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एक और फर्जी कंपनी का भंडाफोड़, चार पुरानी कंपनियों पर भी मामले दर्ज
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फर्जी कंपनी का भंडाफोड़ : टैक्स फ्री वस्तुओं का रजिस्ट्रेशन करवा काटे 18 फीसदी जीएसटी के बिल
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। बोगस बिल काटकर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाली एक और कंपनी का भंडाफोड़ हुआ है। वीरवार को जिला काराधान आयुक्त वीके शास्त्री ने शहर के डीएसपी रोड पर छापा मारकर फर्जी तरीके से बिल काटकर करोड़ों का टेक्स चोरी कर रही उक्त कंपनी में छापा मारा और कंपनी दफ्तर के सभी दस्तावेज जब्त कर लिए। वहीं बीते दिनों जिले के रतिया क्षेत्र में पकड़ी गई दो फर्जी कंपनियों व फतेहाबाद के भूना रोड पर पकड़ी गई दो कंपनियों के खिलाफ संबंधित थाना पुलिस ने राज्य जीएसटी अधिकारी की शिकायत के आधार धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
विदित हो कि बीते दिनों जिला कराधान एवं आबकारी विभाग के निरीक्षण में उक्त कंपनियां फर्जी पाई गई थी। इतना ही नहीं फर्जी निकली चारों कंपनियों द्वारा 11 सौ करोड़ का फर्जीवाडा भी सामने आया था। इससे पहले भी जिले के पुराना बस स्टैंड स्थित एक कंपनी को विभाग ने पकड़ा था। वीरवार को भी शहर के डीएसपी रोड पर एक कंपनी के दफ्तर पर छापा मारकर उसे सील किया है। जिला काराधान आयुक्त वीके शास्त्री ने बताया कि उक्त कंपनी ने भी पहले पकड़ी गई कंपनियों की तरह ही 18 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से करीब 6 करोड़ की परचेज दिखाकर करीब 20 करोड़ के बिल काट दिए थे तथा कोई टेक्स नहीं भरा था। उन्होंने बताया कि कंपनी के दस्तावेज कब्जे मेें ले लिए गए हैं, पूरी गहराई से जांच कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
इन कंपनियों पर दर्ज हुआ है केस
बीते दिनों जिला काराधान विभाग ने जिन कंपनियों पर छापा मारा था उनमें दो रतिया तथा दो कंपनियां फतेहाबाद की थी। उक्त चारों कंपनियों पर संबंधित थाना पुलिस ने राज्य जीएसटी अधिकारी संजय कुमार की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। जिन कंपनियों पर केस दर्ज हुआ है उनमें फतेहाबाद की गोपीराम इंडस्ट्रीज व मनीष काटन फैक्टरी जबकि रतिया की हरिओम कॉटन ट्रेड कंपनी रतिया एवं साईं ट्रेडिंग कंपनी शामिल हैं।
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टैक्स से बचने के लिए कैटल फीड का दिखाया लाइसेंस, लेकिन बिल काटे सीमेंट, मोबाइल व बजरी के
विदित हो कि इस सारे फर्जीवाडे में शामिल कंपनियों ने इंडस्ट्रीज का लाइसेंस कैटल फीड कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड करवाया हुआ था। यहां ये बात ध्यान देने योग्य है कि कैटल फीड टैक्स फ्री है। लेकिन इसकी आड़ में प्रीति कंपनी के अधिकारियों ने रेता, सीमेंट, बजरी, स्टील, मोबाइल, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के बिल काट दिए थे तथा कोई टेक्स नहीं भरा था।
एक फर्जी कंपनी को पकड़ा गया है जिसके मालिक ने 18 प्रतिशत जीएसटी दिखाकर तथा 6 करोड़ का कारोबार दिखाकर 20 करोड़ के बोगस बिल काट दिए। वहीं पहले की चार कंपनियों पर केस दर्ज हो चुका है उनकी पुलिस जांच कर रही है। विभाग की जांच में उक्त कंपनियों को करोड़ों का टेक्स चोरी करने का दोषी पाया गया है।
