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बस अब और नहीं! करो आर-पार की लड़ाई और पंजाब की तरह कश्मीर को भी दिलाओ आंतकवाद से निजात’
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में 44 जवानों की शहादत के बाद देशवासियों में गुस्सा साफ तौर पर झलक रहा है। हर आंख में आंसू व जुबान पर बदले की मांग है। अमर उजाला ने शुक्रवार को जिले के मौजिज लोगों से बात की तो अधिकतर लोगों का यही कहना था कि बस अब बहुत हो गया। अब आतंक के खिलाफ आरपार की लड़ाई शुरू होनी चाहिए और कश्मीर को भी पंजाब की तर्ज पर आंतक से मुक्त करना होगा।
‘इस तरह का हमला आतंकवादियों की कायराना हरकत का सबसे बड़ा सबूत है। लेकिन अगर इस समय आतंकवादियों को उनकी जुबान में ही जवाब ना दिया गया तो इसे हमारी कमजोरी समझा जाएगा। इसलिए जैसे को तैसा सरीखा जवाब ही दिया जाना चाहिए।
- डा. रोहित बतरा, प्रसिद्ध ईएनटी स्पेशलिस्ट एवं पूर्व सचिव आईएमए फतेहाबाद।
‘पुलवामा हमला आतंकवादियों की घटिया सोच को साबित करता है। उन्हें पता है कि वो आमने-सामने की लड़ाई में भारतीय सेना का मुकाबला नहीं कर सकते, इसलिए इस तरह की कायराना हरकत को अंजाम दिया गया है।’
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विनय शर्मा, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, फतेहाबाद ।
‘देश के सैनिकों का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य बनता है। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले की जितनी निंदा की जाए वह कम है, लेकिन हमें इस तरह के हमलों से घबराने की बजाय ऐसे हमले भविष्य में न हों, उन पर विचार करना होगा। शहीदों के परिजनों के साथ दिल से संवेदनाएं हैं।’
केके अरोड़ा, प्रांतीय अध्यक्ष, भारत विकास परिषद एवं प्रमुख शिक्षाविद, फतेहाबाद।
‘इस मामले में खुफिया एजेंसियों की नाकामी को भी नकार नहीं सकते। आतंकवादियों का काम ही है कि वो देश में आतंक का माहौल बना सकें, लेकिन अगर समय रहते हमारी खुफिया एजेंसियां सावधान हो जाती तो आज देश के 44 बहादुर जवान इस तरह शहीद ना होते।
- देवेंद्र सिंह दहिया, संरक्षक, राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ।
‘हर व्यक्ति को हर सैनिक व शहीद के परिवार को जहां कहीं मिले सलाम करके सम्मान देना होगा। पुलवामा में शहीदों के परिजनों को जिस किसी प्रकार की भी सहायता पहुंचाने की बात आई तो सभी को मिलकर उन परिवारों की मदद भी करनी चाहिए। इसके साथ ही अब वक्त आ गया है कि हम वास्तव में एक सिर के बदले दुश्मन के दस सिर लेकर आएं, तभी देशवासियों को चैन मिलेगा।’
- हरदीप सिंह, जिलाध्यक्ष, जिंदगी संस्था।
आतंकी संगठनों का खात्मा करके ही शहीदों का बदला लिया जाना चाहिए। भारतीय सेना कमजोर नहीं है। अहिंसा की राह पर चलने वाली भारतीय सेना दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब जरूर देगी।
- राजेंद्र ठकराल, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, टोहाना ।
‘आज पूरा भारत देश शहीदों के परिवार के साथ खड़ा होकर आतंकियों से बदले की मांग उठा रहा है। वीर सैनिकों पर हमला करने वाले कायर आतंकियों को जवाब मिलना ही चाहिए।’
रमेश गोयल, व्यापार मंडल संरक्षक, टोहाना
‘भारतीय जवानों की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए। सरकार को भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई के आदेश देने चाहिए ताकि शहादत का बदला लिया जा सके। युवा वर्ग के आतंकियों की मानसिकता को बदलना ही इस समस्या का स्थायी हल होगा। युवाओं में आध्यात्मिकता को लाकर ही इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।’
