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Fatehabad News: मोबाइल फोन पर प्रॉपर्टी टैक्स के साथ विकास शुल्क की बजी घंटी, संपत्ति मालिकों में खलबली

Mon, 03 Aug 2026 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 03 Aug 2026 10:51 PM IST
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Alert regarding development charges alongside property tax rings on mobile phones; property owners in a stir
फतेहाबाद के नगर परिषद कार्यालय में प्रॉपर्टी आईडी में बिल की जानकारी लेते हुए धारक संवाद
फतेहाबाद। नगर परिषद द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स बकाया को लेकर भेजे गए एसएमएस ने शहर के प्रॉपर्टी धारकों में खलबली मचा दी है। इन मैसेज में प्रॉपर्टी टैक्स और विकास शुल्क के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। शहर में करीब 42 हजार प्रॉपर्टी हैं, जिनके धारक अब नगर परिषद कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।
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एसएमएस में लिखा है कि आपकी आईडी नंबर पर प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। बकाया राशि का भुगतान सात दिन में करें और ब्याज पर 75 फीसदी छूट पाएं । इस अधूरी जानकारी से लोग परेशान हैं। कई प्रॉपर्टी धारकों का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष टैक्स अदा किया था। फिर भी इतना बकाया कैसे आ गया। जानकारी जुटाने पर पता चला कि विकास शुल्क भी साथ जुड़ा हुआ है। यह शुल्क उन लोगों को भी भेजा गया है जिन्होंने पहले ही भुगतान कर दिया है।
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नोटिस में अस्पष्टता और पार्षद की मांग
पार्षद मोहन लाल नारंग ने विभाग से विस्तृत प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस और बिल जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इनमें वित्त वर्ष 2025-26 तक का बकाया प्रॉपर्टी टैक्स, अग्नि शमन सेवा शुल्क, ब्याज और कूड़ा-करकट उठान शुल्क शामिल हो। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के शुल्क भी स्पष्ट रूप से दर्शाए जाने चाहिए। विकास शुल्क को अलग से दिखाया जाना चाहिए। 31 मार्च 2025 तक बकाया ब्याज पर 75 फीसदी छूट की जानकारी भी शामिल हो। निकाय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस-बिल में विकास शुल्क का जिक्र नहीं है, जबकि नो ड्यूज सर्टिफिकेट में यह शामिल है।
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गलत सर्वे और विभाग की लापरवाही
विकास शुल्क सहित ये नोटिस उन प्रॉपर्टी धारकों को भी भेजे गए हैं जिन्होंने पहले ही भुगतान कर दिया है। इसके अलावा, 1975 से पहले की पुरानी रिहायशी कॉलोनियों और लाल डोरे में शामिल कॉलोनियों के निवासियों को भी नोटिस मिले हैं। इन पर विकास शुल्क लागू नहीं होता है। वर्ष 2021 में याशी कंपनी द्वारा किए गए शहरी प्रॉपर्टी सर्वे में भी कई गलतियां थीं। सर्वे में प्रॉपर्टी धारकों के नाम, फोन नंबर और प्रॉपर्टी का क्षेत्रफल गलत दर्ज किया गया था। इन गलतियों को ठीक करवाने के लिए लोग चार साल बाद भी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। याशी कंपनी को अपनी गलतियां ठीक करनी चाहिए थीं।

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प्रॉपर्टी मालिकों को गृहकर बकाया के बारे में मोबाइल मैसेज के जरिए सूचना दी गई है। विकास शुल्क के बारे में भी मैसेज के जरिए सूचना दी गई है। प्रॉपर्टी धारक को पता होना चाहिए कि उसका कितना बकाया है।
- गोविंद, सचिव, नगर परिषद
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