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Fatehabad News: शिक्षा विभाग को सर्वे में मिले 13 हजार निरक्षर
Mon, 24 Mar 2025 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 24 Mar 2025 11:06 PM IST
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फतेहाबाद में उल्लास कार्यक्रम के तहत लोगों को जागरूक करते हुए अधिकारीस्त्रोत शिक्षा विभाग
फतेहाबाद। शिक्षा विभाग उल्लास कार्यक्रम के तहत जिले के 13 हजार निरक्षरों की परीक्षा लेने जा रहा है। ये परीक्षा जिले में अलग-अलग केंद्रों पर होगी। इसको लेकर विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है।
विभाग ने उल्लास कार्यक्रम को लेकर दूसरे चरण का सर्वे करवाया था। इस सर्वे में 13 हजार निरक्षर मिले हैं। इसके पहले चरण में 5400 निरक्षर परीक्षा दे चुके हैं। ये परीक्षा पिछले साल सितंबर माह में हुई थी। परीक्षा पास होने के बाद ये निरक्षर नहीं कहलाएंगे। विभाग की तरफ से इन्हें प्रमाणपत्र भी जारी किया जाएगा। हालांकि विभाग की तरफ से इन्हें नाम लिखना, पढ़ना सिखाया जा रहा है। इसमें 15 साल के किशोर से लेकर 90 साल के बुजुर्ग परीक्षा देंगे।
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ये है पाठ्यक्रम
उल्लास कार्यक्रम में शामिल हुए लर्नर के लिए सामान्य पाठ्यक्रम रहेगा। इसमें उन्हें हिंदी का अक्षर ज्ञान व गणित में संख्याओं की पहचान, जोड़, घटा, गुणा, भाग करना आदि सिखाया जाएगा। इसके अनुसार ही उनकी परीक्षा करवाई जाएगी। जिले में लर्नर के लिए गांवों के राजकीय विद्यालय में सामाजिक चेतना केंद्र बनाए गए हैं।
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पिछले साल हुई थी उल्लास कार्यक्रम की शुरुआत
शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम की शुरुआत पिछले साल की गई थी। पिछले साल पहले चरण के सर्वे में करीब 10 हजार निरक्षर मिले। इनमें से साढ़े पांच हजार ने परीक्षा दी थी। अब दूसरे चरण का सर्वे करवाया गया तो 13 हजार निरक्षर मिले हैं। ये सर्वे शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने ही किया था। निरक्षरों को पढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से घर के ही ऐसे सदस्य को नियुक्त किया है जो कि पांचवीं कक्षा या इससे ज्यादा पढ़े हैं।
क्या है उल्लास कार्यक्रम
उल्लास कार्यक्रम, शिक्षा विभाग की एक योजना है, जिसके तहत असाक्षर लोगों की पहचान की जाती है। इसके बाद उन्होंने अक्षर ज्ञान करवाया जाता है। इसमें उन्हें शब्दों और अंकों की पहचान करने के साथ लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है। इस कार्यक्रम का मकसद भारत को साक्षर बनाना है।
102 वर्षीय चंबाराम बने थे प्रेरणा का स्रोत
जिले के गांव अहलीसदर के 102 वर्षीय चंबाराम ने पिछले वर्ष उल्लास कार्यक्रम के तहत हुई परीक्षा में भाग लिया था। चंबाराम के चार पोते, दो दोहते और दो दोहती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी चंबाराम खुद चलकर गांव के सरकारी स्कूल में बनाए गए परीक्षा केंद्र पहुंचे और परीक्षा दी थी। उस समय उन्होंने कहा था कि निके-वडे सारे पढ़न। पड़ोस की निजी स्कूल की शिक्षिका संदीप कौर ने स्वयंसेवी शिक्षिका के रूप में चंबाराम को पढ़ाया था।
