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कोरोना काल में लॉकडाउन व अनलॉक के बीच व्यापारियों पर मंदी की मार
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कोरोना काल में लॉकडाउन -अनलॉक के बीच मंदी की मार ने व्यापार की अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त कर दी। हाल यह है कि जरूरत व खाने-पीने की वस्तुओं के दाम तो आसमान की ओर जा रहे हैं लेकिन भवन निर्माण सामग्री के दाम हर रोज कम हो रहे हैं जिसका कारण लोगों के पास पैसे न होना बताया गया है। पैसे की तंगी के कारण आम लोगों ने मकान व बिल्डिंग बनाने से हाथ खींच लिए हैं। जिसका परिणाम यह हुआ कि बिल्डिंग मैटेरियल के दाम लगातार नीचे गिर रहे हैं। अप्रैल से अब तक की बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में 15 से 25 फीसदी की कमी आ गई है।
लॉकडाउन में फैक्ट्रियां व दुकानें बंद होने के बाद लोगों के खर्चे बढ़े तो काम धंधा भी ठप हो गया। जिन लोगों जिन लोगों का मकान बन रहा था उन्होंने काम बीच में छोड़ दिया। नई कंस्ट्रक्शन के काम शुरू नहीं हो रहे। बिल्डिंग मैटेरियल विक्रेता काम ना होने से बेकार बैठे हुए हैं। जिसका परिणाम यह निकला कि बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में 15 से 25 फीसदी की कमी आ गई। मंदी की मार से जूझ रहे लोगों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
जानकारी अनुसार अप्रैल के बाद आम व्यवसाय 40 फीसदी तक कम हुआ है। लोगों के पास पैसे की कमी खासकर प्राइवेट क्षेत्र के लोगों के वेतन में कटौती का बिजनेस पर असर पड़ा है। अब शहरों में कंस्ट्रक्शन लगभग बंद सा पड़ा है। गांव में जरूरी मकान इत्यादि का निर्माण ही हो पा रहा है। जिस कारण कंस्ट्रक्शन बिजनेस से जुड़े ठेकेदार, दुकानदार इससे सीधा प्रभावित है।
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कंस्ट्रक्शन से जुड़े दुकानदारों के अनुसार, पिछले दिनों सीमेंट के भाव अप्रैल में 400 रुपये प्रति बैग चल रहे थे, जिसके दाम अब कम होकर 330 रुपये प्रति बैग पहुंच गए है। ऐसे ही सरिया/लोहा के दाम 4800 रुपये क्विंटल था, जो कम होकर 4200 रुपये तक पहुंच गया है। ईंट के भाव 5500 रुपये प्रति हजार से 4800 रुपये प्रति हजार हो गया है।
लॉकडाउन के बाद बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में कमी आई है। जिसकी वजह कंस्ट्रक्शन का काम बंद होना है। नए सरकारी काम भी अभी शुरू नहीं हो पा रहे। जैसे ही फसल आएगी फिर से काम शुरू होने की उम्मीद है।
-आरके मेहता, एसडीओ, लोकनिर्माण विभाग, फतेहाबाद।
पिछले दिनों से रेता, बजरी, सीमेंट व ईंटों के दामों में खासी वृद्धि हो गई थी। अब अप्रैल के बाद भाव में 20 फीसदी तक कमी आई है। धान की फसल आने के बाद फिर लोगों के पास पैसे आ जाएंगे तब काम चलने से मार्केट में तेजी आएगी।
-राकेश गिल्होत्रा, बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी, फतेहाबाद।
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लॉकडाउन में फैक्ट्रियां व दुकानें बंद होने के बाद लोगों के खर्चे बढ़े तो काम धंधा भी ठप हो गया। जिन लोगों जिन लोगों का मकान बन रहा था उन्होंने काम बीच में छोड़ दिया। नई कंस्ट्रक्शन के काम शुरू नहीं हो रहे। बिल्डिंग मैटेरियल विक्रेता काम ना होने से बेकार बैठे हुए हैं। जिसका परिणाम यह निकला कि बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में 15 से 25 फीसदी की कमी आ गई। मंदी की मार से जूझ रहे लोगों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
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जानकारी अनुसार अप्रैल के बाद आम व्यवसाय 40 फीसदी तक कम हुआ है। लोगों के पास पैसे की कमी खासकर प्राइवेट क्षेत्र के लोगों के वेतन में कटौती का बिजनेस पर असर पड़ा है। अब शहरों में कंस्ट्रक्शन लगभग बंद सा पड़ा है। गांव में जरूरी मकान इत्यादि का निर्माण ही हो पा रहा है। जिस कारण कंस्ट्रक्शन बिजनेस से जुड़े ठेकेदार, दुकानदार इससे सीधा प्रभावित है।
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कंस्ट्रक्शन से जुड़े दुकानदारों के अनुसार, पिछले दिनों सीमेंट के भाव अप्रैल में 400 रुपये प्रति बैग चल रहे थे, जिसके दाम अब कम होकर 330 रुपये प्रति बैग पहुंच गए है। ऐसे ही सरिया/लोहा के दाम 4800 रुपये क्विंटल था, जो कम होकर 4200 रुपये तक पहुंच गया है। ईंट के भाव 5500 रुपये प्रति हजार से 4800 रुपये प्रति हजार हो गया है।
लॉकडाउन के बाद बिल्डिंग मैटेरियल के दामों में कमी आई है। जिसकी वजह कंस्ट्रक्शन का काम बंद होना है। नए सरकारी काम भी अभी शुरू नहीं हो पा रहे। जैसे ही फसल आएगी फिर से काम शुरू होने की उम्मीद है।
-आरके मेहता, एसडीओ, लोकनिर्माण विभाग, फतेहाबाद।
पिछले दिनों से रेता, बजरी, सीमेंट व ईंटों के दामों में खासी वृद्धि हो गई थी। अब अप्रैल के बाद भाव में 20 फीसदी तक कमी आई है। धान की फसल आने के बाद फिर लोगों के पास पैसे आ जाएंगे तब काम चलने से मार्केट में तेजी आएगी।
-राकेश गिल्होत्रा, बिल्डिंग मैटेरियल व्यवसायी, फतेहाबाद।