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Fatehabad News: निजीकरण की नीति के खिलाफ चारों यूनियन आईं एक मंच पर
Mon, 03 Aug 2026 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:47 PM IST
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कार्यकारी अभियंता के कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते बिजली कर्मचारी। संवाद
टोहाना। सरकार पर कर्मचारी विरोधी नीतियों का आरोप लगाकर सरकार के खिलाफ हरियाणा के बिजली कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सोमवार से कार्यकारी अभियंता के कार्यालय के बाहर तीन दिवसीय यूनिट स्तरीय धरना और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया जो 5 अगस्त तक चलेगा।
सोमवार सुबह से ही कर्मचारी बिजली कार्यालय के बाहर जुटे और नारे लगाए। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने और स्मार्ट मीटर योजना लागू करने की आड़ में पूरे सिस्टम को प्राइवेट करना चाहती है। इससे कर्मचारियों की छंटनी होगी और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाएगा।
प्रदर्शन में वर्कर यूनियन, महासंघ यूनियन और इंजीनियर एसोसिएशन सहित चारों यूनियन एक साथ नजर आईं। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार दबाव की नीति अपना रही है और कर्मचारियों के हकों पर डाका डाल रही है। यूनियन के नेता रामनिवास, शमशेर सिंह ने कहा कि सरकार अगर हमारी मांगें नहीं मानती तो यह सिर्फ शुरुआत है।
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3, 4, 5 अगस्त को यूनिट स्तर पर प्रदर्शन के बाद 6, 7, 8 अगस्त को भी कार्यक्रम तय किए गए हैं। अगर तब तक भी सरकार नहीं चेती तो 11, 12, 13 अगस्त को प्रदेश स्तर पर बड़ी हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में सभी कर्मचारी एकजुट हैं और निजीकरण का फैसला वापस न लिए जाने तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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सोमवार सुबह से ही कर्मचारी बिजली कार्यालय के बाहर जुटे और नारे लगाए। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने और स्मार्ट मीटर योजना लागू करने की आड़ में पूरे सिस्टम को प्राइवेट करना चाहती है। इससे कर्मचारियों की छंटनी होगी और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाएगा।
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प्रदर्शन में वर्कर यूनियन, महासंघ यूनियन और इंजीनियर एसोसिएशन सहित चारों यूनियन एक साथ नजर आईं। यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार दबाव की नीति अपना रही है और कर्मचारियों के हकों पर डाका डाल रही है। यूनियन के नेता रामनिवास, शमशेर सिंह ने कहा कि सरकार अगर हमारी मांगें नहीं मानती तो यह सिर्फ शुरुआत है।
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3, 4, 5 अगस्त को यूनिट स्तर पर प्रदर्शन के बाद 6, 7, 8 अगस्त को भी कार्यक्रम तय किए गए हैं। अगर तब तक भी सरकार नहीं चेती तो 11, 12, 13 अगस्त को प्रदेश स्तर पर बड़ी हड़ताल की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में सभी कर्मचारी एकजुट हैं और निजीकरण का फैसला वापस न लिए जाने तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।