्रदेश सरकार व प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए। किसान को परेशान नहीं करना चाहिए।
-मदन बनगांव, किसान
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सरसों की बुवाई करनी है, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है। शहर में दो-तीन दुकानों पर चक्कर लगा चुका हूं। शनिवार को फतेहाबाद के इफको खाद केंद्र पर खाद का ट्रक आया था। भीड़ ज्यादा होने के कारण खाद नहीं मिल सकी। अभी 15 दिनों के बाद खाद आने की बात बोल रहे हैं। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो सरसों की बुवाई में देरी हो सकती है।
-दलीप सिंह, किसान
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मुझे पिछले साल भी देरी से खाद मिली थी, जिसकी वजह से सरसों की बुवाई लेट हो गई। इस बार पिछले 15 दिनों से खाद नहीं मिल पा रही है। इसके लिए मंडी में चक्कर लगा रहा हूं। जान-बूझकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-जरनैल सिंह, किसान
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:: डीएपी खाद की सप्लाई पीछे से ही नहीं आ रही है। जैसे ही खाद का ट्रक आएगा, किसानों को खाद बांट दी जाएगी। खाद केंद्र पर एनपीके और यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है। किसान उनका भी प्रयोग कर सकते हैं।
-डॉ. संदीप कुमार, फील्ड ऑफिसर, इफको खाद केंद्र, फतेहाबाद
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फसल बुवाई के लिए किसानों के सामने डीएपी की किल्लत सामने आ रही है। सरकारी खाद-बीज की दुकानों पर भी खाद नहीं मिल पा रही है। किसानों का मानना है कि साल 2020 से पहले डीएपी खाद की कमी नहीं थी। मगर अब पिछले चार वर्षों से बुवाई के समय उनको न तो खाद मिलती है तो न ही बीज मिल पा रहा है। हर साल किसानों को डीएपी खाद के लिए भटकना पड़ता है।
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डीएपी की जगह एनपीके का प्रयोग कर सकते हैं किसान
कृषि सहायक अधिकारी डॉ. बहादुर सिंह ने बताया कि डीएपी में नाइट्रोजन फॉस्फोरस होता है, जबकि एनपीके में नाइट्रोजन फॉस्फोरस के साथ- साथ पोटाश भी होता है। एनपीके में 123216 के अनुपात में पोषक तत्व होते हैं। वहीं, डीएपी में 184600 के अनुपात में पोषक तत्व होते हैं। इसलिए डीएपी खाद की जगह एनपीके प्रयोग कर कर सकते हैं। एनपीके और डीएपी की दोनों की कीमतों में ज्यादा रुपये का अंतर नहीं है। डीएपी की कीमत 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम कट्टा है, जबकि एनपीके 123216 की कीमत 1470 रुपये प्रति कट्टा है। यह फसलों के लिए डीएपी से भी अच्छे परिणाम देता है। वहीं, तिलहन की फसलों में सुपर खाद का प्रयोग करना चाहिए, जिससे फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
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खेतों में सरसों की फसल की बुवाई का समय करीब आ रहा है। बुवाई के समय प्रयोग होने वाली डीएपी खाद नहीं मिल रही है। दो दिन से खरीद केंद्रों के चक्कर लगा रहा हूं। फसलों की बुवाई लेट न हो, इसके लिए प्रदेश सरकार व प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए। किसान को परेशान नहीं करना चाहिए।
-मदन बनगांव, किसान
सरसों की बुवाई करनी है, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल रही है। शहर में दो-तीन दुकानों पर चक्कर लगा चुका हूं। शनिवार को फतेहाबाद के इफको खाद केंद्र पर खाद का ट्रक आया था। भीड़ ज्यादा होने के कारण खाद नहीं मिल सकी। अभी 15 दिनों के बाद खाद आने की बात बोल रहे हैं। अगर समय पर खाद नहीं मिली तो सरसों की बुवाई में देरी हो सकती है।
-दलीप सिंह, किसान
मुझे पिछले साल भी देरी से खाद मिली थी, जिसकी वजह से सरसों की बुवाई लेट हो गई। इस बार पिछले 15 दिनों से खाद नहीं मिल पा रही है। इसके लिए मंडी में चक्कर लगा रहा हूं। जान-बूझकर किसानों को परेशान किया जा रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-जरनैल सिंह, किसान
:: डीएपी खाद की सप्लाई पीछे से ही नहीं आ रही है। जैसे ही खाद का ट्रक आएगा, किसानों को खाद बांट दी जाएगी। खाद केंद्र पर एनपीके और यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है। किसान उनका भी प्रयोग कर सकते हैं।
-डॉ. संदीप कुमार, फील्ड ऑफिसर, इफको खाद केंद्र, फतेहाबाद