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कोरोना वैक्सीन खराब न हो जाए इसलिए नहीं टूटने दे रहे कोल्ड चेन, रात दो बजे सेंटरों पर पहुंचा रहे संजीवनी
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कोरोना से बचाव का जो टीका हम लगा रहे है इसके पीछे कई ऐसे योद्धाओं का हाथ जो हम तक सुरक्षित पहुंचा रहे है। खुद रात को जगाकर स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा पहुंचा रहे हैं ताकि सुबह टीकाकरण अभियान सुचारु रूप से चलता रहे। ये ही नहीं ये ऐसे योद्धा हैं जिन्होंने डेढ़ साल से रविवार की भी छुट्टी नहीं ली है। ये कोई और नहीं बल्कि जिला वैक्सीन स्टोर का स्टाफ है जो दिन-रात जागकर कोरोना वैक्सीन जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचा रहा है।
कुरुक्षेत्र, करनाल और हिसार से वैक्सीन की सप्लाई लाकर टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचा रहे है। ये ही नहीं दवा की कोल्ड चेन भी नहीं टूटने दे रहे हैं। 2 से 8 डिग्री तापमान के बीच दवा को केंद्रों तक पहुंचा रहे है। अब तक जिले में वैक्सीन की करीब दो लाख डोज सप्लाई कर चुके है।
कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। कोरोना वैक्सीन की सप्लाई पहले हम हिसार, कुरुक्षेत्र और करनाल से लेकर आते हैं और फिर उसे जिला के अलग-अलग केंद्रों पर पहुंचा रहे है। कई बार रात को हम दो बजे यहां पर पहुंचते और फिर केंद्रों पर सप्लाई बांटने जाते हैं ताकि सुबह अभियान न रुके। सबसे बड़ी जिम्मेदारी ये भी होती है कि वैक्सीन तय तापमान में रहे। अगर 2 से 8 डिग्री तापमान में नहीं रहती है तो ये पानी के बराबर हो सकती है। - बलवान सिंह, इंचार्ज, जिला वैक्सीन स्टोर।
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कोरोना वैक्सीन की हम सेंटरों से रिपोर्ट लेते रहते है। जिस भी केंद्र पर स्टॉक कम होता या फिर खत्म हो जाता है वहां पर वैक्सीन पहुंचा रहे है। जहां भी सेशन लगते हैं वहां पर जाकर हम वैक्सीन पहुंचाकर आते है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी वैक्सीन को उचित तापमान में स्टोर में रखना और फिर उसे टीकाकरण कैंप तक पहुंचाना है। - रवि सोलंकी, फार्मेसी अधिकारी।
कोरोना महामारी शुरू होने के बाद अब तक एक भी छुट्टी नहीं ली है। कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं ताकि समय पर वैक्सीन पहुंचा सके। कई बार-बार ऐसे हालात भी रहते हैं जब 24 घंटे लगातार गाड़ी चलानी पड़ रही है। कई बार रात को दो बजे वैक्सीन लेकर पहुंचते हैं और फिर इसके बाद फील्ड में सप्लाई देने जाना पड़ता है। अब तक रिकॉर्ड रहा है, किसी भी सेंटर पर वैक्सीन की कमी नहीं आने दी है। - राकेश कुमार, चालक, जिला वैक्सीन स्टोर।
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कुरुक्षेत्र, करनाल और हिसार से वैक्सीन की सप्लाई लाकर टीकाकरण केंद्रों तक पहुंचा रहे है। ये ही नहीं दवा की कोल्ड चेन भी नहीं टूटने दे रहे हैं। 2 से 8 डिग्री तापमान के बीच दवा को केंद्रों तक पहुंचा रहे है। अब तक जिले में वैक्सीन की करीब दो लाख डोज सप्लाई कर चुके है।
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कोरोना वैक्सीन को सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। कोरोना वैक्सीन की सप्लाई पहले हम हिसार, कुरुक्षेत्र और करनाल से लेकर आते हैं और फिर उसे जिला के अलग-अलग केंद्रों पर पहुंचा रहे है। कई बार रात को हम दो बजे यहां पर पहुंचते और फिर केंद्रों पर सप्लाई बांटने जाते हैं ताकि सुबह अभियान न रुके। सबसे बड़ी जिम्मेदारी ये भी होती है कि वैक्सीन तय तापमान में रहे। अगर 2 से 8 डिग्री तापमान में नहीं रहती है तो ये पानी के बराबर हो सकती है। - बलवान सिंह, इंचार्ज, जिला वैक्सीन स्टोर।
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कोरोना वैक्सीन की हम सेंटरों से रिपोर्ट लेते रहते है। जिस भी केंद्र पर स्टॉक कम होता या फिर खत्म हो जाता है वहां पर वैक्सीन पहुंचा रहे है। जहां भी सेशन लगते हैं वहां पर जाकर हम वैक्सीन पहुंचाकर आते है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी वैक्सीन को उचित तापमान में स्टोर में रखना और फिर उसे टीकाकरण कैंप तक पहुंचाना है। - रवि सोलंकी, फार्मेसी अधिकारी।
कोरोना महामारी शुरू होने के बाद अब तक एक भी छुट्टी नहीं ली है। कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं ताकि समय पर वैक्सीन पहुंचा सके। कई बार-बार ऐसे हालात भी रहते हैं जब 24 घंटे लगातार गाड़ी चलानी पड़ रही है। कई बार रात को दो बजे वैक्सीन लेकर पहुंचते हैं और फिर इसके बाद फील्ड में सप्लाई देने जाना पड़ता है। अब तक रिकॉर्ड रहा है, किसी भी सेंटर पर वैक्सीन की कमी नहीं आने दी है। - राकेश कुमार, चालक, जिला वैक्सीन स्टोर।