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मारपीट मामले में दो पुलिस कर्मचारियों सहित 5 लोगों को 6-6 महीने की सजा
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:25 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने मारपीट के एक मामले में दो पुलिस कर्मचारियों सहित पांच लोगों को दोषी करार देते हुए उनको 6-6 माह की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी को 500-500 रुपये का जुर्माना भी किया है। दोषियों पर आरोप है कि उन्होंने गुरुनानकपुरा निवासी विधवा कौशल्या देवी के घर घुसकर उसके और उसकी बेटी के साथ मारपीट की व उसके मकान पर कब्जा करने की कोशिश की।
गुरुनानकपुरा निवासी कौशल्या देवी ने अदालत में शिकायत दायर कर आरोप लगाया था कि उसके पड़ोसी थानेदार महेंद्र सिंह की उसके मकान पर बुरी नजर थी। आरोप है कि महेंद्र सिंह ने अपनी वर्दी का नाजायज फायदा उठाते हुए 4 नवंबर 2012 को सांय 6 बजे जब वह अपनी बेटी सीमा के साथ घर में अकेली थी, तो धावा बोल दिया। उसके साथ एएसआई बलवंत सिंह भी था। आरोप है कि बलवंत सिंह ने विधवा के पीछे से बाल पकड़ लिए और सांथल पर डंडे मारे तथा कहने लगे कि मकान खाली कर दे। इतने में महेंद्र व उसकी घरवाली प्रकाश कौर व बेटा रोहित घुस आए। थानेदार महेंद्र के पास तलवार थी, उसने तलवार से कौशल्या देवी पर हमला किया। विधवा की बेटी सीमा ने छुड़ाने की कोशिश की तो थानेदार की पत्नी ने उसे भी पीटा और सीमा का 2 तोले का मंगलसूत्र भी तोड़ लिया। थानेदार के आह्वान पर 20-25 लोग घर घुस आए और मकान में दिवार निकालने लगे। शोर सुनकर पड़ोसी आ गए तो दोषी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। हमले में कौशल्या देवी बेहोश हो गई और उसे उसकी बेटी ने नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। आरोप है कि पुलिस ने अपने मुलजिमों के विरुद्ध रिपोर्ट तो जरूर लिखी लेकिन न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही कार्रवाई की। अदालत ने दोनों पुलिस कर्मियों और महेंद्र की पत्नी व बेटे को दोषी ठहराते हुए 6 माह की सजा सुनाई है।
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फतेहाबाद।
न्यायिक दंडाधिकारी विकास गुप्ता की अदालत ने मारपीट के एक मामले में दो पुलिस कर्मचारियों सहित पांच लोगों को दोषी करार देते हुए उनको 6-6 माह की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी को 500-500 रुपये का जुर्माना भी किया है। दोषियों पर आरोप है कि उन्होंने गुरुनानकपुरा निवासी विधवा कौशल्या देवी के घर घुसकर उसके और उसकी बेटी के साथ मारपीट की व उसके मकान पर कब्जा करने की कोशिश की।
गुरुनानकपुरा निवासी कौशल्या देवी ने अदालत में शिकायत दायर कर आरोप लगाया था कि उसके पड़ोसी थानेदार महेंद्र सिंह की उसके मकान पर बुरी नजर थी। आरोप है कि महेंद्र सिंह ने अपनी वर्दी का नाजायज फायदा उठाते हुए 4 नवंबर 2012 को सांय 6 बजे जब वह अपनी बेटी सीमा के साथ घर में अकेली थी, तो धावा बोल दिया। उसके साथ एएसआई बलवंत सिंह भी था। आरोप है कि बलवंत सिंह ने विधवा के पीछे से बाल पकड़ लिए और सांथल पर डंडे मारे तथा कहने लगे कि मकान खाली कर दे। इतने में महेंद्र व उसकी घरवाली प्रकाश कौर व बेटा रोहित घुस आए। थानेदार महेंद्र के पास तलवार थी, उसने तलवार से कौशल्या देवी पर हमला किया। विधवा की बेटी सीमा ने छुड़ाने की कोशिश की तो थानेदार की पत्नी ने उसे भी पीटा और सीमा का 2 तोले का मंगलसूत्र भी तोड़ लिया। थानेदार के आह्वान पर 20-25 लोग घर घुस आए और मकान में दिवार निकालने लगे। शोर सुनकर पड़ोसी आ गए तो दोषी जान से मारने की धमकी देकर भाग गए। हमले में कौशल्या देवी बेहोश हो गई और उसे उसकी बेटी ने नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। आरोप है कि पुलिस ने अपने मुलजिमों के विरुद्ध रिपोर्ट तो जरूर लिखी लेकिन न तो मुकदमा दर्ज किया और न ही कार्रवाई की। अदालत ने दोनों पुलिस कर्मियों और महेंद्र की पत्नी व बेटे को दोषी ठहराते हुए 6 माह की सजा सुनाई है।
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