डा. शिव सचदेवा, प्रमुख समाजसेवी, टोहाना ।
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फतेहाबाद। पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में 44 जवानों की शहादत के बाद देशवासियों में गुस्सा साफ तौर पर झलक रहा है। हर आंख में आंसू व जुबान पर बदले की मांग है। अमर उजाला ने शुक्रवार को जिले के मौजिज लोगों से बात की तो अधिकतर लोगों का यही कहना था कि बस अब बहुत हो गया। अब आतंक के खिलाफ आरपार की लड़ाई शुरू होनी चाहिए और कश्मीर को भी पंजाब की तर्ज पर आंतक से मुक्त करना होगा।
‘इस तरह का हमला आतंकवादियों की कायराना हरकत का सबसे बड़ा सबूत है। लेकिन अगर इस समय आतंकवादियों को उनकी जुबान में ही जवाब ना दिया गया तो इसे हमारी कमजोरी समझा जाएगा। इसलिए जैसे को तैसा सरीखा जवाब ही दिया जाना चाहिए।
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- डा. रोहित बतरा, प्रसिद्ध ईएनटी स्पेशलिस्ट एवं पूर्व सचिव आईएमए फतेहाबाद।
‘पुलवामा हमला आतंकवादियों की घटिया सोच को साबित करता है। उन्हें पता है कि वो आमने-सामने की लड़ाई में भारतीय सेना का मुकाबला नहीं कर सकते, इसलिए इस तरह की कायराना हरकत को अंजाम दिया गया है।’
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विनय शर्मा, अध्यक्ष, बार एसोसिएशन, फतेहाबाद ।
‘देश के सैनिकों का सम्मान करना हर व्यक्ति का कर्तव्य बनता है। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले की जितनी निंदा की जाए वह कम है, लेकिन हमें इस तरह के हमलों से घबराने की बजाय ऐसे हमले भविष्य में न हों, उन पर विचार करना होगा। शहीदों के परिजनों के साथ दिल से संवेदनाएं हैं।’
केके अरोड़ा, प्रांतीय अध्यक्ष, भारत विकास परिषद एवं प्रमुख शिक्षाविद, फतेहाबाद।
‘इस मामले में खुफिया एजेंसियों की नाकामी को भी नकार नहीं सकते। आतंकवादियों का काम ही है कि वो देश में आतंक का माहौल बना सकें, लेकिन अगर समय रहते हमारी खुफिया एजेंसियां सावधान हो जाती तो आज देश के 44 बहादुर जवान इस तरह शहीद ना होते।
- देवेंद्र सिंह दहिया, संरक्षक, राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ।
‘हर व्यक्ति को हर सैनिक व शहीद के परिवार को जहां कहीं मिले सलाम करके सम्मान देना होगा। पुलवामा में शहीदों के परिजनों को जिस किसी प्रकार की भी सहायता पहुंचाने की बात आई तो सभी को मिलकर उन परिवारों की मदद भी करनी चाहिए। इसके साथ ही अब वक्त आ गया है कि हम वास्तव में एक सिर के बदले दुश्मन के दस सिर लेकर आएं, तभी देशवासियों को चैन मिलेगा।’
- हरदीप सिंह, जिलाध्यक्ष, जिंदगी संस्था।
आतंकी संगठनों का खात्मा करके ही शहीदों का बदला लिया जाना चाहिए। भारतीय सेना कमजोर नहीं है। अहिंसा की राह पर चलने वाली भारतीय सेना दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब जरूर देगी।
- राजेंद्र ठकराल, अध्यक्ष, व्यापार मंडल, टोहाना ।
‘आज पूरा भारत देश शहीदों के परिवार के साथ खड़ा होकर आतंकियों से बदले की मांग उठा रहा है। वीर सैनिकों पर हमला करने वाले कायर आतंकियों को जवाब मिलना ही चाहिए।’
रमेश गोयल, व्यापार मंडल संरक्षक, टोहाना
‘भारतीय जवानों की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए। सरकार को भारतीय सेना को जवाबी कार्रवाई के आदेश देने चाहिए ताकि शहादत का बदला लिया जा सके। युवा वर्ग के आतंकियों की मानसिकता को बदलना ही इस समस्या का स्थायी हल होगा। युवाओं में आध्यात्मिकता को लाकर ही इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।’
डा. शिव सचदेवा, प्रमुख समाजसेवी, टोहाना ।