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Fatehabad News: पराली की गांठें बनाकर भूले बेलर संचालक, नहीं कर रहे उठान

Sat, 09 Nov 2024 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 09 Nov 2024 11:51 PM IST
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Baler operators forgot to make bales of stubble, are not lifting it
फतेहाबाद। सरकार किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक कर रही है। किसानों को पराली की गांठें बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए उन्हें प्रति एकड़ 1000 रुपये तक अनुदान दिया जा रहा है।
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लेकिन दूसरी तरफ बेलर संचालक पराली की गांठें बनाने के बाद उनका उठान नहीं कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि धान की फसल लेने के बाद बची पराली उनके लिए जी का जंजाल बन रही है। एक तरफ जहां प्रशासन पराली जलाने वालों पर कार्रवाई कर रहा है, वहीं जो किसान पराली प्रबंधन कर रहे हैं, उनको भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खेत से फसल काटने के बाद पराली की गांठें बनाने वाले समय पर नहीं आते हैं। जिस कारण उन्हें परेशानी होती है।
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पराली का उठान नहीं होने के कारण किसान गेहूं की बिजाई समय पर नहीं कर पाते हैं। बेलर वालों को बार-बार फोन करने के बाद वे आकर पराली की गांठें बनाकर चले जाते हैं। उसके बाद खेत में बनी पराली की गांठों को 10 दिन तक उठाया नहीं जा रहा है। जिस कारण किसानों को गेहूं की बिजाई करने में काफी दिक्कत होती है। किसान अब खुद पराली की गांठों को खेतों से निकालकर उन्हें खाली पड़ी जगह पर रख रहा है।
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किसानों को नहीं मिल रही अनुदान राशि
किसानों को पराली प्रबंधन करने का लाभ भी नहीं मिल रहा। किसान राजकुमार ने बताया कि वह साढ़े छह एकड़ में खेती करता है। चार साल से उसने पराली न जलाकर उसकी गांठें बनवाई, लेकिन गांठें बनाने पर उनको जो अनुदान राशि मिलनी थी वो नहीं मिली। कई बार कृषि विभाग के चक्कर भी लगाए, लेकिन वो बोलते हैं कि पैसे खाते में आ जाएंगे।

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गेहूं बिजाई करने में आ रही है दिक्कत
गांव हिजरावां खुर्द के किसान रविंद्र सिंह ने बताया कि गांठें बनकर तैयार है। मगर अभी तक इसे कोई उठाने नहीं आया है। जब तक यह गांठें नहीं उठेंगी, तब तक गेहूं की बिजाई के लिए खेत को तैयार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जो बेलर संचालक पराली की गांठें बनाकर जाता है, वहीं उठाने का काम करवाता है। किसानों के खेतों में अगर फसल कटने के साथ ही पराली की गांठें बना दी जाएं और उनको हाथोंहाथ उठा लिया जाए तो फिर कोई किसान पराली में आग नहीं लगाएगा।
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