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बिजली पोल गिरा जाते हैं वाहन चालक, परेशानी झेल रहे उपभोक्ता
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मिनी बाईपास के पास टूटा पोल।
- फोटो : Fatehabad
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वाहन चालकों की लापरवाही से निगम को हर साल लाखों रुपये का नुकसान होता है। कहीं पर ट्रकों में उलझकर तारें टूट जाती हैं। कहीं पर तृड़े के ट्रॉले बिजली के पोल तोड़ जाते हैं। मुख्य मार्गों पर तेज गति के कारण अनियंत्रित वाहन अक्सर बिजली के पोल से टकरा जाते हैं। इस तरह के नुकसान की भरपाई के लिए आज भी निगम के पास कोई ठोस नीति नहीं है। वाहन चालक लापरवाही करते हैं और सारा आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
हालांकि वाहन चालक का पता चलने पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करवा दिया जाता है। उसके बाद ज्यादातर वाहन चालक सबूतों के अभाव में बरी हो जाते हैं। मगर क्षतिपूर्ति के लिए निगम की तरफ से कोई दावा कोर्ट में नहीं किया जाता। बीते एक दशक में निगम ने मंडल स्तर पर एक भी सिविल केस क्षतिपूर्ति के लिए नहीं दायर किया। हर साल 110 से 120 पोल इसी तरह टूटते हैं। कई बार ट्रांसफार्मर तक गिर जाते हैं। वर्ष 2010 से अब तक 1200 पोल व 60 से ज्यादा ट्रांसफार्मर हादसों में टूट कर गिरे हैं। निगम को होने वाला सारा आर्थिक नुकसान उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
ये है कानूनी प्रक्रिया
एडवोकेट दीपांशु सिंगला के मुताबिक हादसों में आपराधिक व सिविल केस अलग-अलग दायर होते हैं। शिकायत पर संबंधित थाना पुलिस आईपीसी के अंतर्गत लापरवाही से वाहन चलाने व नुकसान करने का केस दायर कर देती है, जिसमें सिर्फ सजा का प्रावधान होता है। यदि पीड़ित पक्षकार नुकसान का दावा करता है तो उसे क्लेम केस अलग से दायर करना पड़ता है। आपराधिक केस में क्लेम राशि का प्रावधान नहीं होता।
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उपभोक्ता पर पड़ता है आर्थिक बोझ
पोल या ट्रांसफार्मर टूटने पर निगम को काफी नुकसान होता है। पोल नया लगाना पड़ता है। टूट चुकी तारें भी बदलनी पड़ती है। लेबर पर काफी रुपये खर्च होते हैं। बिजली आपूर्ति बाधित रहने से भी निगम को लॉस होता है। यानी कई प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लॉस होते हैं। इस नुकसान की भरपाई के लिए निगम को बिजली यूनिट महंगी करनी पड़ती हैं।
इस केस से समझिये स्थिति
वर्ष 2016 में शहर में महिंद्रा कोटेक बैंक के सामने एक ट्रांसफार्मर से ट्रक टकरा गया। सुबह पांच बजे का समय था। चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। निगम ने थाने में शिकायत दी, जिस पर चालक के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। करीब तीन साल केस चला और आरोपी चालक बरी हो गया। यानी ट्रक के मालिक या चालक से ट्रांसफार्मर को हुए नुकसान की कोई भरपाई नहीं हो पाई। निगम को खुद के खर्च से नया ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ा था।
निगम के सामने कई चुनौतियां : एक्सईएन
वाहन चालकों की लापरवाही से निगम को वाकई बहुत नुकसान होता है। मगर निगम की अपनी दिक्कतें हैं। कई बार पता ही नहीं चलता कि पोल को टक्कर कौन सा वाहन मार गया। जहां चालक व वाहन मालिक का पता हो, वहां हम भरपाई करवा लेते हैं। यदि चालक या वाहन का पता न चले तो केस भी नहीं दायर किया जा सकता। अक्सर ऐसे हादसा रात को ही होते हैं, जब ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। वाहन चालक मौके से फरार हो जाते हैं।
-एमएल सुखीजा, एक्सईएन, बिजली निगम।
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हालांकि वाहन चालक का पता चलने पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करवा दिया जाता है। उसके बाद ज्यादातर वाहन चालक सबूतों के अभाव में बरी हो जाते हैं। मगर क्षतिपूर्ति के लिए निगम की तरफ से कोई दावा कोर्ट में नहीं किया जाता। बीते एक दशक में निगम ने मंडल स्तर पर एक भी सिविल केस क्षतिपूर्ति के लिए नहीं दायर किया। हर साल 110 से 120 पोल इसी तरह टूटते हैं। कई बार ट्रांसफार्मर तक गिर जाते हैं। वर्ष 2010 से अब तक 1200 पोल व 60 से ज्यादा ट्रांसफार्मर हादसों में टूट कर गिरे हैं। निगम को होने वाला सारा आर्थिक नुकसान उपभोक्ताओं पर पड़ता है।
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ये है कानूनी प्रक्रिया
एडवोकेट दीपांशु सिंगला के मुताबिक हादसों में आपराधिक व सिविल केस अलग-अलग दायर होते हैं। शिकायत पर संबंधित थाना पुलिस आईपीसी के अंतर्गत लापरवाही से वाहन चलाने व नुकसान करने का केस दायर कर देती है, जिसमें सिर्फ सजा का प्रावधान होता है। यदि पीड़ित पक्षकार नुकसान का दावा करता है तो उसे क्लेम केस अलग से दायर करना पड़ता है। आपराधिक केस में क्लेम राशि का प्रावधान नहीं होता।
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उपभोक्ता पर पड़ता है आर्थिक बोझ
पोल या ट्रांसफार्मर टूटने पर निगम को काफी नुकसान होता है। पोल नया लगाना पड़ता है। टूट चुकी तारें भी बदलनी पड़ती है। लेबर पर काफी रुपये खर्च होते हैं। बिजली आपूर्ति बाधित रहने से भी निगम को लॉस होता है। यानी कई प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लॉस होते हैं। इस नुकसान की भरपाई के लिए निगम को बिजली यूनिट महंगी करनी पड़ती हैं।
इस केस से समझिये स्थिति
वर्ष 2016 में शहर में महिंद्रा कोटेक बैंक के सामने एक ट्रांसफार्मर से ट्रक टकरा गया। सुबह पांच बजे का समय था। चालक ट्रक छोड़कर भाग गया। निगम ने थाने में शिकायत दी, जिस पर चालक के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। करीब तीन साल केस चला और आरोपी चालक बरी हो गया। यानी ट्रक के मालिक या चालक से ट्रांसफार्मर को हुए नुकसान की कोई भरपाई नहीं हो पाई। निगम को खुद के खर्च से नया ट्रांसफार्मर लगवाना पड़ा था।
निगम के सामने कई चुनौतियां : एक्सईएन
वाहन चालकों की लापरवाही से निगम को वाकई बहुत नुकसान होता है। मगर निगम की अपनी दिक्कतें हैं। कई बार पता ही नहीं चलता कि पोल को टक्कर कौन सा वाहन मार गया। जहां चालक व वाहन मालिक का पता हो, वहां हम भरपाई करवा लेते हैं। यदि चालक या वाहन का पता न चले तो केस भी नहीं दायर किया जा सकता। अक्सर ऐसे हादसा रात को ही होते हैं, जब ओवरलोड वाहन गुजरते हैं। वाहन चालक मौके से फरार हो जाते हैं।
-एमएल सुखीजा, एक्सईएन, बिजली निगम।