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शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम के तहत 30 मार्च को परीक्षा आयोजित की जा रही है। खंड स्तर पर टीमें केंद्र बना रही हैं। ये केंद्र सरकारी स्कूलों में बनाए जाएंगे। जो निरक्षर परीक्षा पास कर लेगा, उसे प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
पवन सागर, जिला नोडल अधिकारी, उल्लास कार्यक्रम, फतेहाबाद
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विभाग ने उल्लास कार्यक्रम को लेकर दूसरे चरण का सर्वे करवाया था। इस सर्वे में 13 हजार निरक्षर मिले हैं। इसके पहले चरण में 5400 निरक्षर परीक्षा दे चुके हैं। ये परीक्षा पिछले साल सितंबर माह में हुई थी। परीक्षा पास होने के बाद ये निरक्षर नहीं कहलाएंगे। विभाग की तरफ से इन्हें प्रमाणपत्र भी जारी किया जाएगा। हालांकि विभाग की तरफ से इन्हें नाम लिखना, पढ़ना सिखाया जा रहा है। इसमें 15 साल के किशोर से लेकर 90 साल के बुजुर्ग परीक्षा देंगे।
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ये है पाठ्यक्रम
उल्लास कार्यक्रम में शामिल हुए लर्नर के लिए सामान्य पाठ्यक्रम रहेगा। इसमें उन्हें हिंदी का अक्षर ज्ञान व गणित में संख्याओं की पहचान, जोड़, घटा, गुणा, भाग करना आदि सिखाया जाएगा। इसके अनुसार ही उनकी परीक्षा करवाई जाएगी। जिले में लर्नर के लिए गांवों के राजकीय विद्यालय में सामाजिक चेतना केंद्र बनाए गए हैं।
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पिछले साल हुई थी उल्लास कार्यक्रम की शुरुआत
शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम की शुरुआत पिछले साल की गई थी। पिछले साल पहले चरण के सर्वे में करीब 10 हजार निरक्षर मिले। इनमें से साढ़े पांच हजार ने परीक्षा दी थी। अब दूसरे चरण का सर्वे करवाया गया तो 13 हजार निरक्षर मिले हैं। ये सर्वे शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने ही किया था। निरक्षरों को पढ़ाने के लिए विभाग की तरफ से घर के ही ऐसे सदस्य को नियुक्त किया है जो कि पांचवीं कक्षा या इससे ज्यादा पढ़े हैं।
क्या है उल्लास कार्यक्रम
उल्लास कार्यक्रम, शिक्षा विभाग की एक योजना है, जिसके तहत असाक्षर लोगों की पहचान की जाती है। इसके बाद उन्होंने अक्षर ज्ञान करवाया जाता है। इसमें उन्हें शब्दों और अंकों की पहचान करने के साथ लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है। इस कार्यक्रम का मकसद भारत को साक्षर बनाना है।
102 वर्षीय चंबाराम बने थे प्रेरणा का स्रोत
जिले के गांव अहलीसदर के 102 वर्षीय चंबाराम ने पिछले वर्ष उल्लास कार्यक्रम के तहत हुई परीक्षा में भाग लिया था। चंबाराम के चार पोते, दो दोहते और दो दोहती हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी चंबाराम खुद चलकर गांव के सरकारी स्कूल में बनाए गए परीक्षा केंद्र पहुंचे और परीक्षा दी थी। उस समय उन्होंने कहा था कि निके-वडे सारे पढ़न। पड़ोस की निजी स्कूल की शिक्षिका संदीप कौर ने स्वयंसेवी शिक्षिका के रूप में चंबाराम को पढ़ाया था।
शिक्षा विभाग की तरफ से उल्लास कार्यक्रम के तहत 30 मार्च को परीक्षा आयोजित की जा रही है। खंड स्तर पर टीमें केंद्र बना रही हैं। ये केंद्र सरकारी स्कूलों में बनाए जाएंगे। जो निरक्षर परीक्षा पास कर लेगा, उसे प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।
पवन सागर, जिला नोडल अधिकारी, उल्लास कार्यक्रम, फतेहाबाद