वीके शास्त्री, जिला काराधान आयुक्त।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। बोगस बिल काटकर करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाली एक और कंपनी का भंडाफोड़ हुआ है। वीरवार को जिला काराधान आयुक्त वीके शास्त्री ने शहर के डीएसपी रोड पर छापा मारकर फर्जी तरीके से बिल काटकर करोड़ों का टेक्स चोरी कर रही उक्त कंपनी में छापा मारा और कंपनी दफ्तर के सभी दस्तावेज जब्त कर लिए। वहीं बीते दिनों जिले के रतिया क्षेत्र में पकड़ी गई दो फर्जी कंपनियों व फतेहाबाद के भूना रोड पर पकड़ी गई दो कंपनियों के खिलाफ संबंधित थाना पुलिस ने राज्य जीएसटी अधिकारी की शिकायत के आधार धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
विदित हो कि बीते दिनों जिला कराधान एवं आबकारी विभाग के निरीक्षण में उक्त कंपनियां फर्जी पाई गई थी। इतना ही नहीं फर्जी निकली चारों कंपनियों द्वारा 11 सौ करोड़ का फर्जीवाडा भी सामने आया था। इससे पहले भी जिले के पुराना बस स्टैंड स्थित एक कंपनी को विभाग ने पकड़ा था। वीरवार को भी शहर के डीएसपी रोड पर एक कंपनी के दफ्तर पर छापा मारकर उसे सील किया है। जिला काराधान आयुक्त वीके शास्त्री ने बताया कि उक्त कंपनी ने भी पहले पकड़ी गई कंपनियों की तरह ही 18 प्रतिशत जीएसटी के हिसाब से करीब 6 करोड़ की परचेज दिखाकर करीब 20 करोड़ के बिल काट दिए थे तथा कोई टेक्स नहीं भरा था। उन्होंने बताया कि कंपनी के दस्तावेज कब्जे मेें ले लिए गए हैं, पूरी गहराई से जांच कर उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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इन कंपनियों पर दर्ज हुआ है केस
बीते दिनों जिला काराधान विभाग ने जिन कंपनियों पर छापा मारा था उनमें दो रतिया तथा दो कंपनियां फतेहाबाद की थी। उक्त चारों कंपनियों पर संबंधित थाना पुलिस ने राज्य जीएसटी अधिकारी संजय कुमार की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। जिन कंपनियों पर केस दर्ज हुआ है उनमें फतेहाबाद की गोपीराम इंडस्ट्रीज व मनीष काटन फैक्टरी जबकि रतिया की हरिओम कॉटन ट्रेड कंपनी रतिया एवं साईं ट्रेडिंग कंपनी शामिल हैं।
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टैक्स से बचने के लिए कैटल फीड का दिखाया लाइसेंस, लेकिन बिल काटे सीमेंट, मोबाइल व बजरी के
विदित हो कि इस सारे फर्जीवाडे में शामिल कंपनियों ने इंडस्ट्रीज का लाइसेंस कैटल फीड कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड करवाया हुआ था। यहां ये बात ध्यान देने योग्य है कि कैटल फीड टैक्स फ्री है। लेकिन इसकी आड़ में प्रीति कंपनी के अधिकारियों ने रेता, सीमेंट, बजरी, स्टील, मोबाइल, लैपटॉप व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के बिल काट दिए थे तथा कोई टेक्स नहीं भरा था।
एक फर्जी कंपनी को पकड़ा गया है जिसके मालिक ने 18 प्रतिशत जीएसटी दिखाकर तथा 6 करोड़ का कारोबार दिखाकर 20 करोड़ के बोगस बिल काट दिए। वहीं पहले की चार कंपनियों पर केस दर्ज हो चुका है उनकी पुलिस जांच कर रही है। विभाग की जांच में उक्त कंपनियों को करोड़ों का टेक्स चोरी करने का दोषी पाया गया है।
वीके शास्त्री, जिला काराधान आयुक्त।